Not sure how to add your code? Check our installation guidelines **KANINA KI AWAZ **कनीना की आवाज**

Thursday, December 11, 2025








 




 कनीना क्षेत्र में पड़ रही है कड़ाके की सर्दी
-जमता है पाला, दिन में खिलती है धूप
**************************************************
********************************************************
**************************************************
कनीना की आवाज।
कनीना और आसपास क्षेत्र में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। जहां तापमान बिंदु पर पहुंच चुका है। वही सुबह सवेरे फसलों, घास फूस पर पाला जमा देखा गया। विगत कुछ दिनों से पाला जमने की घटना देखने को मिल रही है। जहां किसान लहलहाती सरसों और गेहूं की फसल को देखकर खुश नजर आ रहे हैं वही उनको कभी-कभी चिंता सता रही है कि पाला कहीं नुकसान तो नहीं करेगा?
 किसान सूबे सिंह, देवेंद्र बलिया, अजीत कुमार, राजेंद्र सिंह, महेश कुमार, योगेश कुमार, कृष्ण कुमार आदि किसानों ने बताया कि विगत दिनों से सुबह सवेरे पाला जमा देखा जा सकता है। इस समय सरसों पर आब आई हुई है, गेहूं की फसल अभी छोटी है। कनीना क्षेत्र में 20 हजार हेक्टेयर पर सरसों तो करीब आठ हजार हेक्टेयर पर गेहूं की फसल खड़ी है। सरसों में फूल आ गए हैं। दूर दराज तक अब खेतों में सरसों खड़ी नजर आ रही है, कहीं-कहीं पीले फूल नजर आ रहे हैं। जहां फूलों को देखकर मधुमक्खी पालन करने वाले दूसरे प्रांतों से आने लग गये हैं। वहीं किसान चिंता में डूबने लगे हैं कि कहीं लगातार ठंड और पाला फसल को नुकसान न पहुंचा दे। कनीना और आसपास क्षेत्र में दिन के समय तेज धूप खिलती है वहीं सुबह और शाम कड़ाके की ठंड पड़ती है। लोग ऊनी कपड़ों में लिपटे नजर आते हैं। खेतों में किसान तो दुकानों के आगे दुकानदार आग सेकते नजर आते हैं।
उधर पूर्व विषय विशेषज्ञ डा. देवराज यादव से ठंड और पाले के विषय में जानकारी चाही। उन्होंने बताया कि दिन के समय धूप खिलती है किंतु इसका कोई कुप्रभाव फसलों पर नहीं पड़ेगा। उनका कहना है कि किसानों को चाहिए की हल्की सिंचाई कर दे ताकि पाले का कोई नुकसान न हो सके। उनका कहना है कि अभी इतना अधिक पाला नहीं जमता कि फसल को कोई नुकसान हो जाए। लगातार मौसम खराब रहने से ही फसल को नुकसान हो सकता है।
 फोटो कैप्शन 03: उपले एवं वनस्पति पर जमा पाला


किसान दे रहे गेहूं की फसल में पानी
- 23 दिन पर पानी देना उचित-कृषि वैज्ञानिक
**************************************************
********************************************************
**************************************************
कनीना की आवाज।
 कनीना क्षेत्र में जहां करीब 20,000 हेक्टेयर पर सरसों तो 8,000 से अधिक पर गेहूं की बीजाई की हुई है। इस समय दोनों फसल उगाई हुई है। जहां दो दिनों से ठंड बढऩे से गेहूं और सरसों की फसल के लिए मौसम अनुकूल हो गया है।  किसान इस समय गेहूं में पानी दे रहे हैं, इसके साथ-साथ खाद का छिड़काव भी करना पड़ता है।
 किसान धर्मपाल, सूबे सिंह, अजीत कुमार, राजेंद्र सिंह, देवेंद्र बलिया आदि किसानों ने बताया कि जब फसल बड़ी हो जाती है तो उस समय उसमें पानी देना जरूरी हो जाता है। यदि पानी न दिया जाए तो फसल को नुकसान होने का अंदेशा बन जाता है। इस संबंध में कृषि वैज्ञानिक से बात हुई-
पूर्व एडीओ डा. देवेंद्र यादव ने बताया कि गेहूं में 23 दिन बाद देना उचित होता है। इस वक्त शिखर जड़े पैदा होने लग जाती है और जिनके लिए खाद और पानी की जरूरत होती है। 23 दिन पर  पानी लगाया जाता है। बाकी गेहूं की फसल में छह बार पानी देना जरूरी होता है। जहां शुरुआत में सिंचाई करके गेहूं उगाया जाता है जो पहला पानी होता है। तत्पश्चात 20-20 दिनों पर पानी दिया जाता है। पानी देने के बाद के साथ ही खाद देना पड़ता है। इसके सात दिनों बाद निराई की भी जरूरत पड़ती है। ऐसे में खरपतवार निकालना बहुत जरूरी होता ताकि पैदावार अच्छी हो सके। ऐसे में खरपतवारनाशी का छिड़काव करना चाहिए।।
 फोटो कैप्शन 09: गेहूं की फसल में पानी देता किसान








