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Monday, December 29, 2025




 
घरों के ऊपर से गुजरने वाली बिजली के लाइनें हटाई जाए
--इंसुलेटिड की जाए या मोटी केबल लगाई जाए
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कनीना की आवाज।
कनीना क्षेत्र में अनेकों घरों एवं दीवारों के ऊपर से बिजली की लाइनें गुजर रही है। बिजली विभाग बेहतरीन फलदार और फूलदार पौधों की कटिंग कर जाता है। पेड़ पौधे लगाने वालों में रोष पनप रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि एचटी बिजली की लाइन आबादी से दूर से निकली जाए।
 एक और जहां हरियाणा सरकार ने भी यह बात कही है कि एचटी लाइन आबादी से दूर से निकाली जाए वहीं उच्च न्यायालय का भी यही आदेश है कि बिजली के लाइन घनी आबादी के बीच से न गुजरी जाए। यदि बिजली बोर्ड से संपर्क किया जाता है और बिजली के खंभों को शिफ्ट करवाने की बात कही जाए तो भारी खर्चा मांगा जाता है। खर्चा भी इतना कि आम आदमी उसे वहन नहीं कर पाता। यही कारण है कि बहुत से दीवारों और प्लाट टेढ़े मेढ़े बना दिए गए हैं क्योंकि बिजली विभाग में जिस भी खाली प्लाट में खंभे गाड़े वो अपनी मनमर्जी से गाड़ दिये। अब वे समस्या बनते जा रहे हैं। कनीना-रेवाड़ी मार्ग पर नहर कटान के पास कृष्ण कुमार, भरपूर सिंह, करतार सिंह, विजयपाल, होशियार सिंह आदि के प्लाट में एचटी लाइन गुजर रही है जो एक दीवार पर तीन पोल लगाकर मालिक के प्लाट का नक्षा ही बदल दिया है। इस संबंध में समाधान शिविर में भी यह बात रखी गई है किंतु कोई गौर नहीं किया गया है।
  आश्चर्य तब होता है कि दो लाइन एक साथ गुजारी गई हैं। यदि एक को हटा दिया जाए तो सरकार का माल भी बच जाए और लोगों को राहत भी मिल जाए किंतु विभाग है कि टस से मस तक नहीं होता हे। अब प्रधानमंत्री को इस संबंध में इन अधिकारियों की शिकायत की जाएगी तथा आंदोलन चलाया जाएगा।
  भरपूर सिंह, कृष्ण कुमार, रोहित कुमार, योगेश कुमार, होशियार सिंह आदि ने बताया कि बिजली विभाग ने हद कर रखी है। प्लाट में ही पोल गाड़ दिये हैं। वो भी एक नहीं तीन तीन पोल टेढ़ेे मेढ़े गाड़कर बेहद परेशान कर दिया है। डा. होशियार सिंह प्रधान ट्रस्ट ने बताया कि उनका ट्रस्ट कार्यालय इसलिए अधर में अटका पड़ा है कि पोल एवं तार उनके प्लाट से नहीं हटाये जा रहे हैं।
  बिजली की तारे घरों के ऊपर से गुजर रही है जो बड़े हादसे को न्योता दे रही है। अनेकों दुर्घटनाएं घट चुकी है। परंतु विभाग लाइन व खंभों को शिफ्ट नहीं करता जिसके कारण कोई भी हादसा हो सकता है। ये बिजली के तार कभी भी टूट सकते हैं। एचटी की लाइन भी घरों के ऊपर से गुजर रही हैं या फिर घनी आबादी से भी बिजली की लाइन गुजर रही है। सभी को अभिलंब हटा दिया जाए तो बड़ा हादसा होने से टाला जा सकता है। ऐसे कई दुकानदार और घरों के मालिक परेशान है। उनकी परेशानी को दूर करने का एकमात्र इलाज बिजली की लाइनों को शिफ्ट करना है। या फिर खंभे सीधे करने के उपरांत स्टे लगाकर घरों से दूर से लाइन गुजारी जाए।
बिजली की तारे घनी आबादी के पास से गुजरती हैं। घरों में बड़ी ही मेहनत से फलदार और फूलदार पौधे उगाई जाते हैं जो बड़े होते ही तारों के छूने से खतरा बन जाते हैं। एक तरफ बड़ा हादसा होने का खतरा बन जाता है वहीं बिजली विभाग इन पेड़ पौधों को कभी भी काट जाता है जिसके कारण बेहतरीन दर्ज के फलदार और फूलदार पौधे नष्ट हो जाते हैं। कस्बावासियों की मांग है कि बिजली के तारों को घरों के आसपास से हटाया जाए ताकि फलदार और फूलदार पौधे विकसित हो सके।
बिजली के खंभे मनमर्जी से खाली प्लाटों में गाड़ दिए गये जो अब इनको हटाना बहुत महंगा पड़ रहा है। विभाग इनको भारी राशि जमा करके ही शिफ्ट करता है। जिनकी पहुंच उच्च अधिकारियों तक नहीं है वह बेचारे परेशान होकर घरों में बैठ जाते हैं। जहां उच्च न्यायालय और हरियाणा सरकार ने भी बिजली के तारों को दूर शिफ्ट करने की मांग की बात कही है किंतु विभाग अभी तक शिफ्ट नहीं कर रहा है। अविलंब इन तारों को आबादी से दूर किया जाए।
 लोगों ने  मांग की है कि दो एचटी लाइन जो पास पास गुजर रही हैं जिनमें से एक का कोई लाभ नहीं है। यदि इसे हटा दिया जाए तो सरकार के बिजली के तार एवं पोल बच जाएंगे किंतु अधिकारी जानबूझकर उनको नहीं हटा रहे हैं। आबादी से थोड़ा दूर हटाकर उनको इंसुलेटिड किया जाए तो भी राहत मिल सकती है या फिर मोटी केबल लगाई जा सकती है। अब देखना है कि अधिकारी जागते हें या नहीं वरना आंदोलन किया जाएगा और प्रधानमंत्री को इन अधिकारियों के बारे में अवगत कराया जाएगा।
 फोटो कैप्शन : बिजली के तार घरों के ऊपर से गुजरते हुए या दीवार पर लगाये खंभे



