Not sure how to add your code? Check our installation guidelines **KANINA KI AWAZ **कनीना की आवाज**

Friday, July 10, 2020



रहेगी त्योहारों की है बौछार
******************************
**********************************
*********************************
 कनीना। पर्व के बाद पर्व आने से बाजारों में रौनक आ गई है। बाजार में जहां घेवर नामक मिठाई, पतंग, राखी, बड़ा बतासा आदि की भरमार है। आगामी दो सितंबर तक पर्व लगातार आते रहेंगे।
  कनीना के ज्योतिषाार्य सुरेंद्र जोशी का कहना है कि 22 जुलाई को सिंधारा, 22 जुलाई को हरियाली तीज, तीन अगस्त को रक्षा बंधन, राष्ट्रीय पर्व 15 अगस्त को, 12 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व तो 13 अगस्त को गोगा नवमी का पर्व मनाया जा रहा है। 22 सितंबर को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जा रहा है। बाद में भी पर्वों की भरमार है।
  पर्वों को देखते हुए बाजारों में रौनक आ गई है। सिंधारा एवं तीज पर्व पर घेवर की मिठाई एवं बड़े बतासे लेन-देन की परंपरा चली आ रही है। यही कारण है कि बाजार में घेवर एवं बड़े बतासा भारी मात्रा में सजे हुए हैं। लड़की के परिजन अपनी विवाहित पुत्री को उनके ससुराल में त्योहारी देने के लिए जाते हैं जिसे तीज त्योहारी कहा जाता है।
  23 जुलाई हरियाली तीज का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन पतंगबाजी का पर्व माना जाता है जिसके चलते बाजार में भारी मात्रा में पतंग आ चुके हैं। 
तीन अगस्त को भाई बहन के बीच अटूट प्रेम का पर्व रक्षा बंधन मनाया जा रहा है। इस पर्व पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती हैं। विभिन्न प्रकार की राखियां बाजार में आ चुकी हैं। ये राखियां त्योहार से करीब एक पखवाड़े पूर्व ही डाक द्वारा भेजे जाने का सिलसिला शुरू हो जाता है। बाजार में डोरा राखियां, फैंसी राखियां एवं संगीतवाली राखियां आई हुई हैं।
  15 अगस्त को जहां राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा है वहीं 12 अगस्त को जन्माष्टमी तथा 13 अगस्त को गोगा नवमी का पर्व मनाया जा रहा है जिसके चलते बाजारों में रौनक आ गई है।
फोटो कैप्शन 3: बाजार में घेवर की मिठाई का दृश्य।








गायों की सेवा करके 21 व्यक्तियों दे रहे हैं रोजगार
पूरा ही परिवार चला है डेयरी
छह गायों से बढ़ाकर कर ली हैं 250
दूसरों के लिए बना प्रेरणास्रोत

****************************
************************************
कनीना। जिला महेंद्रगढ़ के कनीना उपमंडल के गांव गुढा का जयपाल यादव न केवल गायों की सेवा कर रहा है अपितु गायों से अपने समस्त परिवार का भरण पोषण कर रहा है अपितु 21 व्यक्तियों को रोजगार भी दे रहा है। अपना रोजगार छह गायों से शुरू किया किंतु आज 250 गायें हैं। वे दूसरों के लिए उदाहरण बन गए हैं और उनके पदचिह्नों पर चल रहे हैं। गायों को पालकर बेहतर आय कमाने के साथ साथ दूसरों को रोजगार देने का काम कर रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार प्रतिमाह चार से पांच लाख रुपये की आय प्राप्त हो रही है।
खुद बेरोजगार थे किंतु दिया रोजगार-
*************************
जयपाल सिंह डेयरी की देखरेख के अतिरिक्त पशुओं को विभिन्न प्रकार के ठीके लगाने का काम करते आ रहे हैं। वे किसी डाक्टर की मदद नहीं लेते। बीएससी तक पढ़ाई करने के बाद अचानक शौकिया तौर पर छह गाये पाली और आज संख्या 250 पहुंच गई है। 21 व्यक्तियों को जिनमें राजस्थान एवं क्षेत्र के लोगों को रोजगार दिया हुआ है जो गायों की दिनरात सेवा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में तीन देशी गाये जिनमें एक थारपार नस्ल 16 लीटर दूध तो एक साहिवाल 17 लीटर दूध तथा एक हरियाणवी नस्ल जो दस लीटर तक दूध दे रही है जबकि पांच जरसी तथा 150 होलस्टीन नस्ल की हैं। वे दीपावली तक बड़ा गौशाला केंद्र स्थापित कर ओटोमेटिक दूध दोहने वाली मशीन दीपावली तक लगा देंगे।
नीतू को मिला है एक लाख का चेक-
*****************
इसी परिवार की नीतू सिंह यादव को गन्नौर (सोनीपत) में चले एग्री लीडरशिप सम्मिट में किसान रतन पुरस्कार से राष्ट्रपति महामहिम रामनाथ कोविंद ने डेयरी एवं जैविक खाद के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए एक लाख रुपये का चेक दिया था। इससे पहले भी उन्हें कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।  उन्हें 2018 का सर्वश्रेष्ठ महिला डेयरी पुरस्कार मिला था।
जैविक खाद के क्षेत्र में योगदान-
******************
जयपाल यादव ने बताया कि प्रतिदिन एक पशु से करीब 20 किलोग्राम गोबर प्राप्त होता है और यह गोबर वह खेत में इक_ा करते हैं। इसी गोबर की सहायता से अपने खेतों में फसल पैदावार करती है जिसकी मांग अधिक है व खेतों में किसी प्रकार का अन्य खाद्य नहीं डालते बल्कि अपने पशुओं से प्राप्त गोबर को कंपोस्ट खाद में बदलकर या गोबर को खाद के रूप में डालकर प्रयोग करते हैं।
भगवान सिंह परिवार-
*****************
 गुढ़ा गांव का राव भगवान सिंह परिवार जिसमें उनका पुत्र जयपाल एवं जयपाल की मां संतरा देवी जयपाल की पत्नी दीपिका, जयपाल का भाई पवनवीर तथा उनकी पत्नी नीतू यादव ने विगत 2008 में छह गायों से गुढा में डेयरी का काम शुरू किया। उस वक्त पंजाब से एक गाय भी मंगवाई गई थी। आज उन्होंने 150 गायों में से दूध देने वाली गायों का दूध दोहने के लिए दो अत्याधुनिक मशीन भी मंगवा रखी हैं। करीब दो घंटों में सभी गायों का दूध दोह लेते हैं। प्रतिदिन अमूल जैसी डेयरी सहित कई डेयरियों में 3000 लीटर प्रतिदिन दूध भेज रहे हैं। अभी ड्राइ सीजन होने से दूध कम है जो अगस्त में बढ़कर 5000 लीटर हो जाएगा। इस कार्य में अहं भूमिका जयपाल निभा रहे हैं जबकि इनके परिवार के राष्ट्रपति अवार्ड तक डेयरी पालन में मिल चुका है। परिवार में नीतू यादव कई बार बेहतरीन गायों के लिए सम्मान पा चुकी हैं।
  जयपाल ने बताया कि उनके सामने सबसे बड़ी समस्या बेहतर दर्जे के सीमेन की होती है। बेहतर एवं उच्च क्वालिटी का सीमेन न मिलने से गायों की बेहतर नसल नहीं प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने सरकार से किसी प्रकार की कोई सहायता नहीं ली है अपितु अपने ही दम पर सारा कारोबार चलाकर न केवल अपने परिवार का भरण पोषण करते है अपितु अन्य लोगों को रोजगार भी जुटा रहे हैं।

राव भगवान सिंह-
***********
  मुखिया राव भगवान सिंह मुख्याध्यापक पद से सेवानिवृत्त हुए हैं जो पेंशन का कुछ हिस्सा खुद खर्च कर समस्त राशि गौशालाओं में दान कर देते हें या फिर कन्याओं की विवाह शादी पर खर्च कर देते हें। वे भी गायों की सेवा में लगे रहते हैं। कनीना की गौशाला में डेढ़ लाख रुपये भी अधिक दान दे चुके हैं। उनका कहना है कि वे गायों की सेवा करते रहेंगे।
  उन्होंने बताया कि उनके पास कम से कम 30 लीटर तथा अधिकतम 64 लीटर दूध देने वाली गाए भी है। दो सांड भी उन्होंने पाल रखे हैं। करनाल डेयरी संस्थान सहित कई संस्थानों के वैज्ञानिक भी उनके पास आकर कार्यप्रणाली को देखते हैं। उन्होंने बताया कि दिनभर गायों के चारे, खाना, दूध दोहना एवं अन्य कार्य चलते रहते हें। जयपाल ने बताया कि वे पशुओं के रोगों के टीकें स्वयं लगाते हैं और उनके सामने गर्मियों में गायों की देखरेख की समस्या आती है। सर्दी में ये गायें खुश रहती हैं किंतु गर्मी में कम से कम पांच बार नहलानी पड़ती हैं। इतना कुछ होते हुए भी पूरा परिवार प्रसन्न है।
फोटो कैप्शन 1 से 4: गुढ़ा गांव के जयपाल से संबंधित हैं।
  

जून माह में हुई कम बारिश, नहीं हो पाई बिजाई 

************************************
************************************
 कनीना। किसानों को बेसब्री से बारिश का इंतजार है। सावन माह में भी बेहतर बारिश नहीं हो पाई है। किसान परेशान हैं और नलकूपों से सिंचाई कर रहे हैं।
जून माह में कनीना क्षेत्र में कम बारिश हो पाई है जिसके चलते अभी तक  करीब 30 प्रतिशत किसानों का बिजाई का कार्य रुका हुआ है। किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
विगत वर्ष जून माह में 70 एमएम बारिश हुई थी। इस बार जून माह में बारिश कम होने से किसान परेशान नजर आ रहे हैं। किसानों को बेसब्री से बारिश होने का इंतजार है।
 उल्लेखनीय है कि कनीना खंड के कुछ गांवों में अच्छी बारिश हुई है जिसके चलते किसानों ने खरीफ फसल बाजरे की बिजाई कर दी है।  कनीना खंड के अधिकांश किसान भी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। कनीना की बावनी भूमि अर्थात 52000 हेक्टेयर के रूप में जानी जाती है। यहां किसान बारिश के समय में खरीफ फसल की बिजाई करता है। किसान अजीत कुमार, महेंद्र कुमार, दिनेश कुमार ने बताया कि खड़ी फसल अनाज के लिए कम तथा फोडर के लिए अधिक उगाई जाती है। यही कारण है कि बेहतर बाजरे का बीज तथा खाद किसानों ने पहले से ही घरों में रखा हुआ है ताकि बारिश होते ही बिजाई की जा सके। अभी तक भीषण गर्मी पड़ रही है, तापमान 40 डिग्री के आस पास रहता है। पेड़ पौधे भी सूख चले हैं, कभी कभार इक्का-दुक्का बूंद आती है और बादल बिना बरसे गुजर जाते हैं। ऐसे में जब तक अच्छी बारिश नहीं होती किसान परेशान नजर आएंगे।
 किसानों द्वारा खेतों में उगाई गई मक्का,बाजर एवं कपास भीषण गर्मी के चलते सूखने के कगार पर पहुंच गई है। बेसब्री से किसान बारिश आने का इंतजार कर रहे हैं।  तापमान विगत वर्ष की तुलना में अधिक है जिससे फसल झुलस रही है।
 किसान राजेंद्र सिंह, सूबे सिंह, धर्मेंद्र आदि ने बताया कि क्षेत्र में कपास, पशुओं के चारे के रूप में उगाई जाने वाली बाजर, मक्का आदि उगा रखी है। किसान लगातार सिंचाई करें किंतु तापमान इतना अधिक होता है कि सिंचाई करने के बावजूद भी फसलें गर्मी के कारण झुलस गई है। किसान बेहद परेशान है। एक और जहां हरे चारे को देखकर नीलगाय आकर्षित हो रही है और खड़ी फसल को तबाह कर रही है वहीं गर्मी भी फसल को नष्ट करने पर आमादा है।
किसान सूबे सिंह, गजराज सिंह मोड़ी, राजेंद्र सिंह आदि ने बताया एक ओर जहां फसलों को नीलगाय जैसे आवारा जंतुओं से बचाना पड़ रहा है वहीं भीषण गर्मी से बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं किंतु सभी प्रयास असफल हो रहे हैं। विगत दिनों टिड्डी, ओलावृष्टि की मार झेली थी उस पर कोरोना के चलते भी परेशानी है। क्योंकि भीषण गर्मी के चलते फसल खेतों में जलने लगी है। किसान बेसब्री से बारिश आने का इंतजार कर रहे हैं। अगर बारिश हो जाती है तो उनकी फसल भी बचने की संभावना बढ़ जाती है।
कोरोना के 7 मामले आये सामने








