चोर साहब के कारनामों के बाद अब कुतरूं प्राचार्य के काले कारनामे तथा
-ब्लैकमेलर शिक्षक- दो कृतियों की कडिय़ां 14 जनवरी से
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कनीना की आवाज। डा. होशियार सिंह यादव विश्व रिकार्डधारक पूर्व शिक्षक, लेखक, साहित्यकार एवं पत्रकार ने जहां विगत दिनों चोर साहब के कारनामों पर 65 कडिय़ा प्रकाशित की थी और वह पुस्तक पूरी होने के कारण प्रकाशन हेतु प्रेस में जा चुकी है। लोगों ने चोर साहब के कारनामों को बहुत सराहा था। ऐसे में जितने भी पाठक जुड़े रहे उन सभी का आभार। अब 14 जनवरी 2026 से 2 नई कृतियां प्रकाशन की तैयारियां पूर्ण हो गई है।
पहली कृति का नाम होगा कतरूं प्राचार्य के काले कारनामें । इस पुस्तक के विषय में मैं बताना चाहूंगा कि करीब 40 सालों के शिक्षण में 35 विभिन्न प्राचार्यों से भेंट हुई। जिनमें एक कुतरूं प्राचार्य भी मिला जो अय्याशी किस्म का था। उसके कारनामे देखे जाए तो बहुत मशहूर है वह अपनी बेटी के समान शिक्षिकाओं पर भी बुरी नजर रखता था। जब तक मैंने पढ़ाया तब तक उसकी बुरी नजर मशहूर रही थी। शिक्षिकाओं को अपने पास घंटों बैठाए रखता था। जब मैं स्कूल से अन्यत्र चला गया तब भी उसने अपने कारनामे जारी रखें। गांव के लोगों से क्या-क्या हाथ पैर जोड़ता था गिर गिरता था लोग उसे कुतरूं कहते थे। इसलिए इस कृति का नाम कुतरूं प्राचार्य के काले कारनामे रखा है। जिसकी प्रथम कड़ी 14 जनवरी 2026 को कनीना की आवाज ब्लाग में डाली जाएगी।
दूसरी कृति ब्लैकमेलर शिक्षक होगी। डा. होशियार सिंह पूर्व विज्ञान शिक्षक के संपर्क में आया था। 40 सालों की शिक्षण अवधि में एक ऐसा शिक्षक भी मिला जिसे शिक्षक कहते हुए शिक्षक कहते हुए शर्म आती है। जिसको न हिंदी आती, ना अंग्रेजी आती, ना संस्कृत आती, न ही उर्दू आती, न फारसी आती ना आने कोई भाषा का ज्ञान था। वह बहुत मशहूर रहा है। परंतु चापलूसी में अग्रणी पंक्ति में रहा है। किसी के पैर पकड़ लेना, किसी के आगे हाथ जोड़कर गिड़गिड़ा लेना और यहां तक की उसे अगर थोड़ा सा धमका दे तो तो वह पीछे हट जाता था। उसकी सबसे बड़ी विशेषता थी रही है कि सभी को ब्लैकमेल करने पर तुला रहता था। किसी को नौकरी लगाना, किसी को किसी केस से बरी करवाना, किसी को कोई लोन दिलवाना, किसी का अन्य कोई काम करवाने के आश्वासन देने में मशहूर रहा है। यहां तक की उसकी अनेकों ब्लैकमेलिंग की घटनाएं सामने आई हैं। सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वह ऐसे लोगों को अपनी नजदीक रखता है जो रंडी जैसे गुण रखते हैं। इस शिक्षक के कारनामे तो बहुत अधिक सामने आ गए हैं और पास में रख लिए हैं। अब सोचा कि क्यों नहीं एक के बाद एक कड़ी डालता रहूं। किसी ने कहा कि उनकी नौकरी हट जाएगी, आपके पास सारे प्रमाण है तो मैं उनसे साफ कह दिया कि चाहे मेरा कोई दुश्मन की है तो उसे नौकरी नहीं हटवाना चाहूंगा। चूंकि नौकरी किसी को देना सीखना चाहिए ,हटवाना नहीं। हां उसके जो ब्लैकमेलिंग के कारनामे हैं वे जरूर प्रकाशित करूंगा। यह भी सोच लिया जो भी राक्षस प्रवृत्ति के लोग मेरे जीवन में मेरे विरुद्ध खड़े थे उनके कारनामे सभी के सामने लाये जाएंगे। जान आनी जानी होती है। एक न एक दिन सभी को जाना होता है। अब उनसे पूरे जोश के साथ लड़ा जाएगा क्योंकि सच्चाई बहुत कड़वी होती है, बहुत दर्द देती है और कलम की मार तो सबसे बुरी होती है। इसलिए अब कलम की मार की जाएगी ताकि लोग उनके कारनामों से परिचित हो सके। आशा है सभी पाठकवृंद का साथ यूं ही बना रहेगा।