बड़े-बड़े पीपल के पेड़ों के नीचे बढ़ता जा रहा है कबाड़
--पूजा स्थल को दे रहे हैं कबाड़ का रूप
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कनीना की आवाज।
वैज्ञानिक मानते हैं कि पीपल और बरगद के पेड़ सूर्य उदय होने से पहले ही आक्सीजन गैस प्रदान करना शुरू कर देते हैं और देर शाम तक भी आक्सीजन प्रदान करते हैं। यह गुण अन्य पेड़ों में नहीं पाया जाता। यही कारण है कि हमारे शास्त्रों में पीपल और बरगद जैसे पेड़ों की पूजा का विधान बताया गया है किंतु बड़े-बड़े पीपल और बरगद के पेड़ कबाड़ घर बनते जा रहे हैं। देखने में आ रहा है कि घरों की टूटी हुई मूर्तियां देवी देवताओं की प्रतिमाएं बड़े-बड़े पीपल और बरगद के पेड़ों के नीचे रख दी जाती हैं। जब तक घर में लोग देवी देवताओं की मूर्तियां पूजते हैं तब तक सही है और कहीं खरोंच लग जाए या टूट जाए तो उसे पीपल के नीचे रख आते हैं। किसी बरगद या पीपल के पेड़ के नीचे जाकर देखें तो देवी देवताओं की विखंडित प्रतिमाएं एवं मूर्तियां रखी मिलती है वहीं कितने ही टोटके इन पेड़ों के नीचे किया जा रहे हैं। जहां कहीं भी बड़े पेड़ के नीचे जाकर देखें बरगद व पीपल के नीचे छोटी-छोटी मटकियां दिखाई देती है जो टोटके किए होते हैं। जहां इंसान 21वीं सदी में चल रहा है किंतु 16वीं सदी में चलने वाले टोटके आज भी पेड़ों के नीचे देखे जा सकते हैं। कभी इन पेड़ों के नीचे लोग बैठते, सोते थे तथा धूप से बचते थे आज इन पेड़ों के नीचे पूजा के लिए जाने से बचने लगे हैं क्योंकि ढेरों टोटके किये होते हैं। जहां इंसान पढ़ लिख गया है परंतु पुराने टोटकों से अभी पीछा नहीं छुड़वा रहा है। यही हाल रहा तो भविष्य में बड़े-बड़े पीपल और बरगद के पेड़ों के नीचे का कबाड़ उठाना कठिन कार्य हो जाएगा। जिन पेड़ों की पूजा की जानी चाहिए वहां उनके नीचे इस प्रकार की गतिविधियां करके न केवल पेड़ों का अपमान किया जा रहा है अपितु लोगों को पूजा से दूर किया जा रहा है। किस प्रकार के टोटके न करने की जागरूक लोग दुहाई दे रहे हैं।
 फोटो कैप्शन 06: बड़े पीपल के पेड़ के नीचे पड़ी मटकियां एवं देवी देवताओं की मूर्तियां।





