पत्रकार अनिल शर्मा के चचेरे भाई अधिवक्ता विशाल भारद्वाज का निधन
--अंतिम संस्कार में शामिल हुए अनेक जन
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कनीना की आवाज। वरिष्ठ पत्रकार अनिल शर्मा के चचेरे भाई एवं कनीना बार एसोसिएशन से जुड़े अधिवक्ता विशाल भारद्वाज उर्फ मुकेश (57) का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे बीमारी से पीडि़त थे और उपचार के दौरान बठिंडा स्थित एम्स में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से कनीना क्षेत्र सहित अधिवक्ताओं, पत्रकारों और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
वरिष्ठ पत्रकार अनिल शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि अधिवक्ता विशाल भारद्वाज लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और उनका इलाज चल रहा था। वे अपने पीछे पत्नी भावना, पुत्री कन्नू सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। अधिवक्ता विशाल भारद्वाज अपने सरल स्वभाव, मिलनसार व्यक्तित्व और पेशे के प्रति निष्ठा के लिए जाने जाते थे।
उनके अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में अधिवक्ता, समाजसेवी, पत्रकार और क्षेत्र के गणमान्य लोग शामिल हुए।
कनीना मुख्यालय को जोडऩे वाले सभी सड़क मार्ग 5 किलोमीटर दूरी तक हो फोरलेन
-मांग भेजी मंत्रियों तक
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कनीना की आवाज। कनीना के बस स्टैंड पर युद्ध की समस्या बनी रहती है जिसके चलते दुकानदारों एंबुलेंस आमजन को भारी दिक्कत हो रही है और कोई ना कोई हादसा होते रहता है बीते वर्षों में कई लोगों की जान भी जा चुकी है कनीना अटेली कनीना महेंद्रगढ़ कनीना कोसली कनीना रेवाड़ी कनीना चरखी दादरी रोड सभी मार्गों को 5-5 किलोमीटर दूरी तक का लेन बनाने और साइड से दोनों तरफ पानी निकासी के लिए नालों का प्रबंध करने की मांग की है शेर और कस्बा में इस प्रकार की सुविधा का प्रावधान है कनीना के अनेक लोगों ने मांगती है तथा मुख्यमंत्री सहित अनेक मंत्रियों को पत्र प्रेषित किया है तथा विलंब मांग की है की समस्या से निजात दिलाया जाए ताकि जाम की समस्या नहीं बन सके।
कनीना मंडी में मनाया गया वीर बाल दिवस
-नरेश कौशिक रहे वक्ता
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कनीना की आवाज। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीना मंडी में आज वीर बाल दिवस का आयोजन श्रद्धा एवं उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विद्यालय के प्राचार्य नरेश कुमार कौशिक रहे।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वीर बाल दिवस गुरु गोविंद सिंह जी के सुपुत्रों द्वारा दिखाया गया वह अलौकिक बलिदान है, जिसने मुगल सत्ता को चुनौती दी और सनातन धर्म की अडिग शक्ति को विश्व के सामने उजागर किया।
प्राचार्य ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी के चारों साहिबज़ादों का जीवन साहस, त्याग और धर्मरक्षा की अनुपम मिसाल है।
साहिबज़ादा अजीत सिंह और साहिबज़ादा जुझार सिंह ने चामकौर के युद्ध में वीरगति प्राप्त कर धर्म की रक्षा की। साहिबजादा जोरावर सिंह और साहिबजादा फतेह सिंह ने अत्याचारों के सामने झुकने से इनकार किया और अपनी आस्था पर अटल रहते हुए शहादत दी।