स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान दिवस पर दौंगड़ा अहीर में हवन यज्ञ
-समाजजनों ने दी श्रद्धांजलि
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कनीना की आवाज। आर्य समाज के महान संन्यासी, समाज-सुधारक एवं राष्ट्रनिर्माता स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान दिवस के अवसर पर दौंगड़ा अहीर स्थित आर्य समाज मंदिर में वैदिक विधि-विधान के साथ हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। यज्ञ के दौरान वेद मंत्रों की गूंज से पूरा वातावरण श्रद्धा, आध्यात्मिक ऊर्जा और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता आर्य समाज के प्रधान रघुवीर सिंह आर्य ने की। इस अवसर पर हरपाल थानेदार महाशय, भारत सिंह, जयवीर सिंह, वीर सिंह, पवन कुमार योगाचार्य, उजागर शास्त्री सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में विद्यालयों के छात्र-छात्राओं तथा महिलाओं ने भी हवन यज्ञ में भाग लेकर स्वामी श्रद्धानंद को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
वक्ताओं ने अपने संबोधन में स्वामी श्रद्धानंद के जीवन और बलिदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने नारी शिक्षा, सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन और राष्ट्र निर्माण के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उनका त्याग और विचारधारा आज भी समाज को सही दिशा दिखाने का कार्य कर रही है। उपस्थित लोगों से उनके आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम के अंत में विश्व शांति, सामाजिक समरसता और राष्ट्र की उन्नति की कामना के साथ पूर्णाहुति की गई। सभी ने एक स्वर में स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान को नमन करते हुए उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
फोटो कैप्शन 09: श्रद्धानंद को याद करते हुए
धुंध एवं कोहरे में रखे किसान ध्यान- राम रतन जेई
--धुंध में नहीं दिखाई देते तार
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कनीना की आवाज। कनीना के 132 केवी उपकेंद्र के रामरतन गोमली जेई ने किसानों को सलाह दी है कि इस धुंध एवं कोहरे के मौसम में फव्वारा लाइन बदलते समय सावधानी बरते। उन्होंने कहा कि रात के समय धुंध एवं कोहरा अधिक होता है और एल्युमिनियम के पाइप जब उठते हैं तो धुंध एवं कोहरे के कारण बिजली के तारों से छूने का खतरा बना रहता है। ऐसे में आती सावधानी से पाइपों को उठाए चूंकि तारों को छूने एवं जान को खतरा बन जाता है। उन्होंने कहा कि हो सके तो तारों के नीचे फव्वारा पाइप न बिछाएं और जब उठाते हैं उसे समय बड़ी सावधानी बरते। धुंध एवं कोहरे में हवाई करंट का खतरा बन जाता है ऐसे में सोच समझकर और बड़ी सावधानी से ही फव्वारा पाइप लाइन को बदले। फोटो कैप्शन: रामरतन गोमली
15 दिनों का अवकाश घोषित