अलविदा 2025
वर्ष 2026 के लिये, लिये जा रहे नये संकल्प
--जारी है विश्व खुशी की कामना
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कनीना की आवाज।
नव वर्ष 2026 का आगाज होने जा रहा है और नए साल के आगमन पर लोग कई बुराइयां त्यागने को कटिबद्ध हैं वहीं क्षेत्र में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। वर्ष 2025 कई कड़वे एवं मीठे अनुभव छोड़कर जा रहा है।
  कनीना क्षेत्र के कुछ युवा जनसेवा में तो कुछ बेटी बचाने के लिए कटिबद्ध हैं। युवाओं में नए वर्ष को लेकर तैयारियां चल रही हैं। क्या कहना है लोगों का---
नए साल से गायों की सेवा करने का संकल्प ले चुके हैं। गायों की दुर्गति से वे परेशान हैं। उनका कहना है कि वे गायों के लिए भोजन कराने तथा गौशालाओं में सेवा करने का काम करते रहेंगे। उनका मानना है कि गाय को माता का दर्जा दिया गया है और गायों की सेवा से सभी प्रकार के कष्ट एवं दरिद्रता मिट जाती है। ऐसे में वे वर्ष 2026 में गायों की सेवा करते रहेंगे।
  ---भगत सिंह प्रधान, कनीना
मेरे परिवार में महज दो लड़कियां हैं और लड़का नहीं हैं। ऐसे में वे बेटी बचाने तथा बेटियों को पढ़ाने के लिए अनवरत प्रयास करते रहेंगे। वे दूसरों को भी बेटी बचाने की प्रेरणा देंगे तथा अपनी कलम से बनाए जाने वाले भजन एवं गीत भी लड़कियों को बचाने एवं उनकी शिक्षा दीक्षा को अर्पित किए जाएंगे। वे वर्ष 2026 को बेटियों के रूप में मनाना चाहते हैं। साथ में खाटू श्याम के नये भजन बनाकर रिकार्डिंंग करवाई जाएगी।
  -- महेंद्र कुमार, कवि झाड़ली
 मुझे मालूम हैं कि मेरे शरीर में क्या क्या बुराइयां हैं उन्हें छोडऩे का संकल्प ले लिया है। साथ में अपने काम को ईमानदारी से करने का भरसक प्रयत्न करूंगा। दूसरों को भी ईमानदार रहने के लिए प्रेरित करता रहूंगा। हर काम को और ईमानदारी एवं सुंदर तरीके से करूंगा। जनसेवा में जुटा रहूंगा।
---कंवरसेन वशिष्ठ, पूर्व मुख्याध्यापक ,कनीना
मेरे समारोह स्थल में जितने भी बुजुर्ग आएंगे उनकी सदा सेवा करता रहूंगा। उनके घूमने फिरने के लिए लान बना रखे हैं ताकि वहां आकर सेहत बना सकेंगे। जितनी गायों की सेवा होगी परोक्ष रूप से करता रहूंगा। जिस किसी को मेरे से कोई काम पड़ेगा उसे जैसे भी बन पाएगा त्वरित गति से पूरा करूंगा।
-- हनुमान सिंह, मैरिज पैलेस संचालक
फोटो कैप्शन: कंवरसेन वशिष्ठ, हनुमान सिंह, महेंद्र शर्मा, भगत सिंह