इस अवसर पर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए भाषण प्रतियोगिता, पेंटिंग प्रतियोगिता एवं निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें छात्राओं ने वीर साहिबजादों के शौर्य, बलिदान और प्रेरक जीवन मूल्यों को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया। प्राचार्य ने पेंटिंग भाषण में निबंध लेखन प्रतियोगिता में विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम में प्रवक्ता प्रवीण कुमार, हेमंत शर्मा, सुमन देवी, पन्नालाल, ओमप्रकाश, रेखा यादव, अनीता यादव, स्नेह लता शर्मा, समता देवी, रिंकी यादव, शकुंतला यादव, वीरमति सहित समस्त स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे। विद्यालय परिवार ने वीर बाल दिवस के संदेश—साहस, सत्य और धर्मरक्षा—को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
फोटो कैप्शन 03: प्रतियोगिता में अव्वल रहे विद्यार्थियों को पुरस्कृत करते हुए
बुनियाद लेवल-1 परीक्षा का सफल आयोजन
-- 401 विद्यार्थियों ने दी परीक्षा
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कनीना की आवाज। राजकीय माडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कनीना में बुनियाद कार्यक्रम के अंतर्गत लेवल-1 परीक्षा का सफल आयोजन किया गया। परीक्षा के सफल संचालन के लिए विद्यालय के प्रवक्ता सुरेंद्र मोरवाल और नितिन मुदगिल को विद्यालय स्तर पर कोआर्डिनेटर बनाया गया था जिनके दिशा निर्देश में यह परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
इस परीक्षा में कुल 516 विद्यार्थियों को एलाट किया गया था, जिनमें से 401 विद्यार्थियों ने परीक्षा में सहभागिता की। परीक्षा में कनीना खंड के विभिन्न राजकीय विद्यालयों से आए हुए विद्यार्थियों ने भाग लिया।
यह परीक्षा विद्यार्थियों की गणितएवं तर्कशक्ति आधारित शैक्षणिक क्षमता का आकलन करने के उद्देश्य से आयोजित की गई, ताकि प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे की उच्च स्तरीय शैक्षणिक तैयारी के लिए चयनित किया जा सके।
परीक्षा में सफल घोषित होने वाले विद्यार्थियों को बुनियाद लेवल-2 परीक्षा में सम्मिलित होने का अवसर मिलेगा। लेवल-2 परीक्षा के पश्चात तैयार की जाने वाली अंतिम मेरिट सूची में चयनित विद्यार्थियों के लिए राजकीय माडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कनीना में ही नवमी एवं दसवीं कक्षा के लिए फाउंडेशन कक्षाओं का संचालन किया जाएगा।
इन फाउंडेशन कक्षाओं में विद्यार्थियों को विकल्प फाउंडेशन के अनुभवी शिक्षकों द्वारा आनलाइन माध्यम से अध्यापन कराया जाएगा। इस कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को आईआईटी एवं नीट जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रारंभिक एवं सुदृढ़ तैयारी करवाई जाएगी, जिससे वे भविष्य में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें।
विद्यालय के प्राचार्य सुनील खुडानिया ने परीक्षा में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों की सराहना करते हुए कहा कि बुनियाद कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्र के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करता है। उन्होंने लेवल-1 परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों को अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए आशा व्यक्त की कि चयनित विद्यार्थी इस अवसर का पूर्ण लाभ उठाकर अपने उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर होंगे।