संवाद सहयोगी, कनीना। कनीना क्षेत्र में कोरोना के केस बढ़ते ही जा रहे हैं। शुक्रवार को 7:00 के शुक्रवार को7 केस पोजिटिव पाये गये। अब तक कोरोना पीडि़तों की संख्या बढ़कर 61 हो गई है जिसमें से अधिकांश स्वस्थ होकर लौट आए। अब तक एक कोरोना पीडि़त की रोहतक में मौत हुई है। कोरोना से अब पहले जितना डर नहीं रहा है। कोरोना से लगातार ठीक हो रहे हैं इसलिए भी लोग इतने भयभीत नहीं है परंतु जागरूक अधिक होने से अब जांच बढ़ा दी है। खुद ही जांच करवा रहे हैं।
 मिली जानकारी अनुसार कनीना में तीन केस उप नागरिक अस्पताल से हैं जिनकी तैनाती पटिकरा कोविड-19 सेंटर पर लगी हुई थी और उनकी जांच करने पर भी पॉजिटिव पाए गए हैं। गुढ़ा में जहां एक व्यक्ति कोरोना पीडि़त पाया गया है जो पहले आये कोरोना पोजिटिव लोगों के साथ गुरुग्राम वैन में जाता रहा है। ऐसे में जब उसके साथी पोजिटिव मिलने से उन्होंने भी जांच करवाई और वो भी पोजिटिव पापया गया।
उधर भोजावास में पति पत्नी पॉजिटिव पाए गए हैं। यह दंपत्ति कर्नाटक से 6 जुलाई को लौटे थे। नेवी में सेवारत इस कर्मी ने 8 जुलाई को सैंपल दिया था जो आज पॉजिटिव पाया गया। सभी कोरोना पॉजिटिव को आइसोलेट कर दिया गया है तथा स्क्रीनिंग करा दी गई है। डॉक्टरों की टीम तथा जन स्वास्थ्य स्वास्थ्य कर्मचारियों ने मिलकर स्क्रीनिंग की आइसोलेट किया तथा सैनिटाइजर किया।
 मिली जानकारी अनुसार भोजावास में डॉक्टर दिनेश कुमार, सुपरवाइजर राज कुमार, प्रवीण कुमार, विनोद कुमार, पंकज कुमार, जयश्री, रेवती और पुष्पा ने मिलकर स्क्रीनिंग की जिसमें बफर जोन में 81 घर तथा कंटेनमेंट जोन में 13 घर शामिल किए गए हैं।
एसएमओ डा धर्मेंद्र का कहना है कि बचाव में ही बचाव है। जब को सर्दी/ जुकाम की शिकायत हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए और एहतियात के सभी कदम उठाने चाहिए।
 उधर अब कोरोना प्रारंभ हुआ तब डर अधिक था किंतु अब धीरे-धीरे लोग जागरूक हो गए हैं और उन्हें महसूस होने लगा है कि ज्यादा डरने की आवश्यकता नहीं। अधिकांश जन उनके सामने स्वस्थ होते देखे है जिससे लोगों में एक सकारात्मक प्रभाव पड़ा है कि कोरोना एक सामान्य बीमारी की तरह ही है जिसमें महज सावधानी जरूरी है।
अब लो जागरुक होकर सैंपल अधिक दे रहे हैं जबकि पहले सैंपल भी देने से हिचकिचा रहे थे।
फोटो कैप्शन 1: स्क्रीनिंग करते स्वास्थ्य अधिकारी व कर्मचारी।


 मलेरिया एवं डेंगू बचाव की जानकारी दी

**************************************
***************************************
कनीना।  कनीना क्षेत्र में कोरोना बचाव के साथ साथ विभिन्न लोगों को डेंगू से बचने संबंधित जानकारी दी गई।
 कनीना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की ओर से सुनील कुमार यादव शीशराम एचआई ने कनीना मंडी में जाकर लोगों को डेंगू के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि यह डेंगू फैलाने वाला मच्छर साफ पानी में मिलता है और दिन के समय ही काटता है। उन्होंने सुझाया कि घरों के आसपास पानी नहीं खड़ा होने पाएंंं। कूलर आदि का जहां पानी जमा होता है उसकी सप्ताह में एक बार सफाई की जाए या पानी पर तेल छिड़क देना चाहिए जिससे मच्छरों के लारवा खत्म हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि सुबह शाम मच्छर काटते हैं, ऐसे में बच्चों को पूरे कपड़े पहनाने चाहिए ताकि हाथ पर ढके होने पर मच्छर न काट सके। उन्होंने मच्छरों से बचने के लिए विभिन्न प्रकार के तेल और ओडोमास आदि लगाए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि मच्छरदानी मच्छरों से बचने का एक आसान सा तरीका है, इसलिए मच्छरदानी का उपयोग किया जाना चाहिए।
सुनील कुमार यादव ने कहा कि अक्सर लोगों में देखने में आया है कि डिस्प्रिन तथा एस्प्रीन नामक गोलियां बिना डॉक्टर की सलाह से ले लेते हैं जो कि ये दोनों गोलियां बुखार होने पर नहीं लेनी चाहिए। बुखार के समय डेंगू हो सकता है और डेंगू होने पर प्लेटलेट्स कम हो जाती है और यह दोनों गोलियां भी प्लेटलेट्स को कम करती है। ऐसे में
ऐसे में डिस्प्रिन और एस्प्रिन बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि खुले में सोने वालों के लिए मच्छरदानी प्रयोग करनी चाहिए। उन्होंने लोगों को डेंगू बुखार से होने वाले लक्षण और बचाव को लेकर जागरूक करते हुए कहा कि डेंगू बुखार हर साल अनेक लोगों को अस्पताल पहुंचाता है तो कइयों इससे मौत हो जाती है। अगर डेंगू बुखार होने से पहले सावधानी बरती जाए और समय रहते डाक्टरी सलाह ले तो इस पर काबू पाया जा सकता है। मादा एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने से मरीज डेंगू बुखार से ग्रस्त हो जाता है। जब मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है तो डेंगू फैलाने वाला वायरस मच्छर की लार के साथ शरीर में प्रवेश कर जाता है। डेंगू का बुखार एक प्रकार का वायरल इंफेक्शन है जो दो विशिष्ट प्रजाति के मच्छरों एडीज इजिप्ती और एडीज अल्बोपिक्टस से फैलता है। डेंगू के बुखार में प्राथमिक उपचार में  जरूरी सहायक मापदंडों पर ध्यान देना आवश्यक है और इसके साथ ही डेंगू के अधिक गंभीर लक्षणों को पहचानने पर जोर देना चाहिए जिससे तत्काल चिकित्सीय उपचार मिल सके। इसके शुरुआती लक्षण सामान्य बुखार से मिलते जुलते होते हैं।वही उन्होंने डेंगू फैलने के मुख्य कारण बताया। वही उन्होंने बताया कि डेंगू के सबसे ज़्यादा मामले बरसात के मौसम में देखने को मिलते है। डेंगू फैलाने वाले मच्छर दिन में काटते हैं और एक ही जगह ठहरे हुए पानी में पनपते हैं, जैसे – कूलर के पानी में, रुंधे हुए नालों में और आस-पास की नालियों में। ऐसी जगह पर सावधानी बरतनी चाहिए और दवाई का छिड़काव करते रहना चाहिए। डेंगू हमेशा कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों को आसानी से हो जाता है। डेंगू बुखार के लक्षण 3 से 14 दिन बाद दिखते हैं।इसमें सिर और आंखों में दर्द होने लगता है तथा शरीर और जोड़ों में दर्द होना शुरू हो जाता है वही जी मचलाना, उल्टी और दस्त आने शुरू हो जाते है। इससे बचाव को लेकर हमें इस बात को लेकर हमेशा सचेत रहना चाहिए कि अपने घर के अंदर और आस पड़ोस में पानी एक जगह जमा न होने दे। पानी से भरे बर्तनों को ढक कर रखें। किचन और वाशरूम को सूखा रखें। रोजाना सुबह-शाम कूलर का पानी बदलते रहें। खिड़कियों और दरवाजों में जाली लगवायें। मच्छर दानी का प्रयोग करें।जहां मच्छरों का प्रकोप ज्यादा है वहां शरीर पर मच्छर को भगाने वाली क्रीम लगाकर सोना चाहिए वही शरीर पूरी तरह से ढकने वाले कपड़े पहनें चाहिए।
फोटो केप्शन 6:कनीना के सुनील कुमार डेंगू एवं मलेरिया की जानकारी देते हुए।

Thursday, July 9, 2020




 मलेरिया एवं डेंगू बचाव की जानकारी दी
********************************
********************************
***************************
कनीना।  कनीना क्षेत्र में कोरोना बचाव के साथ साथ विभिन्न लोगों को डेंगू से बचने संबंधित जानकारी दी गई।
 कनीना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की ओर से सुनील कुमार यादव शीशराम एचआई ने कनीना मंडी में जाकर लोगों को डेंगू के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि यह डेंगू फैलाने वाला मच्छर साफ पानी में मिलता है और दिन के समय ही काटता है। उन्होंने सुझाया कि घरों के आसपास पानी नहीं खड़ा होने पाएंंं। कूलर आदि का जहां पानी जमा होता है उसकी सप्ताह में एक बार सफाई की जाए या पानी पर तेल छिड़क देना चाहिए जिससे मच्छरों के लारवा खत्म हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि सुबह शाम मच्छर काटते हैं, ऐसे में बच्चों को पूरे कपड़े पहनाने चाहिए ताकि हाथ पर ढके होने पर मच्छर न काट सके। उन्होंने मच्छरों से बचने के लिए विभिन्न प्रकार के तेल और ओडोमास आदि लगाए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि मच्छरदानी मच्छरों से बचने का एक आसान सा तरीका है, इसलिए मच्छरदानी का उपयोग किया जाना चाहिए।
सुनील कुमार यादव ने कहा कि अक्सर लोगों में देखने में आया है कि डिस्प्रिन तथा एस्प्रीन नामक गोलियां बिना डॉक्टर की सलाह से ले लेते हैं जो कि ये दोनों गोलियां बुखार होने पर नहीं लेनी चाहिए। बुखार के समय डेंगू हो सकता है और डेंगू होने पर प्लेटलेट्स कम हो जाती है और यह दोनों गोलियां भी प्लेटलेट्स को कम करती है। ऐसे में
ऐसे में डिस्प्रिन और एस्प्रिन बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि खुले में सोने वालों के लिए मच्छरदानी प्रयोग करनी चाहिए। उन्होंने लोगों को डेंगू बुखार से होने वाले लक्षण और बचाव को लेकर जागरूक करते हुए कहा कि डेंगू बुखार हर साल अनेक लोगों को अस्पताल पहुंचाता है तो कइयों इससे मौत हो जाती है। अगर डेंगू बुखार होने से पहले सावधानी बरती जाए और समय रहते डाक्टरी सलाह ले तो इस पर काबू पाया जा सकता है। मादा एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने से मरीज डेंगू बुखार से ग्रस्त हो जाता है। जब मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है तो डेंगू फैलाने वाला वायरस मच्छर की लार के साथ शरीर में प्रवेश कर जाता है। डेंगू का बुखार एक प्रकार का वायरल इंफेक्शन है जो दो विशिष्ट प्रजाति के मच्छरों एडीज इजिप्ती और एडीज अल्बोपिक्टस से फैलता है। डेंगू के बुखार में प्राथमिक उपचार में  जरूरी सहायक मापदंडों पर ध्यान देना आवश्यक है और इसके साथ ही डेंगू के अधिक गंभीर लक्षणों को पहचानने पर जोर देना चाहिए जिससे तत्काल चिकित्सीय उपचार मिल सके। इसके शुरुआती लक्षण सामान्य बुखार से मिलते जुलते होते हैं।वही उन्होंने डेंगू फैलने के मुख्य कारण बताया। वही उन्होंने बताया कि डेंगू के सबसे ज़्यादा मामले बरसात के मौसम में देखने को मिलते है। डेंगू फैलाने वाले मच्छर दिन में काटते हैं और एक ही जगह ठहरे हुए पानी में पनपते हैं, जैसे – कूलर के पानी में, रुंधे हुए नालों में और आस-पास की नालियों में। ऐसी जगह पर सावधानी बरतनी चाहिए और दवाई का छिड़काव करते रहना चाहिए। डेंगू हमेशा कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों को आसानी से हो जाता है। डेंगू बुखार के लक्षण 3 से 14 दिन बाद दिखते हैं।इसमें सिर और आंखों में दर्द होने लगता है तथा शरीर और जोड़ों में दर्द होना शुरू हो जाता है वही जी मचलाना, उल्टी और दस्त आने शुरू हो जाते है। इससे बचाव को लेकर हमें इस बात को लेकर हमेशा सचेत रहना चाहिए कि अपने घर के अंदर और आस पड़ोस में पानी एक जगह जमा न होने दे। पानी से भरे बर्तनों को ढक कर रखें। किचन और वाशरूम को सूखा रखें। रोजाना सुबह-शाम कूलर का पानी बदलते रहें। खिड़कियों और दरवाजों में जाली लगवायें। मच्छर दानी का प्रयोग करें।जहां मच्छरों का प्रकोप ज्यादा है वहां शरीर पर मच्छर को भगाने वाली क्रीम लगाकर सोना चाहिए वही शरीर पूरी तरह से ढकने वाले कपड़े पहनें चाहिए।
फोटो केप्शन 6:कनीना के सुनील कुमार डेंगू एवं मलेरिया की जानकारी देते हुए।