 
यज्ञ ब्रह्मा को किया सम्मानित
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कनीना की आवाज।
धनौन्दा गांव में चल रहे 6 दिवसीय ऋग्वेद महायज्ञ के पांचवें दिन यज्ञ ब्रह्मा आचार्य सत्यव्रत का नागरिक अभिनंदन किया गया। यज्ञ ब्रह्मा सत्यव्रत को केसरिया साफा पहनाकर, शॉल ओढ़ाकर, प्रशस्ति पत्र भेंट कर राष्ट्र गौरव अवार्ड से सम्मानित किया।
इस दौरान आर्य वैदिक विद्वान सत्यव्रतानंद, पूर्व मुख्याध्यापक रामौतार बिघोपुर, स्वामी एकतानंद और वेदपाठी तरूण शास्त्री को भी सम्मानित किया गया। अतरलाल ने कहा कि यज्ञ ब्रह्मा आचार्य सत्यव्रत ने महर्षि दयानंद की शिक्षाओं के प्रचार प्रसार में उल्लेखनीय योगदान देकर आर्य संस्कृति को घर-घर पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा संत महापुरुष, योग महापुरुषों को सम्मानित करने से समाज में खुशहाली आती है। इसलिए संत महापुरुष, ऋषियों का अभिनंदन स्वागत होता रहना चाहिए। यज्ञ ब्रह्मा आचार्य सत्यव्रत ने पंच महायज्ञ को समाज की तरक्की और खुशहाली का महामंत्र बताते हुए हर परिवार को पंच महायज्ञ करने का आह्वान किया। उन्होंने अभिनंदन करने के लिए ग्रामीणों तथा आर्य समाज धनौंदा का धन्यवाद किया। इस अवसर पर प्रधान संतलाल आर्य, यशपाल आर्य, राजेन्द्र नम्बरदार, सूरत सिंह मुख्याध्यापक, बलजीत, कप्तान सुरेन्द्र सिंह, कैलाश गोयल, धर्मबीर, सुभाष यादव आदि अनेक आर्य समाज के अनुयायी उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन 05: आर्य विद्वानों को सम्मानित करते हुए।



नाली को ठीक करवाने संबंधित दिया ज्ञापन
-नगरपालिका के जेई को दिया गया ज्ञापन
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कनीना की आवाज।
नगरपालिका चेयरपर्सन को अनेकों बार अवगत कराने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने पर वार्ड 01 के नरेंद्र फौजी एवं नवीन कुमार ने काम करवाने के लिए कमर कसी और नगरपालिका अभियंता को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि वार्ड 01 में प्रो. हंसराज के मकान के पास स्थित नाली अति जर्जर हो चुकी है। नाली पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण उसमें से पानी सड़क पर बह रहा है, जिससे राहगीरों व स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वाहनों के टायर भी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और बुजुर्ग गिर चुके हैं। सरिये बाहर निकल आये हैं जो दुर्घटनाओं को अंदेशा दे रहे हैं। ऐसे में नाली में पाइप लगवाकर दुरुस्त करवाया जाए।
फोटो कैप्शन 04: जेई नगरपालिका को ज्ञापन देते हुए।


कनीना नगर पालिका के उप चुनाव की होने लगी है चर्चाएं
-वार्ड 14 से होना है उपचुनाव
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कनीना की आवाज। 
नगर पालिका कनीना के यूं तो प्रधान एवं उप प्रधान पहले ही बन चुके हैं। नगर पालिका अपना कार्य विधिवत रूप से कर रही थी कि अचानक वार्ड 14 के पार्षद राजेंद्र लोढ़ा की मौत के बाद एक बार फिर से कनीना के वार्ड 14 की तरफ लोगों की नजरें टिक गई है। यहां निकट भविष्य में उपचुनाव होने वाले हैं क्योंकि वार्ड 14 का पार्षद नगर पालिका प्रधान का ससुर था। जिनके कारण नगर पालिका में बहुमत बना हुआ था और प्रधान एवं उप प्रधान बने थे। अब लोगों की नजरें वार्ड 14 पर टिक गई है और कई नए और पुराने चुनाव लडऩे वाले इस चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। एक तरफ लोढ़ा परिवार से ही किसी सदस्य को चुनाव लडऩे की बातें भी कनीनावासी कर रहे हैं तो वहीं वार्ड 14 से पहले चुनाव लड़ चुके ऐसे पार्षदों के मैदान में उतरने की संभावना सी इनकार नहीं किया जा सकता। वार्ड 14 एक नया वार्ड पहली बार चुनाव इस बार के चुनावों में बनाया गया था। बीते चुनावों से पहले कनीना नगर पालिका के 13 वार्ड होते थे। पहली बार चुनाव में वार्ड 14 बनाया गया था  जिसमें अधिकांश लोग रेवाड़ी, गाहड़ा आदि सड़क मार्ग पर बसे हुई वोटर हैं। क्योंकि 6 महीने के अंदर उपचुनाव होने की संभावना है और जल्द ही यह माना जा रहा है चुनाव होंगे। उसके लिए चुनाव लडऩे वालों की तैयारी भी शुरू हो गई है। अब यह देखना है कि इतना उपचुनाव कब होते हैं और कितने लोग चुनाव मैदान में उतर पाते हैं।