जवाहर नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा में बैठेंगे 2577 विद्यार्थी, कुल 10 परीक्षा केंद्र
-कनीना ,अटेली, महेंद्रगढ़, नारनौल और नांगल चौधरी में हैं दो-दो केंद्र
**************************************************
********************************************************
**************************************************
कनीना की आवाज।
पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय करीरा की कक्षा-6 में प्रवेश पाने हेतु 13 दिसंबर को आयोजित जवाहर नवोदय प्रवेश परीक्षा/जेएनवीएसटी-2026 परीक्षा जिला महेंद्रगढ़ के 10 केंद्रों पर आयोजित होगी। विस्तृत जानकारी देते हुए प्राचार्य बीएम रावत पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय करीरा ने बताया कि अटेली के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अटेली मंडी में 240, राजकीय माडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अटेली मंडी में 230, कनीना के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में 288, राजकीय माडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना में 285, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय महेंद्रगढ़ में 264, राजकीय माडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय महेंद्रगढ़ में 241, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नारनौल में 192, राजकीय माडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नारनौल में 238, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नांगल चौधरी में 312, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (बाल) नांगल चौधरी में 287 विद्यार्थी प्रवेश परीक्षा देंगे।
फोटो कैप्शन: प्राचार्य नवोदय बीएम रावत


लिली ने 2.51 लाख रुपए दिए श्रीकृष्ण गौशा को दान
-50 गाये ली गई गोद
**************************************************
********************************************************
**************************************************
कनीना की आवाज।
 कनीना  की श्रीकृष्ण गौशाला में नीलम उर्फ लिली, महालक्ष्मी ट्रेडिंग कंपनी की मालकिन ने अपने पोते दुष्यंत के जन्मदिन पर 2.51 लाख रुपए दान दिये और 50 गाये गोद ली। उधर बजरंग लाल ठेकेदार कनीना मंडी ने गौशाला के कर्मचारियों को 23 जोड़ी जूते दान दिए।
 इस मौके पर प्रधान भगत सिंह व अन्य गौशाला पदाधिकारी ने लिली उर्फ नीलम को फूलमालाएं पहनाकर सम्मान दिया।
 इस मौके पर भगत सिंह ने बताया कि आज तक 450 गाये गोद गोली जा चुकी हैं। गायों के लिए विशेष प्रबंध किया गया है। आने वाले 6 माह बाद गौशाला हरियाणा की नंबर एक गौशाला होगी। गायों के लिए विभिन्न प्रबंध करने का कार्य अभी जारी है।
 उल्लेखनीय है कि कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला में जब से भगत सिंह ने कार्यभार संभाला है तभी से गौशाला में नित नए आया स्थापित किये जा रहे हैं। श्रीकृष्ण गौशाला आज देखने लायक बन गई है। आए दिन सैकड़ो भक्त श्रीकृष्ण गौशाला में आते हैं जिसके पीछे एकमात्र भगत सिंह का हाथ माना जा रहा है।
 भगत सिंह ने कहा कि गायों की सेवा ही सच्ची सेवा है। जो गायों की सेवा करता है उसके लिए निश्चित रूप से एक दिन स्वर्ग के द्वारा खुल जाते हैं। भगवान श्री कृष्णा भी गायों की सेवा करके गोपाल कहलाए थे। हर इंसान का फर्ज बनता है कि वह गायों की सेवा करें।
इस मौके पर श्रीकृष्ण गौशाला में रामपाल यादव, दिलावर सिंह बाबूजी, मास्टर रामप्रताप, मुकेश नंबरदार, महेंद्र साहब, पृथ्वी सिंह, अशोक ठेकेदार, रविंद्र बंसल, डा. विनोद, नित्यानंद तोताराम ठेकेदार, विष्णु ठेकेदार आदि उपस्थित रहे।
 फोटो कैप्शन 02: नीलम उर्फ लिली गाय गोद लेते हुए