- सरकारी स्कूलों में सर्दियों का रहेगा अवकाश, 16 जनवरी को फिर खुलेंगे स्कूल
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कनीना की आवाज। हरियाणा के सरकारी स्कूलों में 1 जनवरी से 15 जनवरी तक स्कूलों का अवकाश रहेगा। 16 जनवरी को फिर से स्कूल खुलेंगे परंतु लेकिन 10वीं और 12वीं के छात्रों को प्रायोगिकी/प्रेक्टिकल के लिए बुलाया जा सकता है। इस संबंध में शिक्षा विभाग ने पत्र जारी कर दिया है।
सेहलंग में 141 यूनिट रक्तदान
-स्व. गौरव सेहलंगिया की चौथी पुण्यतिथि पर आयोजित हुआ शिविर
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कनीना की आवाज। उपमंडल के गांव सेहलंग निवासी स्वर्गीय गौरव सेहलंगिया की चौथी पुण्यतिथि के अवसर पर मंगलवार को प्रेरणादायक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में युवाओं व ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए कुल 141 यूनिट रक्तदान किया। यह रक्तदान शिविर एम्स बाढ़सा, झज्जर की देखरेख में संपन्न हुआ।
शिविर का शुभारंभ मुख्य अतिथि कुलदीप यादव ने किया। उनके साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में जयप्रकाश ककराला चेयरमैन, पंचायत समिति कनीना, राकेश कुमार जिला प्रमुख तथा समाजसेवी रमेश शर्मा शाखा प्रबंधक, सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक, सेहलंग उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि कुलदीप यादव ने कहा कि स्व. गौरव सेहलंगिया की पुण्यतिथि पर रक्तदान शिविर जैसे पुनीत कार्य का आयोजन करना उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने कहा कि रक्त जीवन का सबसे अनमोल उपहार है और एक यूनिट रक्त कई जरूरतमंदों की जिंदगी बचा सकता है। उन्होंने युवाओं से नियमित रक्तदान करने का आह्वान किया। विशिष्ट अतिथि जयप्रकाश ककराला ने कहा कि रक्त किसी फैक्टरी में नहीं बनता, इसलिए रक्तदान कर हम किसी की जान बचा सकते हैं। स्वस्थ व्यक्ति को प्रत्येक तीन से चार माह में रक्तदान अवश्य करना चाहिए। ऐसे आयोजनों से समाज में जागरूकता बढ़ती है और मानवीय संवेदनाएं मजबूत होती हैं। रक्तदान शिविर के सफल आयोजन में सेहलंगिया जनसेवा ग्रुप एवं रमेश क्रांति सेहलंगिया टीम का विशेष योगदान रहा। इस अवसर पर पवन कोच, सतपाल, मनमोहन, परवीन नंबरदार, सुनील कुमार, सतीश कुमार, हरेंद्र, हवासिंह सरपंच, कपिल राय, मास्टर विजयपाल, अशोक प्रधान, बलबीर हंसराज बोहरा, हिमांशु, सीताराम जांगिड़, हनुमान, पुरुषोत्तम सोनी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग व रक्तदाता मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 08: रक्तदान शिविर में रक्तदान करने वालों को पुरस्कृत करते हुए
दौंगड़ा अहीर में शोक की लहर
-सुमित्रा देवी का 83 वर्ष की आयु में निधन
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कनीना की आवाज। गांव दौंगड़ा अहीर निवासी राजकुमार, सत्यपाल एवं महेंद्र सिंह ठेकेदार की माताजी सुमित्रा देवी का मंगलवार को 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की सूचना मिलते ही गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
कनीना बस स्टैंड के सामने गंदगी का साम्राज्य