कोरोना का एक और केस कनीना में आया
-कुल कोरोना के केस बढ़कर 54 हुए 

*********************************
*********************************
 कनीना। कनीना क्षेत्र में एक और कोरोना पॉजिटिव केस आने से अब कोरोना पोजिटिव केस संख्या बढ़कर 54 हो गई है। उल्लेखनीय है कि कनीना मंडी में लगातार कोरोना पॉजिटिव केस बढ़ रह हैं। इसी कड़ी में एक मजदूर भी आज कोरोनावायरस स्वास्थ्य विभाग ने स्क्रीनिंग तथा आइसोलेशन का कार्य पूर्ण कर आगामी कार्रवाई कर दी है।
मजदूर बिहार का रहने वाला है तथा 5 जुलाई को बिहार से कनीना आया था जिन्होंने 6 जुलाई को सैंपल दिया जो गुरुवार को कोरोना पाजिटिव पाया गया है। दो टीमों ने मिलकर स्क्रीनिंग की। डॉक्टर मोनिका के साथ शीशराम एचआई सुपरवाइजर, राजेश कुमार एमपीएचडब्ल्यू ,सुनील कुमार एमपीएचडब्ल्यू, सुनीता तथा आशा वर्कर ने तथा टीम नंबर दो में सुशीला एएनएम, रिंकू तथा आशा वर्कर ने कनीना मंडी में कंटेनमेंट जोन में एक घर और 7 व्यक्ति तथा बफर जोन में 21 घर और 94 व्यक्तियों की स्क्रीनिंग की।
 डॉक्टर धर्मेंद्र एसएमओ ने बताया कि सावधानी इस रोग से बचने का सबसे बेहतर तरीका है। अगर सावधानी नहीं बरती गई तो निश्चित रूप से रोग फैल सकता है। उन्होंने बचाव में बचाव बताया। उल्लेखनीय है कि कनीना मंडी में एक ही परिवार के 10 वक्ति कोरोना पॉजिटिव आ चुके हैं वहीं कनीना मंडी में कोरोना पॉजिटिव पहले भी आए हैं।
 फोटो कैप्शन 3: स्क्रीनिंग करतेे हुए स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी।


कोरोना योद्धा सम्मानित

**********************************
कनीना। सामाजिक संस्था बीइंग ह्यूमन सेवा मंडल ने पुलिस किर्मयों को सम्मानित किया। विस्तृत जानकारी देते हुए नवीन कौशिक ने बताया कि कोरोना काल में लोगों की नि:स्वार्थ सेवा करने व प्रशासनिक अधिकारियों के सहयोग करने के मामले में उनकी संस्था प्रशासनिक अधिकारियों, स्वास्थ्य विभाग व सफाई कर्मियों प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित कर रही है। इसी कड़ी में गांव पड़तल में ड्यूटी दे रहे पुलिसकर्मियों में होमगार्ड विकास व अन्य कर्मियों को सम्मानित किया।  श्री कौशिक ने बताया कि हम लगातार अपने कार्य जैसे भोजन व्यवस्था, दवाई वितरण व सेनेटाइजर का कार्य पूर्ण करते हुए अब सभी कर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जा रहा है। उसी तरह संस्था अध्यक्ष नवीन कौशिक ने बताया कि इस महामारी के समय में तीन विभाग पुलिसकर्मियों, स्वास्थ्य विभाग, व सफाई कर्मियों ने जो सेवा की है और लोगों की सुरक्षा व्यवस्था को बनाये रखा है। उसके लिए  उन्हें सम्मानित कर धन्यवाद करते हैं।  इसी कड़ी में 15 जुलाई से अपने अभियान  पेड़ लगाओ पर्यावरण बचाओ की शुरुआत कर रहे हैं जिसमे सरकार के पौधगिरी व जल शक्ति अभियान को साथ लेकर लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का कार्य भी शुरू हो रहा है। इस अवसर पर विकाश,राकेश, योगेश व संस्था के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 4: पुलिस कर्मियों को सम्मानित करती बीइंग संस्था।


दस लाख रुपये का चैक भेंट किया

*******************************
********************************
संवाद सहयोगी,कनीना।
बिजली विभाग के अधिकारियों ने विगतदिनों कनीन में करंट से मरे व्यक्ति के परिजनों को दस लाख रुपये का चैक भेंट किया।
 उल्लेखनीय है कि डीसी रेट पर कार्यरत प्रदीप नामक युवक बिजली के तारों में काम कर रहा था जिसकी 3 जुलाई को अचानक करंट आने से मौत हो गई थी। बिजली का करंट लगने से दुर्घटना में मरणोपरांत बिजली विभाग की तरफ से 10 लाख का चैक मुआवजे के तौर परिजनों को सौंपा। कृष्ण मैनेजर, कंवर सिंह नम्बरदार जोगिन्द्र को चैक  भेंट किया गया। इस अवसर पर कार्यकारी अभियंता बुधराम व प्रदेश मुख्य संघठन कर्ता महावीर पहलवान बाघोत व हैडक्लर्क समशेर यादव सतवीर यादव ऑर्गनाजर, यूनिट प्रधान सत्यवान यादव व सचिव अमरजीत व टीसी सर्कल सचिव रामरतन शर्मा के अतिरिक्त सब यूनिट प्रधान रमेश शर्मा सचिव हवासिंह यादव, बलबीर खटाना सन्दीप कैशियर, रिछपाल, नवीन लखेरा, राजेश पोता, रामकिशन, सतीश नौताना, सतीश झगडोली अशोक आदि सभी कर्मचारी साथी मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 5: दस लाख का चैक भेंट करते बिजली विभाग के अधिकारी।


आराधना से शिवत्व को प्राप्त करें
*******************

रिमझिम बारिश, सावन का महीना, पेड़ों पर तरुणाई, मयूर नृत्य, टिड्डे एवं मेंढक के स्वर पूर्र्ण गीत, बजता हुआ मधुर संगीत मदमाता सावन का द्योतक होता है। मदमाता सावन माह शरीर में आध्यात्मिकता ऊर्जा तथा ज्ञान का संचार कर देता है। सोए हुए जीव जंतु को जागृत कर देता है।  वास्तव में संस्कृति सभ्यता का द्योतक यह माह नवजागरण का संदेश देने वाला होता है। जहां इस माह में सभी सक्रिय हो जाते हैं, गर्मी की मार झेल झेल कर जीव सुषुप्त जैसी अवस्था में होते हैं और रिमझिम बारिश में फिर से प्रफुल्लित हो जाते हैं। चारों और हरियाली, दौड़ते हुए बादल, गरजती हुई बिजली, उड़ते हुए पतंग, बने हुए घरों में विभिन्न पकवान इंसान को जागृत कर देते हैं। यह माह भगवान भोलेनाथ को याद करने का होता है। पर्व त्योहारों से भरा हुआ यह माह वास्तव में प्रकृति में सबसे सुंदर होता है। इस समय इंसान ऊर्जावान हो जाता है परंतु इंसान को इस माह में शिव भोले को याद करते, आराधना करते रहना चाहिए।
पुराने समय में भी लोग इस माह में आराधना में जुटे रहते थे। वर्तमान में जब कोरोना से जूझ रहे इस समय भी शिव की आराधना बहुत जरूरी हो गई है। चारों ओर शिवालयों में शिव भजन गूंजते हैंं वहां शिव को पूजना चाहिए। वास्तव में कांवड़ यात्रा भी चलती है लेकिन इस बार कावड़ को थोड़ा कोरोना ग्रहण लग गया है किंतु इंसान को घर में बैठकर पूजा-अर्चना करनी चाहिए और मन की अंतरात्मा को जगाना चाहिए तब ही इंसान शिवत्व को प्राप्त कर सकता है। प्रकृति का सौंदर्य भाव जगाने वाला यह माह झरनों में दिव्य नाद सुनाने वाला होता है वहीं यह माह नन्हें-नन्हें बीजों को अंकुरित करने वाला होता है। यह माह मद्भावन करने वाला होता है। यही कारण है कि उस प्रभु शिव भोले की याद आती है और उस शिव भोले के शिवत्व को प्राप्त करने के लिए इंसान जागृत होकर कार्य करता है।
 प्रदीप शास्त्री कनीना।

कोरोना अनलोक, अतिक्रमण से सड़के लोक

***************************************
कनीना। कनीना में जहां कोरोना अनलॉक होते ही सड़के से लाक हो गई हैं। अतिक्रमण पूरे यौवन पर है। जहां बस स्टैंड पर दुकानों के सामने रेहड़ी वाले रेहड़ी लगाकर, साइन बोर्ड, निजी वाहन दुकानों के आगे खड़ा कर आवागमन प्रभावित कर रहे हैं वहीं रेहड़ी वालों से कुछ दुकानदार प्रतिदिन राशि लेने की एवज में दुकानों के आगे रेहड़ी खड़ी करने दे रहे हैं।  यही कारण है कि दुकानों के आगे रेहडिय़ां खड़ी अतिक्रमण का कारण बन रही है।  अनाज मंडी टी-प्वाइंट से रेलवे स्टेशन, अटेली टी-प्वाइंट से रेवाड़ी टी-प्वाइंट तक, बाबा मोलड़ आश्रम या वर्तमान में निर्माणाधीन नगर पालिका कार्यालय के आस पास अतिक्रमण का बोलबाला है।  अनाज मंडी मार्ग पर तो अतिक्रमण इस कदर है कि दो वाहन साइड नहीं ले पा सकते हैं। मुख्य मार्ग से गुजर पानी भी कठिन है।
सड़क किनारे जहां अवैध होर्डिंंग लगा दिए गए हैं वहीं पेड़ों, पोल, बिजली के खंभों पर पोस्टर बैनर आदि की भरमार है।  आए दिन अतिक्रमण के चलते दुर्घटनाएं, गाली गलौच, मार पिटाई होती रहती है किंतु सभी परेशान इस नजारे को देख रहे हैं।
 सुरेश यादव का कहना है कि अतिक्रमण इस कद्र सिर चढ़ बोल रहा है कि निजी वाहन से सड़क पार करना कठिन हो गया है। दुकानों के आगे रेहडियां, साइन बोर्ड, निजी वाहन भारी संख्या में खड़े रहते हैं। यदि उनसे कोई छू जाए तो उस व्यक्ति की खैर नहीं है। यही कारण है कि आए दिन यह समस्या दुर्घटनाओं का कारण बन रही है। उन्होंने अतिक्रमण एक बड़ी परेशानी करार दिया है।
 महेंद्र कुमार का कहना है कि अतिक्रमण के चलते जीना मुहाल हो गया है। किसी भी सड़क मार्ग पर देखें अतिक्रमण का बोलबाला है। दुकानदार जितनी जगह दुकानों के अंदर रखते हैं उनसे कहीं अधिक जगह दुकान के बाहर रोके बैठे हैं जिसके चलते दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं।
 सतीश कुमार पालिका प्रधान नगर पालिका का कहना है कि अतिक्रमण की समस्या उनके सामने आ रही है। कई बार अतिक्रमण हटवा दिया है किंतु जल्द ही पुन: अतिक्रमण हटाया जाएगा।