असुरक्षित है कनीना की पेयजल सप्लाई, बड़ा हादसा होने से इंकार नहीं
-झाड़ झंखाड़ से आच्छादित है वाटर सप्लाई केंद्र
**************************************************
********************************************************
**************************************************
कनीना की आवाज।
 45 वर्षों पहले  निर्मित कनीना की पेयजल सप्लाई असुरक्षित बन गई है। 21 दिसंबर 1975 को कनीना की पेयजल सप्लाई तत्कालीन कर्नल महा सिंह, कृषि मंत्री हरियाणा सरकार द्वारा उद्घाटन किया था किंतु यहां पर बनी हुई ऊंची टंकी जो शायद एक दिन भी काम नहीं आई, गिरने के कगार पर है। चारदिवारी कहीं टूटी पड़ी है तो कहीं बहुत छोटी है। पूरे ही वाटर सप्लाई केंद्र पर झाड़-झंखाड़ खड़े हैं। जहां नहरी पेयजल को साफ करने के लिए बनाया गया टैंक झाड़ झंखाड़ से आच्छादित है और यह कुछ दिन भी नहीं चल पाया था। इसके लीक हो जाने से यह बंद कर दिया गया है। अनेकों सरीसृप और जीव जंतु यहां घूमते देखे गए हैं।
लीक कर रहा है वाटर स्टोर-
पेयजल सप्लाई का वाटर स्टोर टैंक जो 1975 से आज तक न तो साफ किया गया है और न ही सुरक्षित है। अब तो यह जगह जगह से लीक कर रहा है। ऊंचाई भी कम है तथा सफाई भी नहीं हो पाई है। ऐसे में पेयजल कहीं संदूषित जल न बन जाये। वहीं जल स्टोरेज टैंक नीचे होने की वजह से कोई भी जीव जंतु आसानी से पेयजल में घुस सकता है। यह  टैंक भी कई जगह से लीक कर रहा है। अगर कनीना की पेयजल सप्लाई को देखा जाए तो नहीं तो चारदीवारी है और नहीं कोई सुरक्षा है। कनीना के लिए जहां प्रमुख पेयजल सप्लाई की यह हालत है कि कोई भी जानवर आसानी से घुस सकता है। पेयजल केंद्र पर सूखे टूटे हुए पेड़ यहां वहां पड़े हैं। यही कारण है कि यहां पर जल असुरक्षित ढंग से सप्लाई हो रहा है। यदि कनीना की पेयजल सप्लाई केंद्र को देखा जाए तो ऐसा लगता है जैसे कोई जंगल हो,  झाड़ झंखाड़ों से परिपूर्ण पेयजल सप्लाई है। यदि इसके सुध ली जाए तो उचित होगा वरना भविष्य में किसी भी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि पेयजल सप्लाई में कोई भी सरीसृप आसानी से घुस सकते हैं।
 टूटी हुई चारदीवारी-
वाटर सप्लाई की चारदीवारी टूटी होने से आवारा जानवर आसानी से प्रवेश कर सकता है। भारी पैसे लगाने के बाद भी हालत बदतर है, इसकी सुध लेने की मांग की है। वाटर सप्लाई का द्वार भी सुरक्षित नहीं है। कहीं पेड़ पौधे टूटे पड़े हैं तो कहीं नहर पर आधारित पेयजल योजना जर्जर हो चुकी है।
ऊंची टंकी एवं नहर पर आधारित पेयजल के हौद बेकार-
आश्चर्यजनक यह है कि न तो ऊंची पेयजल टंकी कभी काम आई और न ही नहर पर आधारित परियोजना काम आई। अभी तो यहां तो पुराने समय के ही स्टोर टैंक काम आ रहे हैं।
पानी साफ करने के पदार्थों का अभाव-