-विलायती कीकर दे रही है आवारा जंतुओं को पनाह, लोग त्यागते हैं मलमूत्र
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कनीना की आवाज। कनीना के परम संत बाबा मोलडऩाथ आश्रम तथा कनीना बस स्टैंड के बीच भारी गंदगी का साम्राज्य बन गया है। जो चारदीवारी भी बस स्टैंड की बनाई गई थी, पीछे से तोड़कर लोगों ने भारी कूड़ा कचरा डालना शुरू कर दिया है जिनमें सूअर आदि मंडराते रहते हैं। एक और जहां सुबह-शाम लोग मल मूत्र त्यागने के लिए आते हैं वही यहां पड़ी गंदगी कनीना के बस स्टैंड और मोलडऩाथ आश्रम के लिए कलंक का कार्य कर रही है। आसपास दुकानदार और लोग कूड़ा कचरा भी डालने लग गए हैं जिसके चलते गंदगी का साम्राज्य बढ़ता जा रहा है। उल्लेखनीय है कि बार-बार बस स्टैंड की दीवार को ठीक करवाया जाता किंतु लोग चोरी-छिपे से इसे तोड़ जाते हैं। इस वक्त भारी मात्रा में झाड़ झंखाड़ खड़े। विगत वर्षों एक बार तो जेसीबी से खड़ी विलायती कीकर हटवाई गई थी किंतु फिर से यहां झाड़ झंखाड़ खड़ा हो गया है। इनमें विलायती कीकर सबसे अधिक हैं।
यदि झाड़ झंखाड़ दूर कर दिया जाए और मिट्टी से भरत करवा दिया जाए तो बस स्टैंड की रौनक तथा संत शिरोमणि बाबा मोलडऩाथ आश्रम की रौनक बढ़ाई जा सकती है। विगत वर्ष हरियाणा सरकार ने इस बस स्टैंड की सुध लेने की बात कही थी तथा नवीकरण करने की बात चलाई थी किंतु अभी तक इसका पुनरुद्धार शुरू नहीं हुआ है जिसके चलते लोग बेहद परेशान है। कनीना के लिए यह सबसे प्रदूषित जगह बन गई है।
कनीना बस स्टैंड की पुरानी बिल्उिंग को तोड़कर नई बनाने की कार्रवाई अभी तक शुरू नहीं की गई है। बस स्टैंड में अंदर महज टीनशेड है। ऐसे में यात्री मलमूत्र त्यागने के लिए मजबूरन इन झाडिय़ों में जा रहे हैं। यदि नया बस स्टैंड बन जाए तो इस समस्या से निजात मिल सकता है।
फोटो कैप्शन 06: कनीना बस स्टैंड में खड़े झाड़ झंखाड़ एवं पड़ा कूड़ा कचरा।
दोपहर तक चली धुंध, कड़ाके की ठंड जारी
-दोपहर तक सूरज करता रहा लुक्का छिपी
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कनीना की आवाज। कनीना क्षेत्र में विगत दिनों से पूरी रात धुंध पड़ रही है जो दोपहर तक चलती है। दिन में कुड समय के लिए सूरज के दर्शन होते हैं। दिनभर कड़ाके की ठंड पड़ रही है। कनीना कस्बे में जहां पहले पाला भी जमा था, बाद में धुंध पड़ी तत्पश्चात मौसम साफ चल रहा है और एक बार फिर से धुंध पडऩे का सिलसिला जारी है। मौसम पल पल बदल रहा है। दोपहर तक सूरज आंख मिचौनी का खेल करता रहा।
उल्लेखनीय है कि कनीना क्षेत्र में 20000 हेक्टेयर पर सरसों तो 8000 हेक्टेयर पर गेहूं की फसल उगाई गई है जिसके लिए सर्दी की जरूरत होती है। अभी इतनी सर्दी भी नहीं पड़ रही है जिससे फसल को कोई नुकसान हो। यह सर्दी फसलों के लिए लाभदायक साबित होगी।
किसान सुरेंद्र कुमार, कृष्ण कुमार, अजीत कुमार, सूबे सिंह, राजेंद्र सिंह आदि ने बताया कि सर्दी पडऩे से ही सरसों और गेहूं के फसल में आब आ जाती है लेकिन अधिक समय तक मौसम खराब रहने से फसलों को नुकसान हो सकता है। अभी तक ऐसी हालत नहीं बनी है कि फसलों को कोई नुकसान हो।
क्या कहते हैं कृषि अधिकारी-