विद्यालय प्रशासन द्वारा परीक्षा के आयोजन हेतु सुव्यवस्थित परीक्षा केंद्र, अनुशासन एवं पारदर्शिता का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे परीक्षा शांतिपूर्ण एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
फोटो कैप्शन 04: परीक्षा देते विद्यार्थी
एसडी विद्यालय ककराला में कैरियर काउंसलिंग सत्र आयोजित
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कनीना की आवाज। एसडी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ककराला में विद्यार्थियों के भविष्य की दिशा निर्धारित करने के लिए कैरियर काउंसलिंग सत्र का आयोजन किया गया। इस स्तर में कक्षा दसवीं के छात्र/छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। जिसमें मुख्य वक्ता डा. रितु नारंग दिल्ली ने छात्रों को विभिन्न कैरियर अवसरों पर मागदर्शन किया। इस स्तर का उद्देश्य छात्रों को उनके रुचियों को पहचाने में मद्द करना तथा कैरियर पथ में सहायता प्रदान करना है। इस स्तर के दौरान छात्रों ने खुलकर प्रश्न पूछें और मुख्यवक्ता ने मार्गदर्शन किया।
इस अवसर पर विद्यालय चेयरमैन जगदेव यादव ने भी विद्यार्थियों को समय रहते अपने लक्ष्यों को पहचान ने और उनके प्रति मेहनत से आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया। यह क्रार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक सिद्ध हुआ।
फोटो कैप्शन 01: विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए।
साहिबजादों को उनके बलिदान दिवस पर किया नमन
--अगिहार में मनाया बाल शहीदी दिवस
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कनीना की आवाज। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अगिहार में शुक्रवार को वीर बाल दिवस का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों, फतेह सिंह और जोरावर सिंह को उनके बलिदान दिवस पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की प्राचार्या पूनम यादव ने की।
विद्यालय में अंग्रेजी के प्रवक्ता मदन मोहन कौशिक ने विद्यार्थियों को गुरु गोविंद सिंह जी के जीवन तथा उनके चारों साहबजादों के बलिदान के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे इन निडर और पराक्रमी बच्चों के जीवन से प्रेरणा ग्रहण करें। इस अवसर पर विद्यालय में वीर बाल दिवस पर नाटक का आयोजन भी किया गया जिसमें मुख्य रूप से ममता, प्रवेश, साइना,कल्पना, मुस्कान,प्रीति तथा मीनाक्षी ने भाग लिया। इसी कार्यक्रम में साइना, नव्या,शारदा,कल्पना, मानवी,प्रिंस तथा पूर्व ने गुरु गोविंद सिंह के साहबजादों के जीवन पर कविताओं का वाचन किया।
कार्यक्रम में विद्यालय के प्रवक्ता राजेंद्र कटारिया, निशा जांगड़ा, पूनम कुमारी, शशि कुमारी,धर्मेंद्र डीपीई, मुख्य शिक्षक रतनलाल,सुरेंद्र सिंह, राकेश कुमार,प्रीतम तथा कालूराम सहित विद्यालय के समस्त स्टाफ एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 02: साहिबजादों के बलिदान दिवस को याद करते हुए।
चोर साहब के कारनामों के बाद अब कुतरूं प्राचार्य के काले कारनामे तथा ब्लैकमेलर शिक्षक-