लाखों रुपए जन सुविधा लगा कर भी नहीं मिल रही सुविधा 

******************************
 कनीना। कनीना के पूर्व एसडीएम संदीप सिंह द्वारा कनीना में जहां ई- टॉयलेट, फ्रेंडली टॉयलेट, इको फ्रेंडली टॉयलेट आदि कई नामों से जन सुविधाएं स्थापित करने के लिए प्रयास किया किंतु पशु अस्पताल, अस्पताल, खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी कार्यालय, थाना परिसर में स्थित लाखों रुपए की लगाई गई जन सुविधा लोगों के लिए दुविधा बन रही है। ये काम नहीं कर रही है। इससे पहले पशु अस्पताल के द्वार के पास जहां जन सुविधा बनी हुई थी वहीं पशुओं के पीने के लिए पानी की सुविधा भी थी। वे दोनों हटाकर जहां आधुनिक ई-टायलेट स्थापित की गई है जो पानी के अभाव में कार्य नहीं कर रही है। करीब दो सालों से बेकार पड़ी है। पूर्णता स्वचालित जनसुविधा जहां अनेकों विशेषताओं से परिपूर्ण थी किंतु अब अनेकों खामियों से परिपूर्ण बन गई है।  प्रत्येक की कीमत छह लाख रुपये बताई जा रही है। दुकानदार नगरपालिका को भारी-भरकम किराया देते हैं किंतु उनके लिए जनसेवा के नाम पर इस प्रकार की दुविधा मिल रही है।
 कनीना मंडी टी-प्वाइंट से अनाज मंडी को जाते समय पशु अस्पताल के पास ई-टायलेेट स्थापित की गई थी। तब यह माना जा रहा था कि लोगों को बड़ी सुविधा मिलेगी। पुराने वक्त की जनसुविधा को तोड़ दिया गया था वही पशुओं के लिए पानी के लिए खेल बनाई गई थी वह भी हटा दी गई थी। यह पूर्ण स्वचालित टॉयलेट इंसान के प्रवेश करने पर अपने आप बंद हो जाती थी और दूसरा व्यक्ति उसमें प्रवेश नहीं कर सकता था। इंसान जब इसका उपयोग कर लेता था पानी अपने आप चलता था किंतु वर्तमान में बेकार पड़ी है।        डा अजीत कुमार का कहना है कि कभी यहां पुराने समय की जनसुविधा थी जो लोगों के काम आ रही थी। उसको तोड़कर यह आधुनिक दर्जे की जनसुविधा बना तो दी किंतु दो सालों से काम ही नहीं कर रही जिसके चलते लोग इधर-उधर पेशाब करने को मजबूर है। महिलाएं तो बहुत परेशान है । कनीना मंडी टी प्वाइंट से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक अन्य कोई इस सड़क मार्ग पर जनसुविधा नहीं है। जन सुविधा के नाम पर दुविधा मिल रही है।
उधर सुरेंद्र कुमार दुकानदार का कहना है कि जन सुविधा के नाम पर परेशानी मिल रही है। लघु शंका के लिए भी उन्हें बहुत दूर जाना पड़ता है। जहां दुकान का काम छोड़कर दूर जाने से दुकानदारी भी खराब हो जाती है। वे नगरपालिका को किराया दे रहे हैं उसके बदले उन्हें इस प्रकार की घटिया दर्जे की जनसुविधा दी जा रही जो काम ही नहीं कर रही है। उन्होंने नगर पालिका से मांग की है कि इसे तुरंत चालू करवाया जाए ताकि लोगों को सुविधा प्राप्त हो सके।
 सुदेश यादव जो दुकानदारी करती है का कहना है कि पुरुष तो इधर-उधर लघु शंका के लिए जा सकते हैं किंतु महिलाएं कहां जाए? उनका कहना है कि पुराने समय में जो जन सुविधा थी वह कम से कम काम तो आ रही थी किंतु उसके बदले सरकार ने भारी पैसे भी लगा दिए और यह जन सुविधा काम भी नहीं कर रही है। ऐसे में उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस प्रकार की सुविधा तो दी उसे उसे चालू किया जाए। यदि कोई खराबी है तो उसे ठीक करवाया जाए। अगर पानी की सुविधा इसमें अभी तक नहीं हो पाई है तो पानी सुविधा प्रदान कर लोगों को जन सुविधा प्रदान की जाए।
नगर पालिका प्रधान सतीश जेलदार से इस संबंध में बात की तो उन्होंने कहा कि इस संबंध में बार बार उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है किंतु अभी तक उनके पास पूरी जानकारी नहीं है। या तो इनको किसी प्रकार ठीक करवाया जाएगा या फिर नया टायलेट बनवा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जब कनीना नगरपालिका के प्रशासक होते थे तब ये टायलेट खरीद कर सेट किये गए थे।
 फोटो कैप्शन 1: ई टॉयलेट जो बंद पड़ी है
 साथ में अजीत कुमार, सुदेश कुमारी, सुरेंद्र यादव , सतीश जेलदार की फोटो भी है


घर के दरवाजे को ब्लैक बोर्ड मानकर पढ़ाती है छोटे बच्चों कों













*********************************
कनीना। बेशक संसाधनों की कमी की कोई दुहाई देता रहे किंतु सीमित साधनों में भी हिम्मत हो तो कुछ नया कर गुजर सकते हैं। कनीना उपमंडल के गांव झाड़ली की कक्षा 9वीं की छात्रा प्रीति आजकल अपने घर के दरवाजे पर छोटे बच्चों को शिक्षित कर रही है। छात्रा के पिता महेन्द्र शर्मा ने बताया कि उसकी बेटी प्रीति सूरज स्कूल में कक्षा 9वीं की छात्रा है। उसका लक्ष्य एक आईएएस अधिकारी बनने का है। उनके जुनून के चलते एसडीएम कनीना ने उन्हें सम्मानित किया है।
प्रीति अपनी पढ़ाई के साथ-साथ आस-पास के बच्चों को भी शिक्षा दे रही है।अपने घर के आस-पास रहने वाले छोटे बच्चों को भी नि:शुल्क में पढ़ा रही है। जिसके लिए प्रीति ने अपनी दिनचर्या को एक शड्यूल के माध्यम से ढाला हुआ है। जिसके अनुसार वह प्रतिदिन कार्य कर अपने लक्ष्य की तरफ बढऩे का कार्य कर रही है।
झाड़ली निवासी कक्षा 9वीं की छात्रा प्रीति के द्वारा घर में ब्लेक बोर्ड न होने की स्थिति में अपने घर के दरवाजे को ही बोर्ड बनाया हुआ है। जिसके माध्यम से वह घर में पढऩे आने वाले बच्चों को पढ़ाई करवा रही है। उसके पास आस-पास के घरों के करीब 20 बच्चें पढ़ाई के लिए आते है।
प्रीति के पिता महेन्द्र शर्मा ने बताया कि उसकी बेटी प्रीति प्रतिदिन सुबह 4 बजे उठकर व्यायाम आदि कर 5 बजे अपनी पढ़ाई शुरू कर देती है। सुबह 5 से 7 बजे तक पढ़ाई करने के बाद आधा घंटे का आराम कर 7:30 बजे से करीब 9:30 बजे तक बच्चों को पढ़ाई है। उसके बाद दोपहर एक बजे तक अपने स्कूल की ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से अपनी पढ़ाई करती है। उसके बाद दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक आराम करती है। उसके बाद 4 बजे से 5:30 बजे तक बच्चों को पढ़ाती है। उसके बाद शाम करीब 8 बजे से 10:30 बजे तक अपनी पढ़ाई करती है। अब तो उसके पिता ने ब्लैक बोर्ड भी लाकर दे दिया है। उल्लेखनीय है कि हरियाणवी कवि महेंद्र शर्मा के महज दो पुत्रियां हैं। वे पुत्रियों को ही पुत्र मानकर उनकी पढ़ाई का कम करवा रहे हैं। उनकी दूसरी पुत्री सातवीं कक्षा की छात्रा है।
फोटो कैप्शन 2 व 3: बच्चों को पढ़ाती छात्रा प्रीति

Wednesday, July 8, 2020


बोर्ड की परीक्षा लागू किये जाने पर खुशी

********************************
********************************
**************************************
 कनीना। हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश में आठवीं की बोर्ड की परीक्षा लागू किये जाने पर शिक्षा से जुड़े लोगों में खुशी का माहौल है। जिसमें सरकार ने कहा है कि यदि वर्तमान शैक्षणिक स्तर से आठवीं की बोर्ड परीक्षा संभव नहीं हो पाई तो अगले स्तर से प्रभावी तौर पर इसे लागू कर दिया जाएगा। जहां बोर्ड की परीक्षा के अनुसार हरियाणा में निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2011 में बदलाव कर बोर्ड परीक्षा शुरू की जाएगी। यदि शैक्षणिक स्तर के अंत में विद्यार्थी न्यूनतम पास अंक प्राप्त नहीं करता तो पास होने के लिए दो और अवसर प्रदान किए जाएंगे। न्यूनतम अंक प्राप्त न करने पर उनके लिए अलग से प्रशिक्षण दिया जाएगा।  अनुत्तीर्ण विषय में अनुपूरक परीक्षा का मौका दिया जाएगा।
 अध्यापक नेता धर्मपाल शर्मा, निर्मल शास्त्री, कंवरसेन वशिष्ठ ने इस निर्णय को समाज के हित में बताया है। अभी तक विद्यार्थियों में किसी प्रकार का कोई भय का माहौल नहीं था। इसके चलते पढ़ाई सही ढंग से नहीं हो पा रही थी। बोर्ड की परीक्षा लागू हो जाएगी तो विद्यार्थी थोड़ा बहुत ध्यान परीक्षा की ओर दे पाएंगे।
 उल्लेखनीय है कि अध्यापक नेता लंबे समय से पांचवी और आठवीं की बोर्ड की परीक्षा करवाने के लिए सरकार पर दबाव बना रहे थे। उन्होंने कहा कि अब सरकार ने बोर्ड की परीक्षा शुरू कर देने से समाज में एक अच्छा संदेश भी जाएगा और विद्यार्थी जब तक अगली कक्षा लायक नहीं होंगे तब तक उन्हें पढऩा ही पड़ेगा।

क्षेत्र में हुई हल्की बूंदाबांदी 

**********************************
************************************
कनीना। कनीना लंबे अरसे से गर्मी सहन करने के पश्चात बुधवार शाम को बूंदाबांदी हुई। बूंदाबांदी लंबे समय तक चली। अच्छी बारिश का किसानों को इंतजार है। अभी तक उनकी आशा पूरी नहीं हो पाई है। बूंदाबांदी से ही काम चल रहा है। बाजरे की 19000 हेक्टेयर पर बीजाई की जानी है। कृषि विभाग 30 से 40 फीसदी बीजाई बाकी बता रहा है। यह बूंदाबांदी फसल के लिए लाभप्रद मानी जा रही है।