एसडीओ कृषि महेंद्रगढ़ डा. अजय यादव ने बताया कि दिन में धूप खिलती है तथा रात को धुंध पड़ती है जिसका फसलों पर कोई कुप्रभाव नहीं पड़ेगा। यदि पाला जमता है तो किसानों को चाहिए कि हल्की फव्वारों से सिंचाई कर दे। या फिर खेत के चारों कोनों पर धुआं कर दे जिससे पाले और ठंड का फसलों पर कम प्रभाव पड़ेगा चूंकि धुआं फसलों के ऊपर एक पर्त बना लेती है जिससे बाहृ ठंड एवं पाले का नुकसान कम हो जाता है।
फोटो कैप्शन 01: कनीना में धुंध के चलते आंख मिचौनी करता सूर्यदेव
07: धुंध का नजारा
पुण्यतिथि 24 दिसंबर को
ठेठ ग्रामीण कवि के रूप में जाने जाते हैं जयनारायण
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कनीना की आवाज। कनीना के ठेठ ग्रामीण कवि एवं गोपालक के रूप में जयनारायण को जाना जाता है। आज से 36 वर्ष पहले उनका निधन हो गया था। उनकी 36वीं पुण्यतिथि पर उनके आवास कनीना, वार्ड-एक में पुष्प अर्पित किये जाएंगे।
कृष्ण कुमार ने उनके बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि जयनारायण के पिता का नाम शंकर था। वे बचपन में पंजाब के अबोहर में पले एवं बड़े हुए थे। कनीना में आने के बाद वे रांझा पाली के रूप में जाने गए। वैसे तो उन्हें डेयरीवाला नाम से जाना जाता है और आज भी उनके नाम पर एक स्टोर चल रहा है जिसे पूरा कस्बा ही नहीं अपितु आस पास के लोग जैनिया का स्टोर नाम से जानते हैं। वे लाठी चलाने में जितने माहिर थे उनसे कहीं अधिक अलगोजा बनाने में मशहूर थे। उनके बड़े भाई अर्जुन तो दूर दराज तक लाठी के जानकार के रूप में विख्यात हुए हैं किंतु अल्पायु में ही उनका निधन हो गया था।
जैनारायण की बांसुरी, अलगोजा, पटा आदि को देखने के लिए दूर दरज के लोग आते थे। उनकी कविताई की क्षमता एवं गायकी की क्षमता अनोखी थी। कम लिखे पढ़े होने के बावजूद भी वे प्रकृति, गाय, भैंस एवं जीव जंतुओं पर बेहतर कविताएं बना लेते थे। उनके कई उदात गुणों के चलते उन्हें आज भी जाना जाता है। अंतत उनकी मृत्यु 24 फरवरी 1989 को कनीना में हुई। उनकी कविताओं की पुस्तक उनके पुत्र द्वारा प्रकाशित करवाई जा चुकी है। उस पुस्तक को पढ़कर उनकी कविताई का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। जयनारायण गाये एवं भैंसें पालते थे था उनको दूर बणियों में चराने के लिए ले जाते थे। जंगल में मंगल के रूप में वो अपनी दिनचर्या कविताई एवं गायकी में बिताते थे। लाठी चलाने तथा अलगोजा बजाने में माहिर थे। उनको सदा याद किया जाता रहेगा। गरीबी में भी जीकर दूसरों के लिए प्रेरणा का काम कर गये। 24 फरवरी को उनका निधन हो गया था।
जब जयनारायण गायों और कुछ भैंसों को पीपलवाली बणी, रनासवाली बणी, मानका की बनी तथा बड़ी-बणी एवं आसपास क्षेत्रों में ले जाते थे तो उनके साथ लीला,बीर सिंह, भरपूर सिंह, कृष्ण सिंह, कुरड़ाराम तथा अनेक पाली साथ होते थे जो दिन भर मौज मस्ती में जंगलों में गुजारते थे और गीत भजनों से न केवल मन बहलाते थे अपित पशुओं को चराने का काम भी करते थे। कभी किसी जाल के पेड़ के नीचे बैठते तो कभी जोहड़ के पानी में स्नान करते कड़ाके की सर्दी और भीषण गर्मी में बैठकर कविताएं करते या फिर बांसुरी बजाने, लाठी चलाने एवं पटा चलाने आदि का कार्य करते थे। उनकी सबसे बड़ी विशेषता थी कि साफा बांधते थे धोती कुर्ते