पिता की स्मृति में दिया 11000 रुपए दान
-गौवंश को खिलाया गुड़
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कनीना की आवाज।
कनीना उप-मंडल के गांव गाहड़ा के धर्मवीर ने श्री कृष्ण गौशाला कनीना में अपने पिता की स्मृति में जहां 11000 रुपए का दान दिया वहीं गौवंश को गुड़ खिलाया। इस मौके पर भगत सिंह प्रधान एवं   गौशाला कार्यकारिणी ने उनका अभिनंदन किया।
 भगत सिंह ने कहा कि गायों को सेवा करना सर्वोच्च सेवा कहलाती है। गायों के निमित्त दिया गया दान, पुण्य का कार्य होता है। वैसे तो गायों को घर में पालना चाहिए लेकिन जो घरों में नहीं पाल सकते वे परोक्ष रूप से दान दक्षिणा देकर गायों की सेवा कर सकते हैं। इसी क्रम में अब तक 550 गाए गोद ली जा चुकी है जिनकी सेवा गौशाला में की जाती है।
 इस मौके पर कृष्ण गुरुजी, धर्मवीर, आशीष, ममता देवी, अंजली देवी, नैतिक, बलवान सिंह, मोहित, तारा सिंह आदि उपस्थित रहे।
 फोटो कैप्शन 3: गौशाला को दान दक्षिणा करते हुए धर्मवीर परिवार





भोर होते ही छा गया अंधेरा
- 2 घंटे तक पड़ा सघन कोहरा
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कनीना की आवाज।
 कनीना क्षेत्र में जहां रातभर कोई धुंध एवं कोहरानहीं पड़ा किंतु सुबह होते ही अंधेरा छा गया। सघन कोहरा छा गया। कुछ दूर की वस्तुएं भी नहीं दिखाई दे रही थी। वाहनों की हेडलाइट एवं सर्चलाइट जलाकर चलाए गए, वहीं दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहा लेकिन यह कोहरा महज 2 घंटे तक ही छाया रहा तत्पश्चात वातावरण साफ हो गया। सूर्य चमकने लगा।
उल्लेखनीय हैं कि कनीना क्षेत्र में सर्दियों के मौसम में महज 3 दिन धुंध पड़ी है, चार दिन पाला जमा है, कड़ाके की ठंड जारी है तथा मौसम लगातार बदलता जा रहा है। कनीना क्षेत्र में 18000 हेक्टेयर पर सरसों एवं 8000 हेक्टेयर पर गेहूं की फसल खड़ी हुई है जिसके लिए सर्दी का होना जरूरी है। किसानों का कहना है कि यदि ठंड नहीं पड़ेगी तो फसल बर्बाद हो जाएगी। सरसों में जल्दी फूल आ जाएंगे, फलिया अधिक नहीं लगेगी और पक नहीं पाएंगी। ऐसे में सर्दी का होना बहुत जरूरी है किंतु लगातार मौसम खराब रहना और सूर्य नहीं दिखाई देने पर फसलों को नुकसान हो सकता है।
 कृषि वैज्ञानिक भी मानते है कि दिन के समय सूर्य तेज चमकता है, रात को ठंड पड़ती है जिससे फसलों को कोई नुकसान नहीं होगा। किसान प्रतिदिन अपनी फसलों को निहार रहे हैं और प्रसन्न हैं क्योंकि बेहतर फसल पैदावार होने के आसार बनी हुई है।
 फोटो कैप्शन एक से पांच: धुंध का नजारा


चोर साहब के कारनामों के बाद अब कुतरूं प्राचार्य के काले कारनामे तथा ब्लैकमेलर शिक्षक-
-दो कृतियों की कडिय़ां प्