घर के दरवाजे को ब्लैक बोर्ड मानकर पढ़ाती है छोटे बच्चों कों

***********************************
********************************
कनीना। बेशक संसाधनों की कमी की कोई दुहाई देता रहे किंतु सीमित साधनों में भी हिम्मत हो तो कुछ नया कर गुजर सकते हैं। कनीना उपमंडल के गांव झाड़ली की कक्षा 9वीं की छात्रा प्रीति आजकल अपने घर के दरवाजे पर छोटे बच्चों को शिक्षित कर रही है। छात्रा के पिता महेन्द्र शर्मा ने बताया कि उसकी बेटी प्रीति सूरज स्कूल में कक्षा 9वीं की छात्रा है। उसका लक्ष्य एक आईएएस अधिकारी बनने का है। उनके जुनून के चलते एसडीएम कनीना ने उन्हें सम्मानित किया है।
प्रीति अपनी पढ़ाई के साथ-साथ आस-पास के बच्चों को भी शिक्षा दे रही है।अपने घर के आस-पास रहने वाले छोटे बच्चों को भी नि:शुल्क में पढ़ा रही है। जिसके लिए प्रीति ने अपनी दिनचर्या को एक शड्यूल के माध्यम से ढाला हुआ है। जिसके अनुसार वह प्रतिदिन कार्य कर अपने लक्ष्य की तरफ बढऩे का कार्य कर रही है।
झाड़ली निवासी कक्षा 9वीं की छात्रा प्रीति के द्वारा घर में ब्लेक बोर्ड न होने की स्थिति में अपने घर के दरवाजे को ही बोर्ड बनाया हुआ है। जिसके माध्यम से वह घर में पढऩे आने वाले बच्चों को पढ़ाई करवा रही है। उसके पास आस-पास के घरों के करीब 20 बच्चें पढ़ाई के लिए आते है।
प्रीति के पिता महेन्द्र शर्मा ने बताया कि उसकी बेटी प्रीति प्रतिदिन सुबह 4 बजे उठकर व्यायाम आदि कर 5 बजे अपनी पढ़ाई शुरू कर देती है। सुबह 5 से 7 बजे तक पढ़ाई करने के बाद आधा घंटे का आराम कर 7:30 बजे से करीब 9:30 बजे तक बच्चों को पढ़ाई है। उसके बाद दोपहर एक बजे तक अपने स्कूल की ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से अपनी पढ़ाई करती है। उसके बाद दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक आराम करती है। उसके बाद 4 बजे से 5:30 बजे तक बच्चों को पढ़ाती है। उसके बाद शाम करीब 8 बजे से 10:30 बजे तक अपनी पढ़ाई करती है। अब तो उसके पिता ने ब्लैक बोर्ड भी लाकर दे दिया है। उल्लेखनीय है कि हरियाणवी कवि महेंद्र शर्मा के महज दो पुत्रियां हैं। वे पुत्रियों को ही पुत्र मानकर उनकी पढ़ाई का कम करवा रहे हैं। उनकी दूसरी पुत्री सातवीं कक्षा की छात्रा है।
फोटो कैप्शन 3 व 4: बच्चों को पढ़ाती छात्रा प्रीति

एक ही दिन में आये 8 कोरोना पॉजिटिव केस

**************************************
************************************ 
 कनीना। कनीना क्षेत्र में एक ही दिन में आठ कोरोना पॉजिटिव केस आए हैं। कनीना क्षेत्र में कोरोना पॉजिटिव के मसले 53 पहुंच चुके। अधिकांश वापिस ठीक हो कर वापस आ गए हैं। एक कोरोना पॉजिटिव की मौत हो चुकी है।
 कनीना मंडी में एक ही परिवार के 8 कोरोना  पॉजिटिव केस आये हैं। इसी परिवार में जहां पहले भी 4 केस पॉजिटिव आ चुके हैं। इस परिवार में जहां पहले एक कोरोना केस आया उसको घर पर क्वारंटाइन काट दिया गया था। तत्पश्चात 2 जुलाई को तीन व्यक्ति और पॉजिटिव आये जिन्हें भी क्वॉरेंटाइन कर दिया गया था। तत्पश्चात यह तीसरी बार कोरोना सैंपल लिया गया था। 5 जुलाई को लिए गए सैंपल में 6 कोरोना पॉजिटिव आये है। सभी को एक ही घर में क्वारंटाइन किया हुआ है मिली जानकारी अनुसार घर में क्वारेंटाइन कर दिया है। जहां करीब दो दर्जन सदस्य हैं।  बुधवार को आये कोरोना पॉजिटिव केस में दो बच्चे भी शामिल हैं जिनकी उम्र दस साल से कम है।
उधर गुढा गांव में दो कोरोना पाजिटिव पाये गये हैं। गुढ़ा में एक युवक गुरुग्राम में कंपनी में नौकरी करता है ैिजनकी पत्नी भी कोरोना पाजिटिव पाई गई है। इनको पटिकरा रेफर कर दिया गया है।
 कनीना स्वास्थ्य विभाग ने समस्त आगामी कार्रवाई भी कर दी है मिली जानकारी अनुसार गुढ़ा में डॉक्टर। विनय के साथ शीशराम एचआई, संदीप, संजोग और राजेश की टीम ने स्क्रीनिंग की ओर लोगों को कोरोना पीडि़तों को क्वॉरेंटाइन किया वहीं कनीना में डॉक्टर जितेंद्र मोरवाल की अध्यक्षता में शीशराम एचआई, राजेश, सुशीला और आशा वर्कर ने मिलकर स्क्रीनिंग की और उन्हें क्वारंटाइन कर दिया गया है। अधिकांश केस ठीक होकर बकरा से वापिस आ चुके हैं लेकिन एक कोरोना पॉजिटिव की कनीना में विगत दिनों मौत हो चुकी है।
डा धर्मेंद्र एसएमओ का कहना है कि बचाव में ही बचाव है। मास्क का प्रयोग करें, हाथों को नियमित रूप से सैनिटाइज करें तथा किसी प्रकार बुखार खांसी के लक्षण नजर आए तो डॉक्टर से सलाह करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी प्रकार की कोई समस्या हो तो डाक्टर से मिल सकते हैं। सरकारी अस्पताल में टेस्ट मुफ्त हो रहा है।
 फोटो कैप्शन 2: स्क्रीनिंग करती स्वास्थ विभाग के कर्मचारी एवं अधिकारी।
 


कोरोना अनलोक,  अतिक्रमण से सड़के लोक
**********************************
**************************************
 कनीना। कनीना में जहां कोरोना अनलॉक होते ही सड़के से लाक हो गई हैं। अतिक्रमण पूरे यौवन पर है। जहां बस स्टैंड पर दुकानों के सामने रेहड़ी वाले रेहड़ी लगाकर, साइन बोर्ड, निजी वाहन दुकानों के आगे खड़ा कर आवागमन प्रभावित कर रहे हैं वहीं रेहड़ी वालों से कुछ दुकानदार प्रतिदिन राशि लेने की एवज में दुकानों के आगे रेहड़ी खड़ी करने दे रहे हैं।  यही कारण है कि दुकानों के आगे रेहडिय़ां खड़ी अतिक्रमण का कारण बन रही है।  अनाज मंडी टी-प्वाइंट से रेलवे स्टेशन, अटेली टी-प्वाइंट से रेवाड़ी टी-प्वाइंट तक, बाबा मोलड़ आश्रम या वर्तमान में निर्माणाधीन नगर पालिका कार्यालय के आस पास अतिक्रमण का बोलबाला है।  अनाज मंडी मार्ग पर तो अतिक्रमण इस कदर है कि दो वाहन साइड नहीं ले पा सकते हैं। मुख्य मार्ग से गुजर पानी भी कठिन है।
सड़क किनारे जहां अवैध होर्डिंंग लगा दिए गए हैं वहीं पेड़ों, पोल, बिजली के खंभों पर पोस्टर बैनर आदि की भरमार है।  आए दिन अतिक्रमण के चलते दुर्घटनाएं, गाली गलौच, मार पिटाई होती रहती है किंतु सभी परेशान इस नजारे को देख रहे हैं।
 सुरेश यादव का कहना है कि अतिक्रमण इस कद्र सिर चढ़ बोल रहा है कि निजी वाहन से सड़क पार करना कठिन हो गया है। दुकानों के आगे रेहडियां, साइन बोर्ड, निजी वाहन भारी संख्या में खड़े रहते हैं। यदि उनसे कोई छू जाए तो उस व्यक्ति की खैर नहीं है। यही कारण है कि आए दिन यह समस्या दुर्घटनाओं का कारण बन रही है। उन्होंने अतिक्रमण एक बड़ी परेशानी करार दिया है।
 महेंद्र कुमार का कहना है कि अतिक्रमण के चलते जीना मुहाल हो गया है। किसी भी सड़क मार्ग पर देखें अतिक्रमण का बोलबाला है। दुकानदार जितनी जगह दुकानों के अंदर रखते हैं उनसे कहीं अधिक जगह दुकान के बाहर रोके बैठे हैं जिसके चलते दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं।
 सतीश कुमार पालिका प्रधान नगर पालिका का कहना है कि अतिक्रमण की समस्या उनके सामने आ रही है। कई बार अतिक्रमण हटवा दिया है किंतु जल्द ही पुन: अतिक्रमण हटाया जाएगा।


लाखों रुपए जन सुविधा लगा कर भी नहीं मिल रही सुविधा 

*********************************






***********************************
कनीना। कनीना के पूर्व एसडीएम संदीप सिंह द्वारा कनीना में जहां ई- टॉयलेट, फ्रेंडली टॉयलेट, इको फ्रेंडली टॉयलेट आदि कई नामों से जन सुविधाएं स्थापित करने के लिए प्रयास किया किंतु पशु अस्पताल, अस्पताल, खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी कार्यालय, थाना परिसर में स्थित लाखों रुपए की लगाई गई जन सुविधा लोगों के लिए दुविधा बन रही है। ये काम नहीं कर रही है। इससे पहले पशु अस्पताल के द्वार के पास जहां जन सुविधा बनी हुई थी वहीं पशुओं के पीने के लिए पानी की सुविधा भी थी। वे दोनों हटाकर जहां आधुनिक ई-टायलेट स्थापित की गई है जो पानी के अभाव में कार्य नहीं कर रही है। करीब दो सालों से बेकार पड़ी है। पूर्णता स्वचालित जनसुविधा जहां अनेकों विशेषताओं से परिपूर्ण थी किंतु अब अनेकों खामियों से परिपूर्ण बन गई है।  प्रत्येक की कीमत छह लाख रुपये बताई जा रही है। दुकानदार नगरपालिका को भारी-भरकम किराया देते हैं किंतु उनके लिए जनसेवा के नाम पर इस प्रकार की दुविधा मिल रही है।
 कनीना मंडी टी-प्वाइंट से अनाज मंडी को जाते समय पशु अस्पताल के पास ई-टायलेेट स्थापित की गई थी। तब यह माना जा रहा था कि लोगों को बड़ी सुविधा मिलेगी। पुराने वक्त की जनसुविधा को तोड़ दिया गया था वही पशुओं के लिए पानी के लिए खेल बनाई गई थी वह भी हटा दी गई थी। यह पूर्ण स्वचालित टॉयलेट इंसान के प्रवेश करने पर अपने आप बंद हो जाती थी और दूसरा व्यक्ति उसमें प्रवेश नहीं कर सकता था। इंसान जब इसका उपयोग कर लेता था पानी अपने आप चलता था किंतु वर्तमान में बेकार पड़ी है।        डा अजीत कुमार का कहना है कि कभी यहां पुराने समय की जनसुविधा थी जो लोगों के काम आ रही थी। उसको तोड़कर यह आधुनिक दर्जे की जनसुविधा बना तो दी किंतु दो सालों से काम ही नहीं कर रही जिसके चलते लोग इधर-उधर पेशाब करने को मजबूर है। महिलाएं तो बहुत परेशान है । कनीना मंडी टी प्वाइंट से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक अन्य कोई इस सड़क मार्ग पर जनसुविधा नहीं है। जन सुविधा के नाम पर दुविधा मिल रही है।
उधर सुरेंद्र कुमार दुकानदार का कहना है कि जन सुविधा के नाम पर परेशानी मिल रही है। लघु शंका के लिए भी उन्हें बहुत दूर जाना पड़ता है। जहां दुकान का काम छोड़कर दूर जाने से दुकानदारी भी खराब हो जाती है। वे नगरपालिका को किराया दे रहे हैं उसके बदले उन्हें इस प्रकार की घटिया दर्जे की जनसुविधा दी जा रही जो काम ही नहीं कर रही है। उन्होंने नगर पालिका से मांग की है कि इसे तुरंत चालू करवाया जाए ताकि लोगों को सुविधा प्राप्त हो सके।
 सुदेश यादव जो दुकानदारी करती है का कहना है कि पुरुष तो इधर-उधर लघु शंका के लिए जा सकते हैं किंतु महिलाएं कहां जाए? उनका कहना है कि पुराने समय में जो जन सुविधा थी वह कम से कम काम तो आ रही थी किंतु उसके बदले सरकार ने भारी पैसे भी लगा दिए और यह जन सुविधा काम भी नहीं कर रही है। ऐसे में उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस प्रकार की सुविधा तो दी उसे उसे चालू किया जाए। यदि कोई खराबी है तो उसे ठीक करवाया जाए। अगर पानी की सुविधा इसमें अभी तक नहीं हो पाई है तो पानी सुविधा प्रदान कर लोगों को जन सुविधा प्रदान की जाए।
नगर पालिका प्रधान सतीश जेलदार से इस संबंध में बात की तो उन्होंने कहा कि इस संबंध में बार बार उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है किंतु अभी तक उनके पास पूरी जानकारी नहीं है। या तो इनको किसी प्रकार ठीक करवाया जाएगा या फिर नया टायलेट बनवा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जब कनीना नगरपालिका के प्रशासक होते थे तब ये टायलेट खरीद कर सेट किये गए थे।
 फोटो कैप्शन 5: ई टॉयलेट जो बंद पड़ी है
 साथ में अजीत कुमार, सुदेश कुमारी, सुरेंद्र यादव , सतीश जेलदार की फोटो भी है