मिली जानकारी अनुसार नहर पर आधारित पेयजल एवं बोर के जल को मिलाकर कस्बा में सप्लाई किया जा रहा है। नहर पर आधारित पेयजल केंद्र बड़ी बणी नजदीक डीएवी के पास है। जहां क्लोरीन गैस से पेयजल को साफ किया जाता हे। न तो फिटकरी, न ब्लीचिंग पाउडर और न पीएसीएल है। इस पेयजल केंद्र की सफाई किये लंबा अर्सा हो चुका है। यहां से साफ किया जल रेवाड़ी रोड़ स्थित मुख्य जल केंद्र पर आता हे। मुख्य जल केंद्र पर सफेदी तक नहीं की गई है जिससे भवन जर्जर हो जाता है। मोटर रखने का स्थल जर्जर हो चला है।
  बेकार पड़े हैं हौद-
वाटर सप्लाई में नहर पर आधारित चार हौद वर्ष 2005-06 में निर्मित किये थे। ये अब बेकार पड़े हैं और इनमें सैकड़ों पेड़ पौधे खड़े हुए हैं। कम से कम इनको साफ करवा कर पनपने वाले जीव जंतुओं एवं सरीसृपों से बचा जा सकता है।
द्वार पर कबाड़ एवं ऊपले-
यदि पेयजल केंद्र पर जाया जाए तो द्वार पर उपले ,कृषि के यंत्र, ईंधन एवं कूड़ा डालकर बदसूरत बनाया हुआ है। कनीना के हरेंद्र शर्मा, अनूप कुमार, दीपक कुमार,नरेश कुमार, भागमल आदि ने पेयजल केद्र की हालात पर रोष जताते हुए अविलंब इसकी सुध लेने की मांग की है वरना वे आदोलन पर उतरने को  मजबूर हो जाएंगे।
प्रमुख मांगे-
 कस्बावासियों ने वर्षों से चले आ रहे भूमिगत टैंक को साफ करवाने, इसकी ऊंचाई बढ़ाने की मांग की है ताकि इसमें कोई आवारा जीव जंतु नहीं घुस सके। वही चारदीवारी ऊंचा उठाने ,साफ सफाई करने ,ऊंची टंकी को दुरुस्त करवाने या से हटवाने की मांग की गई है। यहां पर 1975 में बनी पुरानी खराब ऊंची टंकी को हटवाने , पेयजल साफ करने हेतु 2005 में बने हौद चार हौद हटवाने, पेयजल केंद्र के द्वार एवं अंदर से साफ सुथरा बनाने की मांग की है। वरना वो दिन दूर नहीं जब कोई बड़ा हादसा हो जाएगा।
  क्या कहते हैं कनिष्ठ अभियंता-
कनिष्ठ अभियंता पवन कुमार से इस संबंध में बात हुई। उन्होंने बताया कि मुख्य द्वार पर डाले गये ईंधन, ऊपले आदि को हटवा दिया जाएगा वरना डालने वालों को नोटिस दिया जाएगा। ऊंची टंकी के बारे में हेड क्वार्टर जाकर बात की जाएगी, अंदर से साफ सफाई करवा दी जाएगी, ब्लीचिंग पाउडर आदि नारनौल से एक दो रोज में आ जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस पेयजल केंद्र को अपग्रेड किया जाना है किंतु नगरपालिका दस एकड़ जगह उपलब्ध नहीं करवा पा रही है वरना अपग्रेड के टेंडर लगवाकर अधिकतम 6 माह में इसे अपग्रेड करवा दिया जाएगा। अन्य समस्याएं भी हल करने का आश्वासन दिया।
फोटो कैप्शन 04: पुराने खुले हौद में खड़े झाड़ झंखाड़,
05: जर्जर पुरानी टंकी जिसका गिरने का खतरा
06:पेयजल टैंक लीक करते हुए
07:मुख्यद्वार पर डाला ईंधन एवं कबाड़
08:टूटी हुई दीवार एवं पड़े सूखे पेड़ एवं झाड़ झंखाड़