में रहते थे और बहुत ताकत वाले इंसान थे। कनीना में पूर्व प्रधान चौधरी बलबीर सिंह, पूर्व प्रधान मास्टर दिलीप सिंह के यहां उनका बहुत आना जाना रहा जिसके चलते वे उन्हें अपने पास भाई की तरह रखते थे। उनका कुछ समय असलीमपुर,तिजारा में भी बीता। वे घी, दूध मक्खन खाने के बहुत शौकीन रहे हैं और घर में चाहे अनाज कम भी मिले परंतु घी, दूध मक्खन उनको खाने को पर्याप्त मिलता था। बुद्धि के धनी होने के कारण हर जगह नाम कमाते थे। आज भी उनको याद करने वाले कुछ बुजुर्ग है जबकि बहुत से उनके साथ के इंसानों की मौत हो चुकी है। जब उनकी मृत्यु हुई तत्पश्चात गाय और भैंसों ने भी खाना पीना छोड़ दिया था। उनकी पत्नी मिश्री देवी ने कुछ दिनों तक पशुओं को चराया बाद में धीरे-धीरे वो पशु भी बेचने पड़े थे। उनकी निमोनिया के कारण नारनौल अस्पताल में मौत हुई थी। अंतिम समय में वह बहुत दुखी हो चले थे क्योंकि उन्हें घर की याद सताती थी। वर्तमान में कनीना में कान्हा सिंह धर्मशाला है यहां पर अपने आवास पर रहते थे जो कनीना के नगरपालिका के प्रधान ने जबरदस्ती मकान को तहस नहस कर दिया था। परिणाम यह निकला उन्हें बेघर कर दिया गया था परंतु दर्द में अपने पशुओं को पास के एक ट्यूबवेल पर रखने लग गए और उनका एक ही कहना था कि जो हमें इस प्रकार सताता है वह बुरी मौत मरेगा।
फोटो कैप्शन:जयनारायण।
दिव्यांगों के लिए लगा विशाल कैंप
-इलेक्ट्रिक साइकिल के लिए रजिस्ट्रेशन
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कनीना की आवाज। कनीना पंचायत समिति कार्यालय में एलिमको और रेडक्रास सोसाइटी के द्वारा जनशक्ति विकास संगठन के सहयोग से बुजुर्गों और दिव्यांगों का विशाल कैंप लगाया गया। इस कैंप में 40 प्रतिशत से लेकर 80 प्रतिशत तक के दिव्यांग लोगों के लिए इलेक्ट्रिक साइकिल के लिए रजिस्ट्रेशन किए गए। जिसमें 25 दिव्यांग और 40 वरिष्ठ नागरिकों ने अपना रजिस्ट्रेशन करवाया। प्रधानमंत्री दिव्यांशा केंद्र संस्था के प्रमुख प्रोस्थेटिस्ट और आर्थोटिस्ट डा. प्रिया ने कहा कि भारत सरकार वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए सहायक उपकरण देकर उनके सहज गरिमा पुन: जीवन यापन करने के लिए समर्पित है। इसी कड़ी में जनशक्ति विकास संगठन के अध्यक्ष दीपक कुमार वशिष्ठ में बताया कि 65 लोगों का पंजीकरण किया गया। जिनको इलेक्ट्रिक साइकिल, व्हीलचेयर, कमर की बेल्ट, गोडिया,कान की मशीन, बैथ, वाकर आदि सामान दिए जाएंगे। दीपक कुमार वशिष्ठ ने कहा कि अगर कोई दिव्यांगजन और वरिष्ठ नागरिक इस कैंप में आने से वंचित रह गया हो तो कुछ समय बाद फिर से कैंप लगाया जाएगा और उसमें जाकर वह अपना पंजीकरण जरूर करवा लें। इस मौके पर आडियोलाजिस्ट सुशील,अकाउंटेंट संदीप वशिष्ठ, रेडक्रास सोसाइटी क्लर्क मनोज कौशिक, क्लर्क राजीव और अभय सिंह, जनशक्ति विकास संगठन के सदस्य सुरेश कुमार वशिष्ठ और अमित कुमार मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 02: दिव्यांगजनों को कृत्रिम उपकरण देने बाबत रजिस्ट्रेशन करते हुए
दादी की पुण्यतिथि पर गौशाला में दिया दान
-गौशाला पदाधिकारी ने किया परिवार का सम्मान