Tuesday, July 7, 2020


अब शिक्षक पहुंचे विद्यार्थियों को घर पर पढ़ाने

******************************
************************************
***********************
कनीना।हरियाणा सरकार द्वारा स्कूलों में 1 जुलाई से 26 जुलाई तक ग्रीष्मावकाश घोषित किए गए हैं। हालांकि 25 मार्च से ही लोक डाउन के कारण विद्यार्थियों को विद्यालय नहीं बुलाया जा रहा है परन्तु जून मास में सभी अध्यापक विद्यालय आते रहे हैं। नए आदेशों के बाद अध्यापक 26 जुलाई तक घर पर रहकर ही विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई करवाते रहेंगे। अध्यापकों द्वारा घर से करवाए जा रहे ई लर्निंग कार्य का मूल्यांकन आज पीचौपा कलां राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य अशोक पैकन ने गांव पिचौपा कलां में विद्यार्थियों के घर जाकर किया। प्राचार्य अशोक पैकऩ ने कक्षा 12 के सलीम, अनुज, साहिल, प्रवीण और किरण, कक्षा 10 की अनीता व काजल, कक्षा 9 के नसीब और कक्षा 7 के मोबीन के अध्ययन कार्य जांच की । किरण का कार्य सबसे अच्छा पाया गया जिस पर प्राचार्य ने किरण को बधाई दी। उन्होंने पढ़ाई के दौरान आने वाली कठिनाई के बारे में छात्रों से पूछा तो मोबीन और नसीब ने बताया कि उन्हें वीडियो देखकर समझ में आ जाता है लेकिन कई बार कागज पे लिखा हुआ पाठ कम समझ में आता है। इस पर प्राचार्य ने सभी अध्यापकों को आदेश दिया  है कि वे अधिक से अधिक वीडियो में सामग्री भेजें एवं फीडबैक कुछ बच्चों से ना लेकर सभी बच्चों से लें। प्राचार्य ने विद्यार्थियों को एजूसेट हरियाणा चैनल पर प्रसारित किए जा रहे शैक्षिक प्रसारण को देखने का तरीका भी समझाया।
उसके बाद प्राचार्य ने गांव के मौजीज लोगों से मुलाकात की और विद्यालय के मुख्य द्वार जो जर्जर अवस्था में हो रहा है उसके पुनर्निर्माण के बारे में चर्चा की जिस पर गांव की सरपंच के पति जय सिंह ने बताया कि वे इस मुख्य-द्वार को दुबारा बनाने की चर्चा आजकल में  ग्रामसभा में करेंगे और सबकी सहमति से द्वार बनाने का निर्णय अवश्य लिया जाएगा।
फोटो कैप्शन 4: अब घर जाकर अशोक पैकेन विद्यार्थियों को पढ़ाते हुए।

विवाहिता चढ़ी दहेज की बली, पुलिस ने किया मामला दर्ज

*******************************
************************************
कनीना। एक और विवाहिता दहेज की बली चढऩे पर मृतका के गांव वालों ने कनीना डीएसपी कार्यालय समक्ष रोष जताया।  रिवासा की लड़की कनीना खंड के गांव सुंदरह में विवाहिता थी।
       मृतका के चाचा सत्यवान ने बताया कि रीना की शादी लगभग दस वर्ष पहले संजय सुंदरह के साथ संपन्न हुई थी जिसमें लड़की वालों ने अपनी हैसियत से ज्यादा दहेज भी दिया था लेकिन कुछ दिन बाद ही लड़के वालों की मांग बढ़ती गई और कभी कुछ तथा कभी कुछ मांग करते रहे।  लड़की वालों द्वारा कुछ मांग पूरी करने के बाद भी उनकी लड़की को परेशान करते करने का सिलसिला जारी रहा। मायके वालों का आरोप है कि ससुराल वालों ने एक दिन तथाकथित रूप से इतना पीटा कि उसके पेट में पल रहे मासूम को चोट लगी तथा रीना की मौत हो गई। वही इसकी सूचना किसी ने उन्हें दूरभाष पर देकर बताया तो परिजनों ने आकर देखा तो रीना की मौत हो चुकी थी। वही मृतका के भाई उपेन्द्र ने जानकारी देते हुए बताया कि रीना ने कई बार उन्हें घर पर आकर बताया था कि ये लोग उन्हें बार-बार दहेज के लिए प्रताडि़त करते है और अब उन्हें तीसरा बच्चा होने वाला है। ससुराल पक्ष के सभी लोग उन्हें कहते आ रहे थे कि छुछक में स्विफ्ट डिजायर चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि वे कई बार उसके ससुराल वालो को समझाने के लिए भी आए और समझाया भी लेकिन बात सिरे नहीं चढ़ी। उपेन्द्र के बयान पर कनीना पुलिस ने मृतका के ससुर, सास, पति व तीन नन्दों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच आरंभ कर दी है लेकिन पांच दिन बीत जाने के बाद भी किसी कि भी गिरफ्तारी नही हो पाई है जिसको लेकर आज रिवासा निवासी सैकडों लोगों ने कनीना डीएसपी से मुलाकात की तथा दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की गुहार लगाई है।
फोटो कैप्शन 3: डीएसपी कार्यालय समक्ष रिवासा के लोग के लोग आंदोलन करते हुये।



गलती से जहरीला पदार्थ पीने से व्यक्ति की मौत

*******************************
****************************
कनीना। कनीना थाने  के गांव मालड़ा में एक व्यक्ति द्वारा गलती से अन्य दवाई पी लेने के कारण उसकी हालत बिगड़ी जिसे सरकारी हस्पताल में भर्ती कराया गया जिसकी  मौत हो गई।
मिली जानकारी के अनुसार खण्ड के गांव मालडा निवासी सुभाष पचास वर्ष जो अपनी किसी बिमारी की दवाई लेने के लिए उठा और बिजली नही होने के कारण उसी जगह रखी कीटनाशक अन्य दवाई पी लेने से उसकी तबियत बिगड़ गई जिसकी खबर जब घर वालों को लगी तो उन्होने उसे तुरन्त प्रभाव से अस्पताल दिखाया लेकिन उसकी दर्दनांक मौत हो गई। वही इसकी सूचना पुलिस को देकर मामले से अवगत कराया जिसको लेकर पुलिस शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम करा परिजनों को सौंप दिया।


जन्म दिन पर किया पौधारोपण

**************************
*************************  
कनीना। सेवानिवृत्त अधिकारी ने अपने जन्म दिन पौधारोपण किया और दूसरों को पौधे लगाने की प्रेरणा दी।
 सुरेन्द्र शर्मा सेवानिवृत्त रेलवे गार्ड के जन्मदिवस के अवसर पर लालगिरी आश्रम में पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें पीपल, बड़, पिलखन, आंवला तथा जामुन के पौधे  लगाये। सेवानिवृत्त होने के बाद सुरेंद्र शर्मा सामाजिक कार्यों में लगे हुए हैं तथा उन्होंने कहा कि इस मौसम में ज्यादा से ज्यादा पौधारोपण करके ही धरा को सुरक्षित रखा जा सकता है। ऐसे में सभी को अपने जीवनकाल में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए।
  उन्होंने कहा कि आज सबसे अधिक आवश्यकता पर्यावरण को शुद्ध करने की है। पूरा वायुमंडल दूषित हो चुका है। पौधों की अंधाधुंध कटने की वजह से मौसम में बदलाव आ गया है। इसलिए आने वाली पीढिय़ों को व अपने जीवन को बचाना है या सुरक्षित रखना है तो प्रत्येक को अधिक से अधिक पौधे लगाने चाहिए। जिससे प्रकृति का वातावरण साफ सुथरा बना रहे व हर प्राणी का जीवन सुरक्षित रहे। यह तभी संभव हो सकता जब हर व्यक्ति अपने जीवन में पौधरोपण करता रहे।
 इस अवसर पर उनके सुपुत्र प्रवक्ता सचिन शर्मा, केसी शर्र्मा, नितेश गुप्ता ,संजीव यादव उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 2: बरगद का पौधार लगाते हुये सुरेंद्र शर्मा।


भूल बम बम, बस वो काटा वो मारा

*********************************
**************************************
कनीना। हरियाली तीज के दृष्टिगत पतंगों की बहार आ गई है। सुबह से शाम अब वो मारा, वो काटा की आवाज सुनाई पड़ती है। वर्षों से इन दिनों बम बम का शोर सुनाई पड़ता था जो कोरोना की भेंट चढ़ गया और अब वो काटा वो मारा का शोर छतों पर सुनाई पड़ता है। युवा वर्ग इस मामले में अधिक सक्रिय है। सर्वाधिक पतंगबाजी हरियाली तीज पर होती है। उधर तीज एवं सिंधारा के दृष्टिगत बाजारों में घेवर की मिठाई की धूम मची हुई है। त्योहार पर घेवर का लेनदेन किया जाता है। आगामी 23 जुलाई को हरियाली तीज का पर्व मनाया जा रहा है।
  शहरी क्षेत्र में पतंगबाजी में तेजी आ गई है। बाजारों में दुकानों पर पतंग एवं डोर ही नजर आती है। युवा हो या बच्चा अपनी छतों पर सुबह शाम पतंगबाजी करता है। कोरोना के चलते छुट्टियां चल रही हैं जिसके चलते वे दिनभर छतों पर पतंगबाजी करते हैं।  एक ओर सिंधारा पर्व पर घेवर की मिठाई का बोलबाला है वहीं तीज पर्व पर पतंगबाजी का बोलबाला है। यूं तो इस सावन माह में उत्सवों की बहार है किंतु तीज पर्व का अपना ही महत्व है। सावन में आने वाली हरियाली तीज पर सर्वाधिक पतंगबाजी की जाती है तत्पश्चात पतंगबाजी में कमी आ जाती है।
   सावन माह में इस बार झूले कम ही नजर आते हैं। सावन माह में पुराने समय से झूलों पर झूलने की प्रथा थी किंतु अब वह प्रथा धीमी पड़ गई है। पतंगबाजी में युवा एवं बच्चों की अधिक भागीदारी होती है। दुकानदार योगेश कुमार, रोहित कुमार,सुरेश कुमार ने बताया कि इस बार पतंगबाजी के लिए युवा वर्ग में इतना उत्साह नहीं है जितना होना चाहिए।  
  वैसे तो पतंगबाजी का पर्व खुशी को इंगित करता है। वैसे तो बारिश के बाद ही पतंगबाजी की जाती है किंतु इस बार अभी तक बेहतर बारिश नहीं हुई है।
 अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में दो प्रकार की पतंग हवा में उड़ाई जाती है। एक पतंग के पूंछ होती है जिसे ' 'लंगरीÓ कहा जाता है तो दूसरी बगैर पूंछ की होती है जिसे 'लंड्डूÓ कहा जाता है। बगैर पूंछ की पतंग को पतंगबाजी के एक्सपर्ट जन ही लुत्फ उठा सकते हैं किंतु पूंछ वाली पतंग को छोटे बच्चे तक हवा में उड़ाकर लुत्फ लेते हैं। इन पतंगों के पेच लड़ाए जाते हैं।
   हरियाली तीज के दिन तो दिनभर डेक पर संगीत चलता है और छतों पर कई कई बच्चे इक_े होकर पतंगबाजी करते देखे जा सकते हैं। एक तरफ डेक का शोर सुनाई पड़ता है तो दूसरी ओर वो काटा वो मारा का शोर सुनाई पड़ता है।
  फोटो कैप्शन 7: पतंग उड़ाते बच्चे।