-दो कृतियों की कडिय़ां प्रसारित होगी 14 जनवरी से, पढ़ते रहे कनीना की आवाज
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कनीना की आवाज। डा. होशियार सिंह यादव विश्व रिकार्डधारक पूर्व शिक्षक, लेखक, साहित्यकार एवं पत्रकार ने जहां विगत दिनों चोर साहब के कारनामों पर 65 कडिय़ां प्रकाशित की थी और वह पुस्तक पूरी होने के कारण प्रकाशन हेतु प्रेस में जा चुकी है। लोगों ने चोर साहब के कारनामों को बहुत सराहा था। ऐसे में जितने भी पाठक जुड़े रहे उन सभी का आभार। अब 14 जनवरी 2026 से 2 नई कृतियां प्रकाशन की तैयारियां पूर्ण हो गई है।
पहली कृति का नाम होगा कतरूं प्राचार्य के काले कारनामे । इस पुस्तक के विषय में मैं बताना चाहूंगा कि करीब 40 सालों के शिक्षण में 35 विभिन्न प्राचार्यों से भेंट हुई। जिनमें एक कुतरूं प्राचार्य भी मिला जो अय्याशी किस्म का था। उसके कारनामे देखे जाए तो बहुत मशहूर हैं वह अपनी बेटी के समान शिक्षिकाओं पर भी बुरी नजर रखता था। जब तक मैंने पढ़ाया तब तक उसकी बुरी नजर मशहूर रही थी। शिक्षिकाओं को अपने पास घंटों बैठाए रखता था। जब मैं स्कूल से अन्यत्र चला गया तब भी उसने अपने कारनामे जारी रखें। गांव के लोगों के सामने हाथ पैर जोड़ता था गिड़गिड़ाता था, लोग उसे कुतरूं कहते थे। इसलिए इस कृति का नाम कुतरूं प्राचार्य के काले कारनामे रखा है। जिसकी प्रथम कड़ी 14 जनवरी 2026 को कनीना की आवाज ब्लाग में प्रकाशित की जाएगी।
दूसरी कृति ब्लैकमेलर शिक्षक होगी। डा. होशियार सिंह पूर्व विज्ञान शिक्षक के संपर्क में आया था। 40 सालों की शिक्षण अवधि में यह एक ऐसा शिक्षक भी मिला जिसे शिक्षक कहते हुए शिक्षक कहते हुए शर्म आती है। जिसको न हिंदी आती, ना अंग्रेजी आती, ना संस्कृत आती, न ही उर्दू आती, न फारसी आती ना आने कोई भाषा का ज्ञान था। परंतु चापलूसी में पीएचडी था। वह बहुत मशहूर रहा है। परंतु चापलूसी में अग्रणी पंक्ति में रहा है। किसी के पैर पकड़ लेना, किसी के आगे हाथ जोड़कर गिड़गिड़ा लेना और यहां तक की उसे अगर थोड़ा सा धमका दे तो तो वह पीछे हट जाता था। उसकी सबसे बड़ी विशेषता थी रही है कि सभी को ब्लैकमेल करने पर तुला रहता था। किसी को नौकरी लगाना, किसी को किसी केस से बरी करवाना, किसी को कोई लोन दिलवाना, किसी का अन्य कोई काम करवाने के आश्वासन देने में मशहूर रहा है। यहां तक की उसकी अनेकों ब्लैकमेलिंग की घटनाएं सामने आई हैं। सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वह ऐसे लोगों को अपनी नजदीक रखता है जो रंडी जैसे गुण रखते हैं। इस शिक्षक के कारनामे तो बहुत अधिक सामने आ गए हैं और पास में रख लिए हैं। अब सोचा कि क्यों नहीं एक के बाद एक कड़ी डालता रहूं। किसी ने कहा कि उनकी नौकरी हट जाएगी, आपके पास सारे प्रमाण है तो मैं उनसे साफ कह दिया कि चाहे मेरा कोई दुश्मन भी है तो उसे नौकरी नहीं हटवाना चाहूंगा। चूंकि नौकरी किसी को देना सीखना चाहिए ,हटवाना नहीं। हां उसके जो ब्लैकमेलिंग के कारनामे हैं वे जरूर प्रकाशित करूंगा। यह भी सोच लिया जो भी राक्षस प्रवृत्ति के लोग मेरे जीवन में मेरे विरुद्ध खड़े थे उनके कारनामे सभी के सामने लाये जाएंगे। जान आनी जानी होती है। एक न एक दिन सभी को जाना होता है। अब उनसे पूरे जोश के साथ लड़ा जाएगा क्योंकि सच्चाई बहुत कड़वी होती है, बहुत दर्द देती है और कलम की मार तो सबसे बुरी होती है। इसलिए अब कलम की मार की जाएगी ताकि लोग उनके कारनामों से परिचित हो सके। आशा है सभी पाठकवृंद का साथ यूं ही बना रहेगा।