ग्रामीण क्षेत्रों से लुप्त हो रही है गुड़ की भेली और हवेली












-पर्वों पर काम आती थी भेली
**************************************************
********************************************************
**************************************************
कनीना की आवाज। एक जमाने में विवाह शादी विभिन्न उत्सव और विशेषकर नए वर्ष पर गुड़ की भेली देने का रिवाज था किंतु अब दुकानों से भेलियां गायब है। वैसे तो बुजुर्ग कहते हैं गुड़ की भेली और गांव की अभेली दोनों ही ग्रामीण क्षेत्रों से गायब होती जा रही हैं।
 वास्तव में से गुड़ से बना हुआ चक्का भेली कहलाता था और यह सेर में मापी जाती थी। आजकल जहां तोल के लिए किलोग्राम प्रयोग किया जाता है किसी जमाने में सेर और छटांक प्रयोग करते थे। 16 छटांक का एक सेर बनता था और एक सेर में करीब 900 ग्राम वजन होता था। आज भी पुराने घरों में सेर का बट्टा देखने को मिल सकता है। अब सेर का स्थान किलोग्राम ने ले लिया किंतु अढ़ाई सेर या पांच सेर की गुड़ की भेली दुकानों पर मिलती थी। जहां विवाह शादियों में लड़का आदि होने पर गुड़ की भेली दी जाती थी वहीं 1 जनवरी से 14 जनवरी तक तो गुड़ की भेलियों की इस कदर मांग होती थी की दुकानों पर गुड़ ही गुड़ नजर आता था।
बुजुर्गों का कहना है कि जहां प्रसाद के रूप में शक्कर तत्पश्चात बताशे उसके बाद बूंदी प्रयोग में लाई जाती हैं। इसी प्रकार पुराने वक्त में गुड़ ही सबसे बड़ी मिठाई होती थी। खुशी के अवसर पर गुड़ का लेनदेन होता था और गुड़ की 2.5 या 5 सेर खुशी खुशी में दिया जाता था जो धीरे धीरे बंद हो गई।
और अब तो गुड़ की भेली दिखाई नहीं पड़ती। बुजुर्ग बताते हैं कि पहले किसी भी उत्सव पर चूरमा, खीर, दाल आदि बनाई जाती थी और वहीं परंपरा आज भी चली आ रही है। 14 जनवरी मकर संक्रांति के दिन जा दाल व चूरमा आज भी चाव से खाया जाता है।
नए साल पर प्रथम जनवरी से कभी गुड़ लेकर के माता-पिता अपनी विवाहित पुत्री के ससुराल  या भाई अपनी विवाहित बहन के लिए गुड़ की भेली देकर आता था और साथ में घी भी देकर आता था ताकि मकर संक्रांति पर चूरमा और दाल बनाई जा सके। इसे त्योहारी नाम से जाना जाता था। अब ना तो त्योहारी बची है और ना गुड़ की भेली का लेनदेन होता है।
आज गुड़ की भेली गायब हैं। दुकानदारों कृष्ण कुमार, योगेश कुमार, रोहित कुमार आदि  ने बताया कभी मकर संक्रांति पर गुड़ की भेली की मांग होती थी लेकिन अब गुड़ की भेली के खरीददार नहीं रहे। इसलिए प्रचलन घट गया है।
  ग्रामीण क्षेत्रों में हवेली पर विशेष ध्यान दिया जाता था। कनीना में तो आज भी एक परिवार हवेलीवाला नाम से जाना जाता है किंतु अब हवेली को भूलाने लग गये हैं। अब तो झोपड़ी की ओर दौडऩे लग गये हैं। पुरानी चीजे याद ही नहीं आ रही अपितु फिर से प्रचलन में आ रही हैं। देखते हैं कि हवेली और भेली की कब फिर से कद्र बढ़ेगी।

 

 