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कनीना की आवाज। कमलेश शर्मा पूर्व प्राचार्य ने अपनी दादी सोनी देवी की पुण्यतिथि पर कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला में आकर 11000 रुपए का दान दिया। इस मौके पर कनीना की श्री कृष्ण गौशाला के पदाधिकारी ने कमलेा शर्मा एवं उनके परिवार का अभिनंदन किया।
इस मौके पर प्रधान श्रीकृष्ण गौशाला भगत सिंह ने कहा कि गायों को अल्प दान देकर भी इंसान गायों की सेवा का भागीदार बन सकता है। जो इंसान गायों की प्रत्यक्ष रूप से सेवा नहीं कर सकता वह दान देकर परोक्ष रूप से गौसेवा कर सकता है।
उन्होंने कहा कि गायों को गोद लेने की परंपरा एक बेहतरीन प्रणाली शुरू की गई है जिसके तहत कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला के करीब 500 गाए गोद ली जा चुकी हैं जो परोक्ष रूप से गायों की सेवा करने का एक धर्म है। गायों की सेवा से पापों से मुक्ति मिलती है तथा इंसान गायों की सेवा करके अपनी गौ माता की सेवा का भागीदार होता है। गायों की सेवा हमेशा करते रहना चाहिए। पूर्वज भी गायों की सेवा करते आए हैं। देवी देवता और यहां तक की राजा महाराजा भी गायों की सेवा में तल्लीन रहते थे। उनकी एक नीति थी कि गायों की सेवा करके न केवल पापों से मुक्ति मिलती है अपितु उनके घी दूध के भोग लगाने से भी शरीर में तंदुरुस्ती और रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि कनीना में चल रही गौशाला में गौशाला प्रधान भगत सिंह यादव व उनकी टीम तथा क्षेत्र वासियों की कड़ी मेहनत के कारण श्रीकृष्ण गौशाला कनीना दिन दुगनी रात चौगुनी उन्नति कर रही है। जिसके कारण गौशाला में हजारों गायों की सेवा उनके द्वारा की जा रही है। इसी कड़ी में गौशाला प्रधान भगत सिंह यादव अपने सारे निजी कार्य को छोड़कर गौ सेवा में लगे हुए हैं तथा क्षेत्र के लोगों वह गौशाला में आने वाले को भक्तों को गायों की महिमा के बारे में बताते हैं और उनको गौ सेवा करने की प्रेरणा भी देते हैं। जिसके कारण
सैकड़ों गाये गोद लेने के लिए लोग घरों से चलकर आये हैं। न केवल कनीना अपितु आस पास के गांवों के लोग भी गौशाला में आकर गायों को गोद ले रहे हैं और दान दे रहे हैं। श्रीकृष्ण गौशाला कनीना के प्रधान भगत सिंह यादव ने बताया कि राज सिंह लंबे समय से गौशाला से जुड़े हुए हैं और समय-समय पर निरंतर सहयोग करते रहते हैं। उन्होंने बताया कि राज सिंह पहले भी चार गायों को गोद ले चुके हैं और गौसेवा को अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे प्रेरणादायी कदम दूसरों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करते हैं और गौसेवा के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाते हैं।
भगत सिंह ने कहा कि गायों की सेवा से सभी पाप मिट जाते हैं और पुण्य का भागी बन जाता है। इंसान को जरूर गायों की सेवा करनी चाहिए ताकि अपने जीवन में नाम कमा सके। उन्होंने कहा गायों की सेवा भगवान श्रीकृष्ण ने की थी इसलिए गोपाल कहलाए। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में गायों के प्रति फिर से वो लगाव उत्पन्न होने लगा है जो वर्षों पहले सिंर चढ़कर बोल रहा था। उन्होंने बताया कि कनीना श्रीकृष्ण गौशाला से करीब 500 गाए गोद ली जा चुकी है और भक्तों द्वारा दान दिया गया है। वहीं गौशाला में अमूल चूल परिवर्तन किये जा चुके हैं। आने वाले समय में श्रीकृष्ण गौशाला प्रदेश भर में नंबर वन होगी।