सावन माह है व्रत एवं आराधना का माह

************************************
इस वर्ष श्रावण माह का शुभारंभ उत्तराषाढ 






*****************************************
कनीना।  पंडित प्रदीप शास्त्री श्री श्याम मंदिर कनीना का कहना है कि नक्षत्र, सोमवार तथा वैधृति योग में हुआ है। इस श्रावण का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि सावन के प्रथम दिन भी सोमवार है और अन्तिम दिन रक्षा-बन्धन वाले दिन भी सोमवार है। इस प्रकार इस वर्ष सावन में पांच सोमवार का अति शुभ योग है।
सावन भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना है, अत: सावन भर शिव-पूजा-आराधना से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। शिव-शाक्त में शिव के साथ शक्ति की पूजा करने से प्राप्त फल के विषय में इस प्रकार उल्लिखित है- शिवेन सह पूजयते शक्ति:सर्व काम फलप्रदा- साथ ही सावन में शिव-शक्ति पूजा की फलश्रुति में स्पष्ट उल्लिखित है-यम यम चिन्तयते कामम तम तम प्रापनोति निश्चितम। परम ऐश्वर्यम अतुलम प्राप्यससे भूतले पुमान। अर्थात् इस भूतल पर समस्त प्रकार के रोग-व्याधि, पीड़ा एवं अभावों से मुक्ति दिलाने के लिए ही श्रावण माह में भगवान शिव अपने कल्याणकारी रूप में धरती पर अवतरित होते हैं। अत: विधि-विधान के साथ भगवान शिव का पंचोपचार पूजन करना अति फलदायक होगा। हमारे जीवन में भगवान शिव मनोवांछित फल देने वाले हैं इसलिए हमें सावन मास में भगवान शिव की आराधना जाप करना चाहिए सर्वप्रथम शिव जी को पंचामृत स्नान कराकर गंगा-जल अथवा शुद्ध जल में कुश, दूध, हल्दी एवं अदरक का रस मिलाकर रूद्राभिषेक करने से वर्तमान में व्याप्त वैश्विक महामारी 'कोरोनाÓ का अन्त सम्भव है। साथ ही व्यक्ति वर्ष पर्यंत धन-धान्य से पूर्ण रहते हुए निरोग रहेगा।इस मंत्र के साथ 12 बेल पत्र अर्पित करें।
अभिषेक के बाद अथवा नित्य शिव जी को कम से कम 12 बेल पत्र चढ़ाएं। सभी बेलपत्र पर देशी घी से राम-राम लिख कर ओम नम: शिवाय शिवाय नम:मन्त्र से एक-एक कर शिव जी को अर्पित करें। बेलपत्र 12 ही नहीं अपितु यथा शक्ति 108 या 1100 भी चढ़ा सकते हैं। बेलपत्र अर्पित करने के बाद ओम स: जूँ स: इस मन्त्र का जाप करने से आयु, आरोग्य और ऐश्वर्य की वृद्धि होती.. है।शिव-पुराण के अनुसार, सावन मास में शिव शक्ति अर्थात् देवी के साथ भू-लोक में निवास करते हैं। अत: शिव के साथ भगवती की भी पूजा करनी चाहिए। श्रावण मास में भगवान शिव की जलहरि या अर्घे में भगवती पार्वती का निवास होता.....
शिवजी को भस्म अवश्य लगाना चाहिए। भस्म मौलिक-तत्व का प्रतीक है और वृषभ( बैल) जगत जननी धर्म-प्रतीक शक्ति का प्रतिनिधि है। अपने समस्त कार्य-सिद्ध हेतु शिव के उन सिद्ध मन्त्रों का पाठ करना चाहिए, जिनसे शक्ति दुर्गा की भी स्तुति हो।
मंत्र -ओम हौ जूं स: भूर्भुव: स्व:  ओम    त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ओम स्व: भुव: भू: ओम स: जूं हौं ओम !! इस मंत्र के जाप से हमारे जीवन में हमारी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं
   फोटो कैप्शन: प्रदीप शास्त्री





Monday, July 6, 2020

फल सब्जियों में आया अचानक उछाल न
-दोगुने हुए भाव 

****************************
****************************
*****************************
 कनीना। कनीना क्षेत्र में फल और सब्जियों के भाव सोमवार को दोगुने हो गए हैं। जहां सोमवार से सावन शुरू होने के कारण व्रत चलते हैं इसलिए भी फल एवं सब्जियां महंगी हो गई।  खीरा और आम 50 रुपये किलो बिके। हल्के दर्जे के आम भी 50 रुपये किलो और बढिय़ा आम 100 रुपये किलो बीके।
अन्य दिनों हल्के दर्जे के आम 25 से 30 रूपए किलो बिकते हैं। खीरा 20 रुपये बिकती थी आज वह भी 50 रुपये किलो बिक रही है। लौकी 20 रुपये, जबकि अन्य दिनों दस रुपये किलो बिकती हरा धनिया हरा धनिया 800 रुपये किलो पहुंच गया है। यहां तक कि बाजार में सब्जी की आवक घट गई है तथा विवाह शादियां बंद होने के बावजूद भी आज फल सब्जियां महंगी हैं। केला 70 रुपये दर्जन बिका वही वही अदरक 125 रुपए किलो भिंडी 40 से 50 रुपये किलो तथा अन्य सब्जियां भी बहुत महंगे दामों पर बिक रही थी।
ग्राहक सूबे सिंह, अजीत कुमार, रवि कुमार, सुरेश कुमार आदि ने बताया कि सोमवार की वजह से भी महंगाई बढ़ी हुई है। सावन माह के चलते भी ऐसा हुआ है। जिसके कारण ही फल सब्जियां महंगी कर दी गई है जहां इस बार मेले उत्सव नहीं लगे।


 इक्का-दुक्का नजर आए जल अर्पित करने वाले 

*************************************
 कनीना। कनीना क्षेत्र में जहां सावन के प्रथम सोमवार को बहुत कम भक्त मंदिरों में पहुंचे। इस बार बड़ी ही सावधानी से इक्का-दुक्का जल अर्पित करने जा रहे थे। अधिकांश वक्त अपने घरों में ही रहकर जल अर्पण का कार्य किया। इस बार जहां कांवड़ पर प्रतिबंध है वहीं मंदिरों में भीपर लगने वाले मेले भी बंद कर दिए गए हैं। ऐसे में जहां इस बार यह पर्व भी कोरोना की भेंट चढ गया है।

घर पर ही पूजा-अर्चना शुरू
-कावड़ नहीं आ सकेंगी 

****************************
*****************************
कनीना। इस बार कावड़ हरिद्वार से नहीं आने के कारण जो पुराने कावडि़ए थे वे घर पर ही अपने पूजा अर्चना करके जल अर्पित कर रहे हैं। कनीना कस्बे के करीब एक हजार वक्ति कावड़ लाने हर वर्ष हरिद्वार जाते रहे हैं। जहां तक की डाक कावड़ में भारी हंगामा होता आया है किंतु इस बार सभी प्रकार की कावड़ प्रशासन द्वारा बंद कर दी गई है। जिसको लेकर के पुराने भक्त अब घर पर ही शिवलिंग अभिषेक करने लगे हैं।
कनीना के ज्योतिषाचार्य सुरेंद्र शर्मा का कहना है कि कोरोना के दृष्टिगत इस बार घर पर ही पूजा अर्चना की जाए। शिवलिंग अभिषेक किया जाए। बेलपत्र, आक, धतूरा आदि से  विधि विधान से शिवलिंग का अभिषेक करके प्रतिदिन पूजा अर्चना करके ओम नम: शिवाय का जाप किया जाये।
सबसे पुराने कावडि़ए सुमेर सिंह चेयरमैन ने बताया कि वे लगातार 50 कावड़ ले आए हैं और इस बार भी वे कावड़ लाते लेकिन मजबूरी है कि कोरोना फैल गया है। अभी अपने घर पर ही शिवलिंग पर जल अर्पित करेंगे। जब भी समय लगेगा आसपास किसी शिवालय में जाकर भी जल अर्पित करेंगे। उनका कहना है कि कोरोना के दृष्टिगत सरकार ने जो फैसला लिया है उचित लिया है। ऐसे में इस फैसले का हमें आदर करना चाहिए और इस बार घर पर ही शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए।
अनिल कुमार का कहना है कि वर्षों से 30 कांवड़ अर्पित कर चुके हैं किंतु इस बार जहां कोरोना के दृष्टिगत कांवड़ नहीं लाएंगे। अपने घर पर ही शिव को प्रसन्न करेंगे। पूजा-अर्चना करेंगे, परिवार सहित पूजा अर्चना करके शिव को प्रसन्न करेंगे। उनका कहना है कि शिव भोले तो बहुत अल्प से ही प्रसन्न हो जाते हैं। ऐसे में हम विगत वर्षों में लाया गया गंगाजल ही अर्पित करके  शिव की पूजा करेंगे। उन्होंने कहा कि इस बार सरकार का जो निर्णय है वह ठीक साबित हो रहा है।
पुराने कावडि़ए भरपूर सिंह का कहना है कि वे 16 कावड़ लेकर आए थे किंतु दुर्भाग्यवश उनके पैरों में दर्द शुरू होने से कावड़ नहीं ला पा रहे थे ऊपर से इस बार कोरोना के चलते भी कावड़ नहीं लाएंगे। उनका कहना है घर पर ही जल अर्पित करने के अतिरिक्त पास में बने हुए शिवालय में भी जाकर जल अर्पित करेंगे। उन्होंने सरकार के लिए गए कांवड़ न लाने के निर्णय स्वागत किया है और कहा है कि यह उचित कदम है ताकि कोरोना बीमारी पर काबू पाया जा सके। भरपूर सिंह ने तो शिव से प्रसन्न होकर शिवालय का निर्माण भी कनीना में किया है।
कनीना के सज्जन बौहरा, भीम सिंह एचएस यादव, पोप सिंह आदि ने बताया कि वह इस बार घर पर ही शिव की पूजा करेंगे और उन्हें जल अर्पित करेंगे।
 फोटो कैप्शन:सुरेंद्र शर्मा, सुमेर सिंह भरपूर सिंह तथा अनिल कुमार

श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्मदिवस मनाया  

**************************************
**********
 कनीना। भाजपा कनीना मंडी स्थित ओम प्रकाश लिशानिया जिला सचिव के प्रतिष्ठान पर लड्डू ,सैनिटाइजर मास्क बांटकर डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी को याद किया। इस अवसर पर श्री लिसानिया ने कहा कि  देश हित में कश्मीर में जाकर भारतीयों पर लगा बैन हटवाया। एक देश में दो प्रधान दो विधान नहीं चलने का नारा दिया। कश्मीर कोई भी भारतीय जा सकेगा, यह बंधन तोड़कर भारत सरकार को चेताया था। इस कार्यक्रम में राजकुमार चेयरमैन, नवीन मित्तल कंवर सेन वशिष्ठ, देशराज यादव, अरुण कौशिक ,प्रेम गुप्ता तथा अन्य मौजूद थे।
 फोटो कैप्शन 4: श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जन्म दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बांटते हुए मास्क।

करोना एक वायरस बचाव व जागरूकता से दे सकते हैं मात-एसडीएम
करोना जागरूकता रथ कनीना पहुंचने पर एसडीएम ने हरीझंडी दिखाकर किया रवाना

*************************************** 
कनीना। कोरोना एक वायरस है जिसको सावधानी व जागरूकता से हम मात दे सकते है। इसमें थोड़ी सी भी लापरवाही आपके जीवन को भारी पड सकती है। करोना वायरस में छोटी-छोटी लेकिन बहुत जरूरी बातों का ध्यान रखकर हम इसको फैलने से रोक सकते है।
ये बातें एसडीएम रणबीर सिंह ने करोना रथ को हरी झंडी दिखाते हुए कहीं। करोना रथ को हरी झंडी दिखाने से पहले एसडीएम ने झंडी को भी सैनेटाइज किया। सभी रथ के सदस्य चेहरे पर मास्क लगाए हुए थे। एसडीएम रणबीर सिंह ने कहा कि कोरोना महामारी इस समय अपने पूरे चरम पर पहुंच चुकी है। हमें चाहिए की छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखते हुए इसको मात देनी चाहिए। उन्होंने बताया कि हमें चाहिए की बार-बार हाथों को साबुन से धोना चाहिए, किसी भी वस्तु या कागज को लेने या देने के बाद अपने हाथों को अवश्य धोना चाहिए। क्योंकि करोना वायरस कागज के माध्यम से भी आपके शरीर में प्रवेश कर आपको संक्रमित कर सकता है। उन्होंने बताया कि अकसर देखा जाता है कि कोई व्यक्ति करोना वायरस से संक्रमित हो जाता है तो उसको घृणा की दृष्टि से देखा जाता है। लेकिन हमें अपने लोगों से इस तरह का व्यवहार नहीं करना चाहिए। संक्रमित लोगों की हरसंभव मदद करने के लिए हमें आगे आना चाहिए।
वहीं रथ के साथ आए प्रवक्ता अशोक कुमार व हरी किशन गौड रेडक्रांस वॉलिटियरों ने भी लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि हमें बीमारी से लडऩा है नाकि बीमार से। हमें अपने लोगों को वायरस के प्रति जागरूक करते हुए इस महामारी को बढने से रोकना होगा। रथ के साथ दयानंद यादव, राजेश यादव, अशोक कुमार, अजय कुमार, राजेश शर्मा, रेडक्रास कार्यालय से लिपिक घनश्याम वर्मा मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन 5: कोरोना वैन को हरी झंडी दिखाते एसडीएम कनीना।