एक दर्शनीय स्थल के रूप में उभर रहा है बाबा मोलडऩाथ आश्रम
--27 फरवरी के मेले से पहले आकर्षक स्थल बनेगा
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कनीना की आवाज। कनीना का बाबा मोलडऩाथ आश्रम एक दर्शनीय स्थल के रूप में उभर रहा है। एक दर्जन मंदिर बाबा आश्रम के पास में निर्मित हो चुके हैं। बाबा मोलडऩाथ का हर वर्ष विशाल मेला लगता है। कनीना के प्रमुख देवता के रूप में पूजा जाता है। हाल ही में इसका नया आकर्षक भवन बनने जा रहा है। आश्रम ट्रस्ट प्रधान दिनेश कुमार ने बताया कि 27 फरवरी 2026 को मेला लगेगा। इस मेले से पूर्व नया आश्रम बन जाने की उम्मीद है। रामनिवास दास इसके महंत हैं।
बाबा स्थल को चार चांद लगाने के लिए बाबा के स्थल के पास ही अनेकों धार्मिक स्थलों का निर्माण होता जा रहा है। बाबा के आश्रम के पास ही 21 फुट ऊंची शिव प्रतिमा वाला शिवालय स्थित है। इस शिवालय का निर्माण शिवभक्त भरपूर सिंह ने निर्मित करवाया है। पास में सीताराम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। सीताराम मंदिर के पास ही राधाकृष्ण का मंदिर बना हुआ है। बाबा आश्रम के पीछे सती समाधि भी बनी हुई है। पास में पानी से भरा जोहड़ है जहां कभी बाबा जल समाधि लेते थे। यह यह पक्का तालाब बना दिया गया है। यहां कभी प्राकृतिक तालाब होता था जहां संत मोलडऩाथ विचरण करते थे तथा इस जल को पीते थे।
बाबा आश्रम के नीचे वर्तमान में प्रकटीनाथ का आश्रम बना हुआ है जो बाबा के एक कमरे के निर्माण के वक्त प्रकट हुए थे। बाबा के पास ही बाबा डूंगरमल की समाधि, खागड़ आश्रम, मंगलदेव की कुटिया, शहीद सुजान सिंह पार्क, बाबा हनुमान की 11 फुट ऊंची प्रतिमा वाला मंदिर, बाबा हनुमान का पुराना मंदिर, बाबा भैया स्थल, सांई बाबा मंदिर, शनिदेव मंदिर, मां मंदिर, माता स्थल , राधाकृष्ण मंदिर बने हुए हैं। पास में रणबांकुरों की प्रतिमाएं लगी हुई है। जहां समय-समय पर लोगों का तांता लगा रहता है। सात वर्षों पहले यहां विशाल दर्शनीय श्याम मंदिर निर्मित करवाया है जो मन मोह रहा है। बाबा आश्रम के पास ही बस स्टैंड का होना भी अहं भूमिका निभा रहा है। पास में शहीद सुजान सिंह की प्रतिमा लगी हुई है। शहीद सुजान सिंह ने 1994 में जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों का सफाया करते हुए शहादत दी थी जिन्हें मरणोपरान्त अशोक चक्र से सम्मानित किया गया है। पास में पार्क बना हुआ है। इसी पार्क में पुराना हनुमान मन्दिर स्थित है जहां मंगलवार को श्रद्धालुओं का तांता लगता है और प्रसाद चढ़ाया जाता है।
बाबा के जोहड़ के पास मंगलदेव कुटिया बनी हुई है। मंगलदेव तपस्वी साधुजन हुए हैं जिन्होंने कुआं खुदवा कर पेयजल का प्रबंध करवाया था। मोलडऩाथ स्थल के पास बनवाया गया खागड़ आश्रम भी मनमोहक है। बाब डूगंरदास की समाधि भी बनी हुई है। पास में विशाल खाटू श्याम मंदिर एवं साई मंदिर बरबस लोगों का मन मोह रहा है। यहां भी बाबा मोलडऩाथ मेले के साथ साथ मेला लगता है। पास में साईं बाबा का मंदिर सुशोभित है। शनिदेव का मंदिर तथा माता का विशालकाय मंदिर बना हुआ है तथा