इस मौके पर कमलेश शर्मा प्राचार्य के साथ प्राचार्य रमेश शर्मा, नरेंद्र शर्मा, अंकित शर्मा, पिनाक शर्मा, अदिति, विशाल सहित समस्त परिवार गौशाला पहुंचा और दान दिया। इस मौके पर बलवान सिंह आर्य, मास्टर सुरेंद्र सोनी, राम प्रताप मास्टर, जोगेंद्र खत्री, दिलावर सिंह, रामपाल यादव आदि मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 04: गायों की सेवा करते हुए व दान देते हुए कमलेश प्राचार्य परिवार
नवोदय विद्यालय के विद्यार्थी शैक्षणिक भ्रमण के लिए बिट्स पिलानी पहुंचे
-प्राचार्य ने हरी झंडी दिखाकर बस को किया रवाना
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कनीना की आवाज। पीएम श्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय करीरा के कक्षा 6 से 9 के विद्यार्थियों का एक दल बिट्स पिलानी के लिए शैक्षणिक भ्रमण हेतु रवाना हुआ। शैक्षणिक भ्रमण की बस को प्राचार्य बीएम रावत ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
प्राचार्य ने बताया कि एकदिवसीय शैक्षणिक भ्रमण पर विद्यार्थी पिलानी क्षेत्र का ज्ञान अर्जित करेंगे जो पीएमश्री स्कूल की गतिविधियों का एक भाग है। विद्यार्थी शाम तक शैक्षणिक भ्रमण करके लौटेंंगे। इस मौके पर उनके साथ अभय सिंह लाइब्रेरियन, विनोद कुमार पीजीटी साइंस, रितिका टीजीटी अंग्रेजी, पूनम पीजीटी गणित एस्कार्ट के रूप में रवाना हुए। प्राचार्य ने बताया कि निकट भविष्य में विद्यार्थियों की शीतकालीन अवकाश होने जा रहे हैं उससे पहले यह भ्रमण करवाया गया है। उन्होंने बताया कि बिटस पिलानी भारत के सबसे पुराने और अग्रणी प्रौद्योगिकी संस्थानों में से एक है। पिलानी के अलावा बिट्स के कैम्पस गोआ, हैदराबाद और दुबई में भी हैं। यह संस्थान पूर्णत: स्ववित्तपोषित और आवासीय है।
फोटो कैप्शन 03: शैक्षणिक भ्रमण पर बस को रवाना करते प्राचार्य
31 विद्यार्थियों को वितरित किये ट्रैकशूट
-पूरे स्टाफ का रहा सहयोग
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कनीना की आवाज।
राजकीय माध्यमिक विद्यालय झीगावन में कक्षा 6 से 8 में अध्ययनरत सभी बच्चों को सर्दी के मौसम को ध्यान में रखते हुए तथा स्कूल यूनिफार्म में एकरुपता बनाए रखने के लिए विद्यालय के सभी स्टाफ सदस्यों के सहयोग से ट्रैकशूट वितरित किए गए।
इस मौके पर मौलिक मुख्याध्यापक हरिओम ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की और कहा कि सर्दी में बचाव बहुत जरूरी होता है। अगर ठंड लग जाये तो जुकाम के अलावा निमोनिया होने का खतरा होता है। ऐसे में शरीर को ठंड से बचाना बहुत जरूरी होता है। इसी बात को ध्यान में रखकर समस्त स्टाफ ने अपने निजी कोष से सहयोग दिया और 31 विद्यार्थियों को ट्रैकशूट प्रदान किये गये। इस मौके पर अध्यापक प्रदीप कुमार ,अध्यापिका पूनम बाई, मीना शर्मा, अनीता यादव व क्लर्क अभिनय खंडवाल उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 05: ट्रैकशूट वितरित करते मुख्याध्यापक



















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