अजय मोड़ी ने किन्नू उगाकर कमाया नाम 

*********************************
 कनीना। मोड़ी गांव का किसान अजय हर वर्ष किन्नू उत्पादन से बेहतर नाम कमाया है।
उन्होंने अपने करीब 2 एकड़  जमीन पर तीनों उगा रखे हैं जहां उनके बीच में वह फसल भी लेता है यहां तक कि सब्जी उत्पादन करता है। वही बेहतरीन दर्जे कीन्नू पैदा कर लेता है। हर वर्ष 30 से 50 हजार रुपये के कीन्नू बेच देता है। जिससे उनका गुजर बसर हो रहा है। उनका कहना है कि वैसे तो फसल उत्पादन उनका मुख्य कार्य है और उसी से आय होती किंतु कीन्नू उत्पादन उनके लिए बहुत अधिक फायदेमंद बन रहा है उनके परिजन गजराज सिंह मोड़ी, सतीश कुमार आदि ने भी  सब्जी उत्पादन में नाम कमाया है। अब वे  भी अपने परिजनों के पद चिन्हों पर चलते हुए नाम कमा रहे हैं। उन्होंने बताया करीब 4 साल पहले उत्पादन शुरू हो गया था। प्रारंभ में काम केकम कीन्नू का उत्पादन हुआ जो बाद में धीरे-धीरे इनकी मात्रा बढ़ती चली गई और आज के उत्पादन पूरे यौवन पर है।
उन्होंने बताया कि आज के युग में जहां फसल  की बजाए कीन्नू उत्पादन ज्यादा कारगर होता है। फल और सब्जी मार्केट में मांग होती है। इसलिए उन्होंने ये पौधे उगाए हैं। एक बार यह गाय के पौधे 15 से 20 सालों तक जरूर चलेंगे।  उन्होंने बताया कि जैसे 2 एकड़ जमीन पर वह फसल भी ले लेते हैं वही अपनी फल उत्पादन कर गुजर-बसर कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि कीन्नू उत्पादन उनके बहुत कारगर साबित हो रहा है। दूसरों को भी प्रेरणा दे रहे हैं ताकि वह भी कीन्नू जैसे फल पैदा करे और लाभ कमाए।
फोटो संलग्र हैं।

बेर बेचकर लाखों रुपये कमाये हैं महाबीर करीरा ने

********************************
***********************
कनीना। सरकार द्वारा सम्मानित जिला महेंद्रगढ़ के करीरा के किसान महाबीर सिंह ने अब बड़े एवं वजनी बेर पैदा करके नाम कमाया है। कृषि विभाग ने उनके बेरों को प्रदर्शनी में भेजकर सम्मान दिलाने की बात कही है। प्रतिवर्ष 3 लाख रुपये तक कमा लेता है किंतु बीते सीजन में सर्दी ने बेर की खेती बर्बाद कर देने से आर्थिक लाभ कम हुआ।
  करीरा गांव का सामान्य किसान महाबीर सिंह मिश्रित कृषि करके कभी से नाम कमाता आ रहा है किंतु अब उन्होंने बेरों की बेहतर क्वालिटी लगाकर सिद्ध कर दिया है कि इस क्षेत्र में बेरी के पौधे लगाकर भी एक लाख रुपये प्रति एकड़ में अकेले बेर उत्पादन से कमा सकते हैं। वे दूसरों के लिए एक उदाहरण बनकर सामने आए हैं।
  एक एकड़ में बेरी, लेहसुआ, जामुन, बेलगिरी, नींबू तथा दूसरे फलदार पौधे उगाकर न केवल बागवानी को बढ़ावा दे रहे हैं अपितु इन फलदार पौधों के नीचे मटर, दलहन, लहसुन, प्याज, चना, आलू तथा दूसरी फसलें उगाकर किसानों को नई राह दिखा रहे हैं। केंचुआ पालन, डेयरी, फसल उत्पाद स्टोर आदि का काम भी कर रहे हैं।
  आश्चर्यजनक पहलु हैं कि उन्होंने अपने खेत में करीब एक सौ बेरी के पौधे उगा रखे हैं। इन पौधों पर 60 ग्राम प्रति बेर वजनी बेर पैदा कर दिखलाए हैं जिन्हें देखने के लिए किसान आ रहे हैं। किसान महाबीर सिंह ने कहा कि प्रतिदिन करीब 80 किलो ग्राम बेरों का उत्पादन होता है और वे चुन-चुनकर बेर बाजार तक ले जाते हैं जिनकी बाजार में भारी मांग है।
 किसान ने बताया कि इन बेरों की देखरेख अधिक चाहिए। अकेले बेरों से वे प्रतिवर्ष एक लाख के करीब राशि कमा लेते हैं किंतु गुड़ाई, स्प्रे, उर्वरक के अलावा देखरेख करने वाले पर 30 से 40 हजार रुपये खर्च कर देते हैं।
  वे बेर की खेती विगत कई वर्षों से करते आ रहे हैं और दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। फसल उत्पादन भी बेरों के बाग में करते हैं वहीं वे सब्जी भी उगाते हैं।
दक्षिण हरियाणा के किसान दो प्रकार की बेरी उगा रहे हैं। एक बेरी तो देसी नाम से जानी जाती है जिसके बेर अधिक लाल होने के साथ-साथ गोल होते हैं। जिनका स्वाद अधिक मधुर होता है और देखने में भी मन भावन होते हैं। देसी बेरी भी दो किस्मों की होती है। एक तो आकार में छोटी होने के कारण अक्सर 'झाड़Ó में शामिल की गई है वहीं दूसरी बड़े आकार की होती है। दोनों पर ही गोल एवं मधुर फल लगते हें जो रुचिकर होते हैं। ये दोनों ही बेरी दक्षिण हरियाणा के खेतों में भारी मात्रा में अपने आप ही पैदा हो जाती हैं। यद्यपि किसानों को फसल के साथ बेरी न होने की कृषि वैज्ञानिक सलाह देते हें फिर भी किसान खेत में इन बेरी के पौधों से बेर व फसल साथ प्राप्त करते हैं।
  इस क्षेत्र में एक ओर बेरी बहुत लोकप्रिय होती जा रही है जिसे ' बागों की बेरीÓ नाम से जाना जाता है। यह बेरी कम कांटों वाली तथा धरती की ओर झुकने वाली होती हैं। इस बेरी के फल हरे व पीले रंग के होते हैं और आकार लंबा एवं वजन अधिक होने के कारण किसान इसे अधिक पसंद करते हैं।
ये बेर बाजार में भी अधिक लोकप्रिय होते हैं। यूं तो कहा जाता है कि जो गरीब लोग सेब जैसे महंगे फल का उपभोग नहीं कर पाते हैं उनके लिए बेर ही सेब का काम करते हैं। जी-भरकर गरीब लोग इन बेरों का लुत्फ उठाते हैं। यही कारण है कि बेर को गरीबों का सेब नाम से भी जाना जाता है।
   एक वक्त था जब केवल किसान अपने खेतों में पुराने तरीके से केवल फसल पैदावार ही लेता था और किसान की हालात माली होती थी किंतु अब तो किसान भी कृषि के आधुनिक उपकरणों व कृषि भी वैज्ञानिक ढंग से करने लगा है। आज का किसान अपनी आय और व्यय का पूरा हिसाब रखने लगा है। यही कारण है कि बागवानी की ओर भी उसका रुझान बढ़ता ही जा रहा है।
  बागवानी विभाग के वैज्ञानिक कहते हें कि दक्षिण हरियाणा में भूमि बेरी पौधे के लिए अति अनुकूल है। ऐसे में किसान बेरी की कृषि करने में लगे हैं। हालात यह है कि एक नकदी फसल के रूप में बेर को किसान बाजार में बेचने के लिए जाते हें और आय प्राप्त करने लगे हैं। बेर की मांग जहां ताजा फलों के रूप में होती है वहीं इन्हें सूखाकर भी प्रयोग किया जाता है। बेर की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह कई-कई दिनों तक खराब नहीं होता है वहीं इसे आवश्यकता पडऩे पर सूखाकर रखा जाता है। सूखाकर भी किसान इसे 'छुआराÓ के रूप में बेचता है। सूखे बेर मेवे का काम भी करते हैं।
फोटो साथ हैं

सावन माह है व्रत एवं आराधना का माह
इस वर्ष श्रावण माह का शुभारंभ उत्तराषाढ 

*************************************
कनीना। नक्षत्र, सोमवार तथा वैधृति योग में हुआ है। इस श्रावण का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि सावन के प्रथम दिन भी सोमवार है और अन्तिम दिन रक्षा-बन्धन वाले दिन भी सोमवार है। इस प्रकार इस वर्ष सावन में पांच सोमवार का अति शुभ योग है।
सावन भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना है, अत: सावन भर शिव-पूजा-आराधना से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। शिव-शाक्त में शिव के साथ शक्ति की पूजा करने से प्राप्त फल के विषय में इस प्रकार उल्लिखित है- शिवेन सह पूजयते शक्ति:सर्व काम फलप्रदा- साथ ही सावन में शिव-शक्ति पूजा की फलश्रुति में स्पष्ट उल्लिखित है-यम यम चिन्तयते कामम तम तम प्रापनोति निश्चितम। परम ऐश्वर्यम अतुलम प्राप्यससे भूतले पुमान ।। अर्थात् इस भूतल पर समस्त प्रकार के रोग-व्याधि, पीड़ा एवं अभावों से मुक्ति दिलाने के लिए ही श्रावण माह में भगवान शिव अपने कल्याणकारी रूप में धरती पर अवतरित होते हैं। अत: विधि-विधान के साथ भगवान शिव का पंचोपचार पूजन करना अति फलदायक होगा। हमारे जीवन में भगवान शिव मनोवांछित फल देने वाले हैं इसलिए हमें सावन मास में भगवान शिव की आराधना जाप करना चाहिए सर्वप्रथम शिव जी को पंचामृत स्नान कराकर गंगा-जल अथवा शुद्ध जल में कुश, दूध, हल्दी एवं अदरक का रस मिलाकर रूद्राभिषेक करने से वर्तमान में व्याप्त वैश्विक महामारी 'कोरोनाÓ का अन्त सम्भव है। साथ ही व्यक्ति वर्ष पर्यंत धन-धान्य से पूर्ण रहते हुए निरोग रहेगा।
इस मंत्र के साथ 12 बेल पत्र अर्पित करें।
अभिषेक के बाद अथवा नित्य शिव जी को कम से कम 12 बेल पत्र चढ़ाएं। सभी बेलपत्र पर देशी घी से राम-राम लिख कर ओम नम: शिवाय शिवाय नम:मन्त्र से एक-एक कर शिव जी को अर्पित करें। बेलपत्र 12 ही नहीं अपितु यथा शक्ति 108 या 1100 भी चढ़ा सकते हैं। बेलपत्र अर्पित करने के बाद ओम स: जूँ स: इस मन्त्र का जाप करने से आयु, आरोग्य और ऐश्वर्य की वृद्धि होती.. है।शिव-पुराण के अनुसार, सावन मास में शिव शक्ति अर्थात् देवी के साथ भू-लोक में निवास करते हैं। अत: शिव के साथ भगवती की भी पूजा करनी चाहिए। श्रावण मास में भगवान शिव की जलहरि या अर्घे में भगवती पार्वती का निवास होता.....
शिवजी को भस्म अवश्य लगाना चाहिए। भस्म मौलिक-तत्व का प्रतीक है और वृषभ( बैल) जगत जननी धर्म-प्रतीक शक्ति का प्रतिनिधि है। अपने समस्त कार्य-सिद्ध हेतु शिव के उन सिद्ध मन्त्रों का पाठ करना चाहिए, जिनसे शक्ति दुर्गा की भी स्तुति हो।
मंत्र -ओम हौ जूं स: भूर्भुव: स्व:  ओम    त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ओम स्व: भुव: भू: ओम स: जूं हौं ओम !! इस मंत्र के जाप से हमारे जीवन में हमारी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं
            ओम नम: शिवाय