आकर्षक हें। अनेकों अन्य धार्मिक स्थल भी यहां पर निर्मित किये जा चुके हैं। इस प्रकार कई धार्मिक स्थानों से परिपूर्ण बाबा मोलडऩाथ आश्रम दर्शनीय स्थल के रूप में उभर रहा है। मोलडऩाथ की प्रतिमा भीम सिंह कनीना ने निर्मित करवाई थी किंतु बाबा पर दो पुस्तकें एक आइएसबीएन की कनीना के लेखक डा. होशियार सिंह यादव की आ चुकी हैं। इस लेखक ने आरतियां, बाबा चालिसा, पंचांग आदि भी बनवाये हैं। अब तो यह क्षेत्र का प्रमुख दर्शनीय स्थल बन चुका है जहां दूर दराज तक के भक्त आते हैं। बाबा मोलडऩाथ की पूजा आधा दर्जन से अधिक गांवों में होती आ रही है। रोड़वाल में बाबा की प्रतिमा विगत वर्षों स्थापित की गई थी। बाबा आश्रम एवं आस पास के मंदिर बाबा के दर्शनीय स्थल को चार चांद लगा रहे हैं।
जहां संत मोलडऩाथ ने विक्रमी संवत 2006 में पंचतत्व में विलीन हो गये थे किंतु वे जिस तालाब के पास आराम करते थे उस तालाब का नवीकरण का कार्य तालाब द्वार लगाकर पूर्ण कर दिया गया है।
प्राचीन तालाब--
आज संत को पंचतत्व में विलीन हुई करीब 77 साल बीत गये हैं। इस तालाब को करीब 35 लाख रुपये की लागत से पक्का किया हुआ है।
प्रकृति प्रेमी थे संत -
संत मोलडऩाथ प्रकृति प्रेमी थे । जीवों को चुग्गा डालते थे तथा इसी जोहड़ के किनारे जाल के पेड़ के नीचे विश्राम करते थे। यहां एक बणी होती थी जिसमें जाल के पेड़ के नीचे संत आराम करते थे और तालाब का ही पानी प्रयोग करते थे। गीदड़, चिडिय़ा तथा अनेकों प्रकार के जीव जंतु यहां विचरते थे। उनकी यादों को ताजा कर दिया गया है। जोहड़ पक्का कर दिया गया है।
कृषि वैज्ञानिकों से कम नहीं हैं राजेंद्र सिंह एवं सूबे सिंह दो किसान
--सरकार द्वारा भी सम्मानित हैं
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कनीना की आवाज। जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा का रेतीला इलाका है और राजस्थान के समीप होने के कारण इसकी पृष्ठभूमि थी राजस्थान से मिलती-जुलती है। यहां का किसान मेहनती होने के साथ-साथ नए-नए प्रयोग करके फसलें उगा रहा है। जो कृषि यहां संभव नहीं लगती वो भी उगाकर कीर्तिमान स्थापित किया जा चुका है। चने की कृषि इस क्षेत्र में अतीत की बात बन चुकी है किंतु किसानों ने चने की कृषि करके भी नाम कमा लिया है। यहां तक कि कुछ किसान तो देसी फल, अन्न एवं सब्जियां उगाकर पुन: स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत हैं। किसान तो कृषि के साथ-साथ पर्यावरण को साफ सुथरा रखने में अहं भूमिका निभा रहे हैं।
शोध कार्य:-
जिला महेंद्रगढ़ का किसान राजेंन्द्र सिंह एवं सूबे सिंह किसान कई वर्षों से कृषि पर शोध कर रहा है। बिना खाद व दवाओं के फल एवं सब्जियां उगाने में माहिर है। प्रत्येक वर्ष अपने खेत में से एक एकड़ भूमि को इस कार्य के लिए छोड़ देते हंै और फिर उस पर देसी फल, सब्जियां उगाकर लोगों को बांटते है। उनके पास तो डाक्टर एवं वैद्य भी बगैर खाद एवं दवाओं की सब्जी उनके पास से लाने के आदेश देते हैं। सीधा साधा किसान राजेंद्र सिंह एवं सूबे सिंह अपने परिवार सहित कुएं पर रहते हंै और कृषि करने में अति माहिर है। दूसरे किसान भी उनके पदचिह्नों पर चल रहे हैं। अपने कुएं पर गोबर गैस प्लांट तक लगा दिया है और अब निजी स्तर पर अभ्यारण्य खोलने के लिए आतुर है। उन्होंने इस संबंध में उच्च अधिकारियों को भी इस संबंध में पत्र लिखे थे।