एक सौ गाये ली गोद



-दिया 5.11 लाख रुपये का का दान
**************************************************
********************************************************
**************************************************
कनीना की आवाज। कनीना की श्रीकृष्ण गौशाला में हरीश कनीनवाल पुत्र अतरलाल गुगनवाला ने श्रीकृष्ण गौशाला में आकर एक सौ गाये गोद ली  और 5 लाख 11 हजार रुपए गौशाला का दान दिया।
 उधर उधर ओम प्रकाश पुत्र दुलीचंद ने अपनी 50वीं शादी की सालगिरह पर एक पानी की खेल जिसकी राशि 21 हजार बनती है गौशाला को दान दिये। इस मौके पर प्रधान श्री कृष्ण गौशाला भगत सिंह ने सभी का स्वागत एवं सम्मान किया।
  इस मौके पर प्रधान गौशाला भगत सिंह ने कहा कि  गौमाता और कृष्ण भगवान से प्रार्थना करते हैं कि इनका परिवार फले फूले और इसी प्रकार उन्नति करता रहे ताकि वह गौ माताओं की इसी प्रकार सेवा करते रहे।
उल्लेखनीय है कि कनीना में चल रही गौशाला में गौशाला प्रधान भगत सिंह यादव व उनकी टीम तथा क्षेत्र वासियों की कड़ी मेहनत के कारण श्रीकृष्ण गौशाला कनीना दिन दुगनी रात चौगुनी उन्नति कर रही है। जिसके कारण गौशाला में हजारों गायों की सेवा उनके द्वारा की जा रही है। इसी कड़ी में गौशाला प्रधान भगत सिंह यादव अपने सारे निजी कार्य को छोड़कर गौ सेवा में लगे हुए हैं तथा क्षेत्र के लोगों वह गौशाला में आने वाले को भक्तों को गायों की महिमा के बारे में बताते हैं और उनको गौ सेवा करने की प्रेरणा भी देते हैं। जिसके कारण
सैकड़ों गाये गोद लेने के लिए लोग घरों से चलकर आये हैं। न केवल कनीना अपितु आस पास के गांवों के लोग भी गौशाला में आकर गायों को गोद ले रहे हैं और दान दे रहे हैं। श्रीकृष्ण गौशाला कनीना के प्रधान भगत सिंह यादव ने बताया कि राज सिंह लंबे समय से गौशाला से जुड़े हुए हैं और समय-समय पर निरंतर सहयोग करते रहते हैं। उन्होंने बताया कि राज सिंह पहले भी चार गायों को गोद ले चुके हैं और गौसेवा को अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे प्रेरणादायी कदम दूसरों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करते हैं और गौसेवा के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाते हैं।
 इस मौके पर इस मौके पर होशियार सिंह, सूबेदार महेंद्र साहब, रविंद्र बंसल, संजीव ठेकेदार, कमल गुगनवाला, रामपाल यादव, मुकेश नंबरदार, सतबीर गुगनवाला, दिलावर बाबूजी, अशोक ठेकेदार, रोहित सेठ आदि मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 10: एक सौ गाये गोद लेते हुए हरीश कनीनवाल.                                  

     सीएम फ्लाइंग ने पब्लिक हेल्थ कनीना के कार्यालय में  मारा छापा                            मिली कई अनियमितताएं    
†***†*****""""*""""""*****"*"****"*""                 कनीना l फ्लाइंग टीम ने पब्लिक हेल्थ विभाग के कनीना एसडीओ कार्यालय और कई बूस्टिंग स्टेशनों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान कार्यालय के 10 दस्तावेजों में कई अनियमितताएं पाई गईं, जिनकी जांच की।
निरीक्षक सत्येंद्र के नेतृत्व में सीएम फ्लाइंग रेवाड़ी की टीम ने गुप्त सूचनाओं के आधार पर यह कार्रवाई की। टीम ने एसडीओ कार्यालय के अलावा डब्ल्यूटीपी गोशाला रोड कनीना, रेवाड़ी रोड बूस्टिंग स्टेशन, झीगावन बूस्टिंग स्टेशन और भड़फ बूस्टिंग स्टेशन का भी मौके पर जाकर निरीक्षण किया।
पब्लिक हेल्थ विभाग का कनीना एसडीओ कार्यालय।
कई कर्मचारी गैरहाजिर मिले
निरीक्षण के दौरान ज्यादातर कर्मचारी गैरहाजिर पाए गए। बूस्टिंग स्टेशनों पर साफ-सफाई की हालत खराब थी और कई जगह लीकेज से गंदे पानी की आपूर्ति हो रही थी। एसडीओ कार्यालय के 10 दस्तावेजों की जांच में भी कई अनियमितताएं सामने आईं।
रेड के समय पब्लिक हेल्थ महेंद्रगढ़ के एसडीओ प्रेम कुमार बतौर ड्यूटी मजिस्ट्रेट मौजूद थे। टीम को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि गांवों के बूस्टिंग स्टेशनों पर कर्मचारी गैरहाजिर रहते हैं, सफाई व्यवस्था खराब है और ड्यूटी पर तैनात लोग अक्सर गैरहाजिर रहते हैं, जिससे एसडीओ कार्यालय की मिलीभगत का संदेह था।
महेंद्रगढ़ में सीएम फ्लाइंग टीम ने पब्लिक हेल्थ विभाग के कनीना एसडीओ कार्यालय और कई बूस्टिंग स्टेशनों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान कार्यालय के 10 दस्तावेजों में कई अनियमितताएं पाई गईं, जिनकी जांच की।
निरीक्षक सत्येंद्र के नेतृत्व में सीएम फ्लाइंग रेवाड़ी की टीम ने गुप्त सूचनाओं के आधार पर यह कार्रवाई की। टीम ने एसडीओ कार्यालय के अलावा डब्ल्यूटीपी गोशाला रोड कनीना, रेवाड़ी रोड बूस्टिंग स्टेशन, झीगावन बूस्टिंग स्टेशन और भड़फ बूस्टिंग स्टेशन का भी मौके पर जाकर निरीक्षण किया।
पब्लिक हेल्थ विभाग का कनीना एसडीओ कार्यालय।
कई कर्मचारी गैरहाजिर मिले
निरीक्षण के दौरान ज्यादातर कर्मचारी गैरहाजिर पाए गए। बूस्टिंग स्टेशनों पर साफ-सफाई की हालत खराब थी और कई जगह लीकेज से गंदे पानी की आपूर्ति हो रही थी। एसडीओ कार्यालय के 10 दस्तावेजों की जांच में भी कई अनियमितताएं सामने आईं।
रेड के समय पब्लिक हेल्थ महेंद्रगढ़ के एसडीओ प्रेम कुमार बतौर ड्यूटी मजिस्ट्रेट मौजूद थे। टीम को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि गांवों के बूस्टिंग स्टेशनों पर कर्मचारी गैरहाजिर रहते हैं, सफाई व्यवस्था खराब है और ड्यूटी पर तैनात लोग अक्सर गैरहाजिर रहते हैं, जिससे एसडीओ कार्यालय की मिलीभगत का संदेह था।      