रसारित होगी 14 जनवरी से, पढ़ते रहे कनीना की आवाज
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कनीना की आवाज। डा. होशियार सिंह यादव विश्व रिकार्डधारक पूर्व शिक्षक, लेखक, साहित्यकार एवं पत्रकार ने जहां विगत दिनों चोर साहब के कारनामों पर 65 कडिय़ां प्रकाशित की थी और वह पुस्तक पूरी होने के कारण प्रकाशन हेतु प्रेस में जा चुकी है। लोगों ने चोर साहब के कारनामों को बहुत सराहा था। ऐसे में जितने भी पाठक जुड़े रहे उन सभी का आभार। अब 14 जनवरी 2026 से 2 नई कृतियां प्रकाशन की तैयारियां पूर्ण हो गई है।
 पहली कृति का नाम होगा कतरूं प्राचार्य के काले कारनामे । इस पुस्तक के विषय में मैं बताना चाहूंगा कि करीब 40 सालों के शिक्षण में 35 विभिन्न प्राचार्यों से भेंट हुई। जिनमें एक कुतरूं प्राचार्य भी मिला जो अय्याशी किस्म का था। उसके कारनामे देखे जाए तो बहुत मशहूर हैं वह अपनी बेटी के समान शिक्षिकाओं पर भी बुरी नजर रखता था। जब तक मैंने पढ़ाया तब तक उसकी बुरी नजर मशहूर रही थी। शिक्षिकाओं को अपने पास घंटों बैठाए रखता था। जब मैं स्कूल से अन्यत्र चला गया तब भी उसने अपने कारनामे जारी रखें। गांव के लोगों के सामने हाथ पैर जोड़ता था गिड़गिड़ाता था, लोग उसे कुतरूं कहते थे। इसलिए इस कृति का नाम कुतरूं प्राचार्य के काले कारनामे रखा है। जिसकी प्रथम कड़ी 14 जनवरी 2026 को कनीना की आवाज ब्लाग में प्रकाशित की जाएगी।
 दूसरी कृति ब्लैकमेलर शिक्षक होगी। डा. होशियार सिंह पूर्व विज्ञान शिक्षक के संपर्क में आया था।  40 सालों की शिक्षण अवधि में यह एक ऐसा शिक्षक भी मिला जिसे शिक्षक कहते हुए शिक्षक कहते हुए शर्म आती है। जिसको न हिंदी आती, ना अंग्रेजी आती, ना संस्कृत आती, न ही उर्दू आती, न फारसी आती ना आने कोई भाषा का ज्ञान था। परंतु चापलूसी में पीएचडी था। वह बहुत मशहूर रहा है। परंतु चापलूसी में अग्रणी पंक्ति में रहा है। किसी के पैर पकड़ लेना, किसी के आगे हाथ जोड़कर गिड़गिड़ा लेना और यहां तक की उसे अगर थोड़ा सा धमका दे तो तो वह पीछे हट जाता था। उसकी सबसे बड़ी विशेषता थी रही है कि सभी को ब्लैकमेल करने पर तुला रहता था। किसी को नौकरी लगाना, किसी को किसी केस से बरी करवाना, किसी को कोई लोन दिलवाना, किसी का अन्य कोई काम करवाने के आश्वासन देने में मशहूर रहा है। यहां तक की उसकी अनेकों ब्लैकमेलिंग की घटनाएं  सामने आई हैं। सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वह ऐसे लोगों को अपनी नजदीक रखता है जो रंडी जैसे गुण रखते हैं। इस शिक्षक के कारनामे तो बहुत अधिक सामने आ गए हैं और पास में रख लिए हैं। अब सोचा कि क्यों नहीं  एक के बाद एक कड़ी डालता रहूं। किसी ने कहा कि उनकी नौकरी हट जाएगी, आपके पास सारे प्रमाण है तो मैं उनसे साफ कह दिया कि चाहे मेरा कोई दुश्मन भी है तो उसे नौकरी नहीं हटवाना चाहूंगा। चूंकि नौकरी किसी को देना सीखना चाहिए ,हटवाना नहीं। हां उसके जो ब्लैकमेलिंग के कारनामे हैं वे जरूर प्रकाशित करूंगा। यह भी सोच लिया  जो भी राक्षस प्रवृत्ति के लोग मेरे जीवन में मेरे विरुद्ध खड़े थे उनके कारनामे सभी के सामने लाये जाएंगे। जान आनी जानी होती है। एक न एक दिन सभी को जाना होता है। अब उनसे पूरे जोश के साथ लड़ा जाएगा क्योंकि सच्चाई बहुत कड़वी होती है, बहुत दर्द देती है और कलम की मार तो सबसे बुरी होती है। इसलिए अब कलम की मार की जाएगी ताकि लोग उनके कारनामों से परिचित हो सके। आशा है सभी पाठकवृंद का साथ यूं ही बना रहेगा।




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