इस किसान ने अपने खेत में जहां पांच फुट लंबी तक मूली, गर्मियों के मौसम में मूली जैसी सब्जी उगाकर अनोखा उदाहरण पेश कर चुके हंै। चौलाई, बथुआ, मतीरा एवं कचरी आदि की कई प्रकार उगाकर भी क्षेत्र में नाम कमाया है। वे अपने खेत पर पैदा की गई सब्जी को बेचते नहीं हैं अपितु जनहित के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने जीव जंतुओं को बचाने के लिए भी अभियान छेड़ा हुआ है और पीएफए के सदस्य भी हैं। पर्यावरण को हो रहे नुकसान से वे बड़े चिंतित हैं।
विज्ञान के इस युग में जहां किसान हो या विद्यार्थी सभी वैज्ञानिक नियमों का पालन करना चाहता है किंतु इस जगत में कुछ ऐसे भी इंसान हैं जो अपने नियमों को नहीं तोडऩा चाहते और आधुनिकता की चकाचौंध से दूर रहकर नई तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं जिसके चलते वे दूर दराज तक ख्याति प्राप्त करते हैं। ऐसे ही एक किसान कनीना जिला महेंद्रगढ़ के निवासी राजेंद्र सिंह एवं सूबे सिंह भाइयों की जोड़ी हैं जिन्होंने देसी तरीके से फल और सब्जियां उगाकर दूर दराज तक नाम कमाया है जिसके कारण दूर दराज से मरीज और रोगी उनके फल और सब्जियां ले जाते हैं ताकि रोगों से
छुटकारा पाया जा सके। सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे किसी से फल ओर सब्जी का कोई पैसा नहीं लेते।
बाबा रामदेव के व्याख्यानों और उनकी दवाओं में लौकी भी प्रमुख औषधि है। लौकी का जूस पीने वालों की दिनोंदिन तादाद बढ़ रही है। चूंकि बाजार में मिलने वाली लौकी में जहरीली दवाएं और खाद के अलावा इंजेक्शन द्वारा तैयार की हुई बताई जाती हैं जिसका शरीर पर लाभ की बजाय नुकसान होने की संभावना अधिक है। ऐसे में मरीज उनके पास बिना इंजेक्शन आदि से तैयार की हुई लौकी लेने के लिए आते हैं। वे प्रत्येक वर्ष कम से कम दो एकड़ में फल और सब्जियां उगाते हैं और नि:स्वार्थ सेवा करते हैं। उनका कहना है कि जन सेवा ही नारायण सेवा होती है।
यूं तो विज्ञान के युग में पुराने समय से चली आ रही देसी सब्जियां जैसे बाथू, चौलाई, सांटी ओर देसी मतीरा, देसी टिंडा, देसी टमाटर और बहुत सी सब्जियां कहीं मिलती नहीं हैं क्योंकि किसान खेत से इन्हें खरपतवार समझकर निकाल देते हैं किंतु राजेंद्र सिंह एवं सूबे सिंह किसान इनको भी अपने खेत में उगाए रखते हैं। यही कारण है कि बूढ़े और बड़े लोग जो खाटा का साग और कढ़ी आदि में देसी सब्जियों का तड़का लगाने के शौकीन हैं उन्हें राजेंन्द्र के पास ही आना पड़ता है। राजेंद्र सिंह उन्हें चाव से ये बीते दिनों की देसी सब्जियां दे देते हैं। उनके नित्य नए प्रयोगों के चलते लोग उन्हें डाक्टर नाम से जानते हैं। अपने कुएं पर कनीना से करीब पांच किमी दूर रहते हैं ओर वे जीव जंतु प्रेमी भी हैं। उन्होंने अपनी आंखों के सामने किसी को जीव सताते देख लिया तो उनके विरुद्घ लड़ाई करके जीवों को बचाया है।
किसान राजेंद्र सिंह एवं सूबे सिंह अपने कुएं पर कनीना से तीन किमी दूर करीरा गांव में रहता है। यदि उनके ट्यूबवैल पर जाकर देखा जाए तो चार पशु रख रखे हैं जिनके गोबर का सदुपयोग वर्मी कंपोस्ट के लिए कर रहे हैं। उन्होंने चार यूनिट वर्मी कंपोस्ट की लगाये भी थे।












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