 13 दिसंबर को होगा जवाहर नवोदय विद्यालय जेएनवीएसटी 2026 की परीक्षा
†********""""""***********"""""""""***""""****""

कनीना— जवाहर नवोदय विद्यालय करीरा द्वारा नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा 2026 का आयोजन आगामी 13 दिसंबर को जिले के पांचों विकास खंडों के दो-दो परीक्षा केंद्रों सहित कुल 10 परीक्षा केंद्रों पर किया जाएगा। इसी संदर्भ में आज जिला शिक्षा अधिकारी सुनील दत्त तथा नवोदय विद्यालय करीरा के प्राचार्य बृजमोहन लाल रावत की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, नारनौल में आयोजित की गई।
बैठक में सभी खंड शिक्षा अधिकारी, नवोदय विद्यालय का स्टाफ तथा दसों परीक्षा केंद्रों के प्राचार्य एवं अधीक्षक (परीक्षा केंद्र अध्यक्ष) उपस्थित रहे। इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में नव पदोन्नत जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. विश्वेश्वर कौशिक, खंड शिक्षा अधिकारी दिलबाग सिंह, पवन कुमार भारद्वाज, अलका यादव, सुनीता यादव, तथा नवोदय विद्यालय के अंग्रेजी प्रवक्ता सुंदरलाल, कविता यादव, प्राचार्य नरेश कुमार कौशिक, सुनील खुडानिया, प्रमिला यादव, सुनील गोरा और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के सुरेंद्र शर्मा भी उपस्थित रहे।
सभी ने नव पदोन्नत जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. विश्वेश्वर कौशिक को शुभकामनाएँ दीं।
जिला शिक्षा अधिकारी सुनील दत्त ने बताया कि परीक्षा संबंधी सभी तैयारियाँ पूर्ण कर ली गई हैं तथा बच्चों के लिए भय-मुक्त एवं सुव्यवस्थित परीक्षा वातावरण सुनिश्चित करने के व्यापक प्रबंध किए गए हैं।
नवोदय विद्यालय के प्राचार्य बृजमोहन लाल रावत ने जानकारी दी कि 80 विद्यार्थियों के प्रवेश हेतु होने वाली इस परीक्षा में सभी परीक्षा केंद्र अध्यक्षों को स्टेशनरी सामग्री एवं दिशा-निर्देश किट उपलब्ध करवा दी गई है। परीक्षा का समय प्रातः 11:30 बजे से दोपहर बाद तक निर्धारित किया गया है।
प्रश्न पत्रों का वितरण स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, कनीना शाखा से परीक्षा दिवस की सुबह 8:00 बजे किया जाएगा। प्रश्न पत्रों की सुरक्षा एवं गोपनीयता के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं।
प्रशासन ने अभिभावकों व विद्यार्थियों से अपील की है कि वे निर्धारित समय पर परीक्षा केंद्रों पर पहुँचकर परीक्षा प्रक्रिया को सुचारू एवं सफल बनाने में सहयोग करें।


No comments: